पुर्तगाल की स्थिति भयानक है, लेकिन उतनी भयानक नहीं, जितनी कुछ वर्ष पहले थी। यही बात पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बारे में कही जा सकती है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि अर्थव्यवस्था की कमजोरी लगातार जारी है और जिसे हम तात्कालिक आर्थिक संकट मानते थे, अब उसका कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसकी चिंता सबको करनी चाहिए, यूरोप को भी और उससे बाहर के देशों को भी।
बहरहाल, पहले कुछ सकारात्मक बातें। यूरो क्षेत्र (उन्नीस देशों का वह समूह, जिन्होंने साझा मुद्रा के रूप में यूरो को अपनाया है) ने पहली तिमाही में बहुत अच्छी विकास दर दर्ज की है। वास्तव में यह अमेरिका की विकास दर की तुलना में बेहतर है। आखिरकार, यूरोपीय अर्थव्यस्था वित्तीय संकट से पहले की तुलना थोड़ी बेहतर हुई है और बेरोजगारी की दर वर्ष 2013 की 12 फीसदी से थोड़ी घटकर 10 फीसदी पर आ गई है। जहां तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बात है, तो इसकी सुस्त गति को लेकर हम उचित ही शिकायत करते हैं, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार संकट से पहले की तुलना में 10 फीसदी बड़ा हो गया है, जबकि बेरोजगारी की दर फिर से पांच फीसदी से नीचे आ गई है। लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था के खराब प्रदर्शन की पुरानी बीमारी का कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा। वित्तीय बाजार क्या कह रहे हैं, जरा उन पर भी नजर डाल लीजिए। जब सुरक्षित परिसंपत्तियों पर लंबे समय से ब्याज दर बहुत कम है, तो यह इस बात का संकेत है कि निवेशक को बेहतर रिकवरी (वसूली) की संभावना नहीं दिख रही। जर्मनी के पांच साल के बॉन्ड की मौजूदा वसूली माइनस 0.3 फीसदी है। वास्तव में वसूली आठ साल से नकारात्मक है।
इन अविश्वसनीय रूप से कम ब्याज दरों के बारे में हमें कैसे सोचना चाहिए? हाल ही में मिनीपोलिस फेड के पूर्व अध्यक्ष नारायण कोचेरलाकोटा ने कहा कि हमें कम ब्याज दर की तुलना इंसुलिन के इंजेक्शन से करनी चाहिए, जो मधुमेह के रोगियों को लेना पड़ता है। ऐसे इंजेक्शन सामान्य जीवन-शैली का हिस्सा नहीं हैं और इनके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, लेकिन पुरानी बीमारी के लक्षणों से निपटने के लिए ये जरूरी होते हैं। जहां तक यूरोपीय अर्थव्यवस्था का सवाल है, तो खर्च में लगातार कटौती उसकी पुरानी बीमारी है, जबकि हाल के कुछ महीनों में यूरोप की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर हुई है। लिहाजा सस्ते धन का इंसुलिन भले ही पूरी तरह से इलाज न करे, लेकिन अर्थव्यवस्था की कमजोरी से लड़ने में मदद कर सकता है। हालांकि कोई यह सवाल कर सकता है कि मौजूदा स्थिति में खर्च कम करना और खर्चों को हतोत्साहित करना ही क्या यूरोपीय अर्थव्यवस्था का एकमात्र इलाज है। मौद्रिक इंजेक्शन ने यूरोप के संकट को रोकने में भले मदद की हो, पर उसने इस संकट को खत्म करने की दिशा में कुछ नहीं किया। बेशक यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुखिया मारियो ड्रैगी के नेतृत्व के बगैर स्थिति बहुत खराब हो सकती थी। पर केंद्रीय बैंक ने भी यथास्थिति बनाए रखने के अलावा समाधान के तौर पर कुछ नहीं किया। यह इसी का सबूत है कि केंद्रीय बैंक के प्रयास के बावजूद यूरोप में मुद्रास्फीति दो फीसदी के आधिकारिक लक्ष्य से काफी नीचे है।
अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की कोशिशों के अभाव का ही नतीजा है कि लिस्बन सहित यूरोप के ज्यादातर इलाकों में बेरोजगारी की दर अब भी इतनी ऊंची है कि उससे व्यापक मानवीय, सामाजिक और राजनीतिक नुकसान हो रहा है। इससे अधिक आश्चर्यजनक क्या होगा कि जिस स्पेन को यूरोप की सफल अर्थव्यवस्था के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है, वहां बेरोजगारी की दर अब भी अविश्वसनीय ढंग से 45 फीसदी है।
मान लीजिए कि यूनान का संकट फिर बढ़ गया, या ब्रिटेन के लोगों ने यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए वोट किया या चीन की अर्थव्यवस्था में और गिरावट आ गई, तो क्या होगा? यूरोप के नीति निर्माता इन झटकों से निपटने के लिए क्या करेंगे? लगता है किसी के पास इस संबंध में कोई योजना नहीं है। जबकि यूरोप को अपनी पुरानी बीमारी से निपटने के लिए क्या करना चाहिए, यह समझना मुश्किल नहीं है। मसलन, जर्मनी में सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी करनी चाहिए। उस फ्रांस में भी ऐसा करना जरूरी है, जिसकी राजकोषीय स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है।
दरअसल यूरोप में ढांचागत क्षेत्र में काफी निवेश करने की जरूरत है। तब यह मुश्किल काम भी नहीं है, जब खुद निवेशक इसके लिए धन लगाने को तैयार हैं। यूरोप में ढांचागत क्षेत्र में भारी निवेश होगा, तो आसपास के इलाकों में भी उसका लाभ मिलेगा। पर बदलाव के प्रति राजनीतिक इच्छाशक्ति से काफी दूर जर्मनी के राजनेता लगातार उस केंद्रीय बैंक पर निशाना साध रहे हैं, जो संभवतः अकेला बड़ा यूरोपीय संस्थान है, जिसे स्थितियों के बारे में सटीक जानकारी है।
यूरोप में घूमते हुए अमेरिकियों को इस बात का संतोष हो सकता है कि उनकी अपनी अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप बेहतर स्थिति में है। हालांकि इस समय अमेरिका का एक प्रमुख राजनीतिक दल एक खतरनाक, आत्ममुग्ध और वाचाल व्यक्ति को राष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत करने के लिए तैयार है। कुछ समय के लिए अमेरिका की सबसे पुरानी रिपब्लिकन पार्टी पागल हो गई है, लेकिन यह भरोसा है कि वह वाचाल व्यक्ति वास्तव में ह्वाइट हाउस नहीं पहुंच रहा।
इस बीच अमेरिका की समूची आर्थिक और राजनीतिक स्थिति उम्मीद जगाती है, जिसकी यूरोप में बहुत कमी है। बहरहाल, मैं यूरोप को उसकी बदहाली से उबरते हुए देखना चाहूंगा। दुनिया को जीवंत लोकतंत्रों की जरूरत है! लेकिन इस समय कोई सकारात्मक संकेत देखना मुश्किल है।