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भारत में विदेशी निवेश ने पकड़ी रफ्तार, क्या अब बढ़ेंगी नौकरियां भी?

अमर उजाला डेस्क, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 29 Oct 2026 06:52 AM IST

सार

आरबीआई के अनुसार, एफडीआई में भारी वृद्धि और चालू वित्त वर्ष में इसके देश के इतिहास में पहली बार 100 अरब डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान वाकई ऐतिहासिक है। पर, ये आंकड़े तभी सार्थक होंगे, जब आर्थिक विकास का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI


यह भरोसा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितता और आर्थिक सुस्ती निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां वैश्विक स्तर पर चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं विदेशी निवेश में गिरावट से जूझ रही हैं, वहीं भारत एक सुरक्षित और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से इक्विटी निवेश का हाथ है, जो अगस्त के दौरान लगभग दोगुना होकर 7.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वित्तीय सेवाएं, डिजिटल बुनियादी संरचना और कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर व विनिर्माण जैसे क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।


अमेरिका, सिंगापुर और मॉरिशस जैसे देशों से आ रही भारी पूंजी यह साबित करती है कि भारत की आर्थिक नीतियां, पीएलआई योजनाएं और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में किए गए सुधार अब जमीन पर रंग दिखाने लगे हैं। हालांकि, इनमें से कुछ राशि विदेशी निवेशकों की वापसी और भारतीय कंपनियों के विदेश में निवेश के रूप में बाहर भी जाती है। यही वजह है कि सकल निवेश और शुद्ध निवेश के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।


अप्रैल से अगस्त के बीच सकल एफडीआई प्रवाह लगभग 54.9 अरब डॉलर रहा, जबकि शुद्ध प्रवाह 13.8 अरब डॉलर था। इसके बावजूद, एफडीआई का 100 अरब डॉलर के पार पहुंचना देश के लिए यकीनन ऐतिहासिक होगा, लेकिन निवेश का यह आंकड़ा सही मायनों में तभी सार्थक होगा, जब इसके साथ रोजगार के अवसर बढ़ें, औद्योगिक आधार मजबूत हो और आर्थिक विकास का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचे।


विदेशी पूंजी का स्वागत निस्संदेह जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है ऐसा कारोबारी वातावरण तैयार करना, जिसमें निवेशक लंबे समय तक टिके रहें। भारत के लिए निवेश का अगला लक्ष्य केवल अधिक डॉलर जुटाना नहीं, बल्कि हर डॉलर से अधिक उत्पादन, अधिक रोजगार और अधिक सामर्थ्य पैदा करना भी होना चाहिए।

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