तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में गांधी परिवार के तीन अहम सदस्य- सोनिया, राहुल और प्रियंका से हाल ही में हुई कमल हासन की मुलाकात के गहरे मायने हैं। इस मुलाकात में सोनिया गांधी ने स्वाभाविक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नकारात्मक पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि कमल हासन ने इन तीनों के समक्ष डीएमके, एआईएडीएमके और भाजपा की राजनीति के प्रति अपना नजरिया व्यक्त किया। बैठक में हासन ने तमिलनाडु की विभिन्न प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की।
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु के क्षेत्रीय दलों की ताकत की असली परीक्षा होगी। आरके नगर उपचुनाव में बागी नेता दिनाकरण से मिली मात को अलग कर दिया जाए, तो यह पहली दफा होगा, जब राज्य में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के संयुक्त नेतृत्व में किसी बड़े चुनाव में उतरेगी। यह भी पहली बार ही होगा कि डीएमके अपने नए नेता एमके स्टालिन के नेतृत्व में मैदान में उतरेगी। और इस बात को कौन भूल सकता है कि दक्षिण के दो सुपरस्टार कमल हासन और रजनीकांत, तमिल राजनीति के अखाड़े में अपने दांव-पेच आजमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह स्पष्ट है कि आगामी लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु से किसी एक पार्टी का उभरकर सामने आना मुश्किल है। जनादेश खंडित होगा, 2014 की तरह नहीं, जब जयललिता ने 39 में से 37 सीटों पर अन्नादम्रुक को जीत दिलाई थी। कमल हासन नई दिल्ली में इसलिए भी थे, क्योंकि उन्हें अपनी नव सृजित पार्टी मक्कल निधि मय्यम के पंजीकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी थीं।
हालांकि अभिनेता से नेता बने हासन ने इस मुलाकात को केवल 'सौजन्य भेंट' ही बताया, लेकिन राजधानी में यह चर्चा आम रही कि तमिल राजनीति की नई पठकथा लिखी जा रही है। जिसे मुलाकात के बाद कांगेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट से बखूबी समझा जा सकता है। राहुल ने लिखा कि, 'कमल हासन के साथ बैठक का आनंद लिया, हमने तमिलनाडु के राजनीतिक हालात के साथ हमारी पार्टियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की'। इस ट्वीट के जवाब में कमल ने भी ट्वीट किया। उन्होंने वक्त और सुझाव देने के लिए 'राहुल गांधी जी' को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि बैठक से उन्हें भी फायदा हुआ होगा।
खास बात यह रही कि जब राहुल और हासन तमिलनाडु की राजनीति पर चर्चा करने में मशगूल थे, तभी प्रियंका गांधी उन दोनों की बातचीत में शामिल हो गईं। पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में इन दोनों नेताओं ने मंच साझा किया था। तभी से ही हासन और कांग्रेस के बीच नजदीकी देखी जा रही थी। ऐसे वक्त में, जब कांग्रेस देश भर में एनडीए से बाहर की सभी पार्टियों को साथ लेकर महागठबंधन बनाकर अगले चुनाव में जाना चाहती है, उसके लिए यह सबसे बेहतरीन मौका है कि वह तमिलनाडु में जयललिता के निधन के बाद अपनी खोई हुई जमीन दोबारा हासिल करे, जहां अब तक वह डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही है।
यह लगभग असंभव है कि 2019 में किसी एक पार्टी की लहर होगी। यह भी रोचक है कि कमल हासन से मिलने से पहले राहुल गांधी ने एक अन्य क्षेत्रीय तमिल पार्टी विदुथलाई चिरुथैगल काची के नेता थिरुमवलवन से भी मुलाकात की। राहुल का लक्ष्य है कि वह डीएमके और दूसरे छोटे दलों के साथ मिलकर दक्षिण के इस अहम राज्य से कम से कम बीस सीटें जरूर जीतें। वैसे भी कांग्रेस तमिलनाडु में अपने पुराने महारथियों, जिनमें पी चिदंबरम, के वी थंगाबालू और ईवीकेएस एलंगोवन के बजाय नए चेहरों पर दांव खेलना चाहेगी।