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लेखन न केवल मुक्त करता है, बल्कि सुखद भी है...

Fri, 17 May 2019 01:26 PM IST
शरद मिश्र चार्ल्स बुकोवस्की
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मैंने पहली बार तेरह साल की उम्र में लिखना शुरू किया। इससे पहले मैंने अच्छी शिक्षा पाई  थी। हां, मैंने कभी कॉलेज में पढ़ाई नहीं की। मैंने सैकड़ों नौकरियां कीं, खराब से खराब नौकरियां। जब मैं पैंतीस वर्ष का था, उस समय वर्षों से अत्यधिक शराब के सेवन के कारण मुझे भारी रक्तस्राव होने लगा। यह समझिए कि मैं लगभग मरणासन्न था। अस्पताल के लोगों ने मुझे खैराती वार्ड में डाल दिया और मेरे मरने की प्रतीक्षा करने लगे। लेकिन मैं मरा नहीं। मैं फिर  से स्वस्थ हो गया।

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अस्पताल से बाहर निकल कर मैंने ट्रक ड्राइवर की नौकरी पाई और खाली समय में कविताएं लिखने लगा। वास्तव में पिछले दस वर्षों से मैंने लिखना छोड़ दिया था। मुझे  नहीं पता था कि उन कविताओं को कहां भेजूं। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे टैक्सास की एक पत्रिका  को अपनी कविताएं भेज दीं। मुझे लगा कि ये कविताएं एक दिन लौट के आ जाएंगी और शायद  कहीं प्रकाशित नहीं होंगी, लेकिन मुझे उस पत्रिका की संपादक का एक बड़ा सा पत्र मिला,  जिसमें उसने मुझे प्रतिभावान व्यक्ति बताया था।

बाद में वह मुझसे मिलने भी आई और हम दोनों  ने शादी भी कर ली, लेकिन वह शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली। हम दोनों का तलाक हो  गया और बाद में मैंने एक दूसरी महिला से शादी कर ली। हमारी एक बेटी भी है, जो  प्रतिभाशाली है। लोग जब कहते हैं कि लिखना बहुत दर्दनाक और कष्टकर है, तो मैं उनकी बात समझ नहीं पाता हूं, क्योंकि मेरी समझ से लेखन जाने-पहचाने पर्वत से लुढ़कने जैसा है। इसमें आनंद आता है।
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लेखन न  केवल आपको मुक्त करता है, बल्कि सुखद भी है। यह एक तरह से उपहार है, क्योंकि आपको अपने  मनचाहे काम के लिए पैसा भी मिलता है। मैं इसलिए लिखता हूं, क्योंकि इसके लिए मुझे अंदर से  प्रेरणा मिलती है और बाद में पैसा भी। -जर्मनी में जन्मे अमेरिकी कवि

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