हाई ब्लड प्रेशर से दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही हैं
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हाइपरटेंशन का खतरा दिल की बीमारियों की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देता है। हाई ब्लड प्रेशर से दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। लोगों ने अपने खान-पान में बदलाव करके इस खतरे को और बढाने का काम किया है। हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसलिए भी कहते हैं, क्योंकि इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते।
इसके कारण व्यक्ति को सिरदर्द, चक्कर आना, शिथिलता, सांस में परेशानी, नींद न आना, थोड़ी सी मेहनत करने में सांस फूलना, नाक से खून निकलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका शुरुआती दौर कई और तरह की बीमारियों को न्योता देता है, जैसे- शरीर के विभिन्न अंग दिल, किडनी और आंखों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
भारतीय जीवन पद्दति योग और सहयोग पर आधारित रही है, इसलिए उन तमाम बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखती है, जिसके आगे दुनिया अपने हथियार डाल देती है। रिसर्च भी यही बताते है, कि संतुलित आहार, योग आधारित जीवन शैली जीवन के कई खतरों को दूर कर देती है।
प्रसन्नचित मन और शांत दिमाग कई करह के तनाव दूर करता है। नियमित योग और आध्यात्म से जुडकर शरीर के हाइपरटेंशन के खतरे को दूर किया जा सकता है।
इन समस्याओं से दूर करने में भारतीय आयुर्वेदिक साइकोथेरपी जिसमें प्राणायाम, ध्यान, मुक्तासन,कूर्मासन, मकरासन जैसे कई आसन हाई ब्लडप्रेशर से जुडी समस्याओं को दूर करने में कारगार साबित हो रहा है। अपने खान-पान में फास्ट-फूड, तली-भुनी, ज्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन को कम करके, नियमित व्यायाम करके इसपर नियंत्रण पाया जा सकता है।
भारतीय आयुर्वेद पद्दति जीवन जीने की कला है
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डब्ल्यूएचओ का मानना है कि कोरोना संकट के इस दौर में स्वास्थ्य से सम्बन्धित रोग जिनमें हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां काफी अहम हैं, के लिए ज्यादा सर्तकता बरतने की आवश्यकता है। अध्ययन के अनुसार वुहान के ही 2 अस्पतालों के 191 मरीजों को शामिल किया गया था।
शोध में शामिल मरीजों में 30 प्रतिशत लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या थी, जबकि मरने वालों में 54 मरीजों में से 48 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहें थे।
ऐसे समय में जब दुनिया सदमें में है, लोगों को तनाव मुक्त रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है, जिससे उनके स्वास्थ्य संबधित बीमारियों से बचाव हो सके। जिन कारणों से जीवन में तनाव बढता है, उन्हें छोडने की कोशिश करें, क्योंकि जान है, तो जहांन है।
संतुलित आहार, व्यवहार, सुबह सवेरे टहलने की आदत, घूप का सेवन आदि के साथ-साथ अपने चिकित्सकों से परामर्श लेकर साथ ही अपनी प्राचीन स्वास्थ्य जीवन शैली को अपनाकर स्वस्थ्य जीवन को जिया जा सकता है।
भारतीय आयुर्वेद पद्दति केवल चिकित्सा विज्ञान नहीं, अपितु जीवन जीने की कला भी है। भारतीय जीवन पद्दति रोग को ठीक करने के साथ इस बात पर भी जोर देती है, कि कोई नया रोग मानव शरीर में उत्पन्न ही न हो, क्योंकि बदलती दुनिया का साइलेंट किलर मानव जीवन के लिए हानिकारक है।
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