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विश्व रेडियो दिवस: 100 साल से दिलों पर राज, सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का सशक्त माध्यम

सार

रेडियो की लोकप्रियता वैश्विक है। इंटरनेट के आने से पहले भौगोलिक दूरी को समाप्त करने वाला माध्यम रेडियो ही था। भारत जैसे देश में रेडियो की व्यापक सामाजिक पैठ है। सही अर्थों में रेडियो ने सूचना देने, शिक्षा देने एवं मनोरंजन प्रदान करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई। आज विश्व रेडियो दिवस है, तो आइए इस उपलक्ष्य पर रेडियो के इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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वर्तमान में सामुदायिक रेडियो भी काफी लोकप्रिय है। सामुदायिक रेडियो, रेडियो सेवा का एक प्रकार है, यह रेडियो प्रसारण का एक तीसरा मॉडल है। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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World Radio Day 2025: आज का दिन हम सब के लिए एक विशेष महत्व का दिन है प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में याद किया जाता है। यह तिथि यूनेस्को द्वारा 3 नवंबर 2011 को विश्व रेडियो दिवस के लिए निर्धारित की गई। यह निर्णय यूनेस्को की 36 वी कॉन्फ्रेंस के दौरान लिया गया। इसके लिए स्पेनिश रेडियो ने यूनेस्को से आग्रह किया था। विश्व रेडियो दिवस का पहला आयोजन 2012 को किया गया इसके लिए लंदन में एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें रेडियो प्रोफेशनल शिक्षाविद् और विषय से संबंधित रुचि रखने वाले व्यक्ति शामिल हुए तब से निरंतर यह तिथि विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाई जाती है।

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रेडियो की लोकप्रियता वैश्विक है इंटरनेट के आने के पहले भौगोलिक दूरी को समाप्त करने वाला माध्यम रेडियो ही है भारत जैसे देश में रेडियो की व्यापक  सामाजिक पैठ है। सही अर्थों में रेडियो ने सूचना देने, शिक्षा देने एवं मनोरंजन प्रदान करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई। भारत के समग्र विकास में रेडियो ने बढ़ा योगदान दिया है। इस अवसर पर इसके योगदान के विभिन्न बिंदुओं का स्मरण करना आज के दिन की आवश्यकता है।
 

रेडियो संचार के आविष्कार में प्रमुख वैज्ञानिक में निकोला टेस्ला (1893-1895), गुग्लिएल्मो मार्कोनी (1895-1901) रेगिनाल्ड फेसेंडेन (1906) के नाम प्रमुख है। 24 दिसम्बर 1906 की शाम कनाडाई वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने अपना वॉयलिन बजाया और अटलांटिक महासागर में तैर रहे तमाम जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर चुना, वह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी ।

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मार्कोनी ने सन् 1900 में इंग्लैंड से अमरीका बेतार संदेश भेजकर व्यक्तिगत रेडियो संदेश भेजने की शुरुआत कर दी थी, पर एक से अधिक व्यक्तियों को एक साथ संदेश भेजने या ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत 1906 में फेसेंडेन के साथ हुई। ली द फोरेस्ट और चार्ल्स हेरॉल्ड जैसे लोगों ने इसके बाद रेडियों प्रसारण के प्रयोग करने शुरू किए। इस समय तक रेडियो का प्रयोग सिर्फ नौसेना तक ही सीमित था।

1917 में प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद किसी भी गैर फौजी के लिये रेडियो का प्रयोग निषिद्ध कर दिया गया। भारत में रेडियो का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। इसका विकास कई चरणों चरणों में हुआ है, जिसमें सरकारी और निजी पहल शामिल है। भारत में रेडियो प्रसारण जून 1923 में ब्रिटिश राज के दौरान बॉम्बे प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब और अन्य रेडियो क्लबों के कार्यक्रमों के साथ हुआ था।

23 जुलाई 1927 को हुए एक समझौते के अनुसार, निजी भारतीय ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड BC को दो रेडियो स्टेशन संचालित करने के लिए अधिकृत किया गया था।  बॉम्बे स्टेशन जो 23 जुलाई 1927 को शुरू हुआ । 1 मार्च 1930 को कंपनी का परिसमापन हो गया । सरकार ने प्रसारण सुविधाओं को अपने हाथ में ले लिया और 1 अप्रैल 1930 को दो साल के लिए प्रायोगिक आधार पर भारतीय राज्य प्रसारण सेवा (ISBS) शुरू की और मई 1932 में इसे स्थायी रूप से शुरू कर दिया और 8 जून 1936 को यह ऑल इंडिया रेडियो बन गया। जब देश को स्वतंत्रता मिली, तब भारतीय क्षेत्र में दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, तिरुचिरापल्ली और लखनऊ में रेडियो स्टेशन थे ।

अर्थात देश में 06 रेडियो स्टेशन थे। भारत में रेडियो प्रसारण का एक समृद्ध इतिहास है जिसमें सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्टेशन शामिल है। देश भर में विभिन्न भाषाओं और शैलियों में रेडियो स्टेशन है इनमें प्रमुख रेडियो स्टेशन आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो) यह भारत का राष्ट्रीय प्रसारक है, जो 23 भाषाओं और 179 बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसके 591 स्टेशन देश के लगभग 90% क्षेत्र और 98% जनसंख्या तक पहुंचते हैं।

विविध भारती : आकाशवाणी की एक लोकप्रियता सेवा, जो मुख्यतः फिल्मी संगीत और मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए जानी जाती है। रेडियो सिटी (91.1Fm) यह भारत का पहला निजी Fm स्टेशन है, जो प्रमुख शहरों में हिंदी और अंग्रेजी संगीत के साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत  करता है। रेड Fm (93.5Fm) यह स्टेशन देशभर में "बजाते रहो" टैगलाइन के साथ प्रसारित होता है और युवाओं के बीच लोकप्रिय है। बिग Fm (92.7 pm) यह स्टेशन हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में संगीत और कार्यक्रम प्रस्तुत करता है, जो विमिल शहरों में उपलब्ध है।

भारत में रेडियों के कई प्रमुख कार्यक्रम लोकप्रिय है जो विभिन्न श्रोताओं को ध्यान में रखते हुए प्रसारित किए जाते हैं। इनमें समाचार, संगीत, ज्ञानवर्धक कार्यक्रम, साक्षात्कार, खेल और मनोरंजन से जुड़ी प्रस्तुतियां शामिल है ऑल इंडिया रेडियो के प्रमुख कार्यक्रम जो श्रोताओं में लोकप्रिय है। मन की बात, वार्ता, संगीत सरिता, भावतरंग, विविध भारती, हवा महल, न्यूज बुलेटिन - विभिन्न भाषाओं में प्रसारित होने वाला समाचार कार्यक्रम, भारत में रेडियों के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया धीरे-धीरे विकसित हो रही है, जिसमें सरकार और प्रसारण क्षेत्र की विभिन्न एजेंसियों मिलकर काम कर रही हैं। यह डिजिटल ट्रांजिशन पारंपरिक (Am) और (Fm) रेडियो से डिजिटल रेडियो स्टैंडर्ड्स जैसे DRM ( Digital Radio mondiale) की और बढ़ रहा है। रेडियो डिजिटलाइजेशन के प्रमुख पहलू जैसे - DRM (डिजिटल रेडियो स्टैंडर्ड को अपनाना। Fm बैंड का विस्तार और डिजिटल Fm रेडियो।


इंटरनेट रेडियो और पॉडकास्टिंग का विकास इंटरनेट रेडियो, वेब रेडिओ, और पॉडकास्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहे है। Spotify, Jio saavn, और Gaana जैसे प्लेटफार्म ने भी डिजिटल रेडियो को बढ़ावा दिया है। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत भी रेडियो प्रसारण के आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है। 2024 तक देश में Am बैंड से पूरी तरह डिजिटल प्रसारण की दिशा में कदम बढ़ाए गए। रेडियो क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं काफी अच्छी है। खासकर डिजिटल युग में जहाँ पॉडकास्टिंग और आनलाइन रेडियो तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अगर आपको बोलने, लेखन, संपादन, और संचार में रुचि है, तो यह एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। रेडियो में प्रमुख करियर विकल्प:- रेडिओ जॉकी (RJ), समाचार वाचक (News Reader), स्क्रिप्ट राइटर, प्रोड्यूसर, साउंड इंजीनियर, मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग, पॉडकास्टिंग, रेडियो रिपोर्टर आदि।

वर्तमान में सामुदायिक रेडियो भी काफी लोकप्रिय है। सामुदायिक रेडियो, रेडियो सेवा का एक प्रकार है, यह रेडियो प्रसारण का एक तीसरा मॉडल है। सामुदायिक रेडियो, समुदायों के लिए अपनी भाषा में और सांस्कृतिक रूप से उनके लिए उपयुक्त तरीकों से अपने मुद्दों और चिंताओं को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. सामुदायिक रेडियो विकास कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी को मजबूत करने में मदद करता है।

सामुदायिक रेडियो स्टेशन, आम तौर पर गैर-लाभकारी होते हैं। सामुदायिक रेडियो, समुदायों के स्वामित्व और प्रबंधन में होते हैं। यह तथ्य सर्वविदित है कि रेडियो ने सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन प्रदान करने की दिशा में बहुमूल्य योगदान दिया है। भारत में भी रेडियो ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विविध विषयों पर काफी रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान की है। विभिन्न नई तकनीकों और परिवर्तनों ने रेडियो को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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