तिब्बती फिल्मकार और लेखक पेमा सेदेन इन दिनों शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। वर्षों तक उन्होंने चीनी के साथ-साथ अपनी तिब्बती भाषा में बेहद सहजता से कहानियां और फिल्मों की पटकथाएं लिखीं। लेकिन बाद के दिनों में फिल्मों और विज्ञापनों की भारी व्यस्तता के बीच उनके पास सिर्फ उस चीनी भाषा में लिखने का ही विकल्प रह गया, जो न केवल उनकी दूसरी भाषा है, बल्कि कभी-कभी वह तिब्बती पर चीनी भाषा को तरजीह भी देते रहे हैं।
अपनी मातृभाषा तिब्बती की उपेक्षा का तीव्रतर भाव हाल के दिनों में उनमें तब आया, जब उन्होंने खुद को एक ऐसी किताब के लोकार्पण के अवसर पर मंच पर पाया, जो उन्हीं की चीनी भाषा में लिखी पुस्तक थार्लो थी, जिसका किसी ने तिब्बती में अनुवाद किया था। 'किसी दूसरे व्यक्ति ने मेरे उपन्यास का मेरी मातृभाषा में अनुवाद किया, जो सुनने में बेहद अजीब लगता है,' जिंपा और थार्लो जैसी बेहद चर्चित फिल्मों के मृदुभाषी निर्देशक पेमा सेदेन ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कही।
खुद को दोषी मानने की बात एक ऐसे व्यक्ति के मुंह से सुनी जा रही है, जिसके व्यक्तित्व और कृतित्त में उसकी तिब्बती पहचान केंद्रीय स्थान रखती है। और उनकी यह स्वीकारोक्ति उस विरोधाभास के बारे में बताती है, जिसका सामना चीन में प्रशिक्षित तिब्बती फिल्मकारों की नई पीढ़ी को रोज ही करना पड़ता है। उनचास साल के पेमा चीन में काम करने वाले ऐसे पहले तिब्बती फिल्मकार हैं, जिसने तिब्बती भाषा की एक पूरी फिल्म की शूटिंग चीन में की है। वह प्रसिद्ध बीजिंग फिल्म एकेडेमी से ग्रेजुएट होने वाले पहले तिब्बती फिल्मकार भी हैं।