यह कहना ज्यादा उचित होगा कि तेहरान और काहिरा (जिसे मैं बचपन से जानती हूं) ने मेरे ऊपर जबर्दस्त प्रभाव डाला है। हालांकि जब मैं छोटी थी, तभी से मुझे पता था कि मैं जहां हूं, उसके अलावा भी कई अन्य जगहें हैं। खासकर काहिरा में एक प्रवासी कर्मचारी के बच्चे के रूप में मुझे अपने आरामदायक घर और फैंसी कपड़ों को लेकर शर्म महसूस होती थी। मुझे इसलिए अपने जीवन से शर्म हो रही थी, क्योंकि मैं जिस आरामदायक जीवन का आनंद ले रही थी, वह मेरे अपने प्रयासों का परिणाम नहीं था। यह सब कुछ मुझे संयोग से मिला था। वहीं बहुत सारे ऐसे बच्चे थे, जिन्हें अत्यंत कठिन जिंदगी का सामना करना पड़ रहा था, जिसे उन्होंने खुद अपने लिए नहीं चुना था। मैं हमेशा उन बच्चों और अपने बीच के अंतर के बारे में सोचती रहती थी। बचपन में देखी इन्हीं विसंगतियों ने मुझे लेखिका बना दिया। और मुझे पक्का यकीन है कि मेरे सृजनात्मक लेखन पर इसका काफी प्रभाव पड़ा है। मैं उन्हें पैदा होने और जीवित रहने के लिए बधाई देना चाहती हूं। ईमानदारी से कहूं, तो मैंने कभी स्वयं को महिला रचनाकार के तौर पर नहीं देखा, मैं स्वयं को मात्र एक लेखिका मानती हूं। महिला लेखिकाओं की वर्तमान सफलता से भी ज्यादा जो बात जापान में मुझे सबसे ज्यादा हैरान करती है, वह है साथी रचनाकारों का सहयोग। अक्सर माना जाता है कि लेखक अपने अलावा किसी दूसरे के लेखन को बकवास मानते हैं और साथी लेखकों की रचनाओं के कठोर निंदक होते हैं। महिला रचनाकारों के बारे में माना जाता है कि वे ईर्ष्यालु होती हैं और हमेशा प्रभुत्व स्थापित करना चाहती हैं। लेकिन वास्तव में हम एक-दूसरे के अच्छे दोस्त होते हैं, जैसी कि अन्य क्षेत्रों के लोगों में भाईचारे की भावना होती है। प्रतिद्वंद्वी होने से पहले हम एक-दूसरे के सच्चे साथी होते हैं।
-जापान की मशहूर लेखिका