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दूसरा पहलू: क्या गर्मी में गर्म चाय दिल को ठंडक देती है

विवेक शुक्ला Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 21 May 2026 06:27 AM IST

सार

चाय के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस’ घोषित किया।
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अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


भारत में हर क्षेत्र की अपनी खास चाय है। सबसे लोकप्रिय मसाला चाय है। काली चाय, दूध, चीनी, अदरक, इलायची, दालचीनी और लौंग जैसे मसालों से बनने वाली यह उत्तर भारत में घर-घर की चाय है। भारत की सबसे ज्यादा उत्पादित असम की चाय मजबूत व माल्टी स्वाद वाली होती है, जैसे आपने माल्टेड मिल्क (हॉर्लिक्स, बॉर्नविटा) का स्वाद चखा हो। दार्जिलिंग चाय को ‘चाय का शैंपेन’ कहा जाता है। हल्की, फूलों जैसी खुशबू वाली यह चाय बिना दूध के पी जाती है। नीलगिरि चाय दक्षिण भारत की ताजगी भरी और हल्की चाय है। चाय सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी है। घर में सुबह की चाय परिवार को एकजुट करती है। दफ्तर में चाय ब्रेक सबसे पॉपुलर है। चाय सस्ती भी है। गरीब-अमीर सभी इसे पी सकते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। भारत में चाय का आगमन 19वीं सदी में हुआ। 1820 के दशक में असम में चाय के पौधे मिले, जिन्हें स्थानीय सिंहफो जनजाति पहले से उगा रही थी। 1837 में असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित चाबुआ में पहला ब्रिटिश चाय बागान स्थापित हुआ, जिसे भारत का प्रथम चाय बागान माना जाता है। धीरे-धीरे असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि जैसे इलाकों में इसकी खेती फैल गई। आजादी के बाद चाय वाले सड़कों पर छा गए। चाय अब सिर्फ पेय नहीं, बल्कि दोस्ती, गपशप और आराम का प्रतीक बन गई। जैविक चाय और स्पेशलिटी टी की मांग बढ़ रही है, जबकि युवा ग्रीन व हर्बल टी की ओर रुख कर रहे हैं।


भारत में चाय की दीवानगी बेवजह नहीं है। यह हमारी एकता का प्रतीक है। चाहे अमीर हो या गरीब, शहर का हो या गांव का, सब एक कप चाय पर मिलते हैं। आइए, आज विश्व चाय दिवस पर एक कप चाय पी जाए और इस अनोखी विरासत को सलाम किया जाए।
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