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विश्व साहित्य का आकाश: द ब्राइडल केनॉपी और गुजरा जमाना

सार

  • ‘द ब्राइडल केनॉपी’ एक गरीब, सीधे-सादे रबाई युडेल की यात्रा की कहानी है। वह तोराह पर विश्वास करने वाला एक सामान्य हासिद है, एक मनुष्य जिसका बाहरी दुनिया से कुछ लेना-देना नहीं है। ब्रोड में रहने वाले रेब युडेल की तीन बेटियां हैं।
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प्रसिद्ध उपन्यास ‘द ब्राइडल केनॉपी’ (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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1937 में श्मुएल एग्नॉन का प्रसिद्ध उपन्यास ‘द ब्राइडल केनॉपी’ आया, इंग्लिश अनुवाद 1967 में। इसे आधुनिक हीब्रू का एक पहला क्लासिक उपन्यास माना जाता है। जैसे हमारे यहां शादी का मंडप या मड़वा होता है, यहूदी संस्कृति में केनॉपी यानि चार खंबों यानि बांस पर तना कपड़ा मतलब चंदोवा विवाह का प्रमुख हिस्सा होता है। इसी के नीचे वर-वधु एक-दूसरे का ताजिंदगी साथ निभाने का वादा करते हैं। अधिकांश धर्मों की भांति यहूदी धर्म में भी विवाह एक पवित्र रिश्ता है, जो ऊपर से तय हो कर आता है। यह दो परिवारों का मिलन होता है।

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78 साल की उम्र में 1966 में श्मुएल योसेफ एग्नॉन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्हें यह नेलीजाक्स के साथ साझा दिया गया। मात्र सवा तीन साल बाद 17 फरवरी 1970 को उनकी मृत्यु हो गई। 17 जुलाई 1888 को ऑस्ट्रिया-हंगरी (आज यह उक्रेन है) के बुक्जाक्ज, (पोलैंड के गैलीसिया) में वे पैदा हुए थे। वे हीब्रू भाषा के पहले और अब तक के एकमात्र नोबेल से सम्मानित साहित्यकार हैं।

पारिवारिक नामजाजेक्स के श्मुएल पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। आठ साल की उम्र से वे हीब्रू तथा यद्दिश दोनों भाषा में लिखने लगे।

इंग्लिश में ‘द ब्राइडल केनोपी’, ‘इन द हार्ट ऑफ द सीज’, ‘बिट्रोथेड’, ‘ए गेस्ट फॉर द नाइट’, ‘ट्वन्टीवन स्टोरीज’, ‘ए ड्वेलिंग प्लेस ऑफ माई पीपुल’, ‘ए सिंपल स्टोरी’, ‘शीरा’, ‘ए बुक दैट वाज लॉस्ट एंड अदर स्टोरीज’, ‘ओनली यस्टरडे’, ‘टू दिस डे’ के साथ कुछ कविताएं भी उपलब्ध हैं।
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‘द ब्राइडल केनॉपी’ एक गरीब, सीधे-सादे रबाई युडेल की यात्रा की कहानी है। वह तोराह पर विश्वास करने वाला एक सामान्य हासिद है, एक मनुष्य जिसका बाहरी दुनिया से कुछ लेना-देना नहीं है। ब्रोड में रहने वाले रेब युडेल की तीन बेटियां हैं। 20 साल की पेसेल, 19 साल की ब्लूम तथा 17 साल की जिनके लिए वर चाहिए। युडेल की पत्नी फ्रूमेट सदा की बीमार रहती है। उसे अपनी बेटियों की शादी तो करनी ही है, ताकि उसकी बेटियां ब्राइडल केनॉपी के नीचे आ सकें। और इसके लिए वर तथा दहेज चाहिए।

पत्नी के जोर देने पर वह अपनी बड़ी बेटी के लिए वर खोजने निकलता है। समुदाय के लोग यात्रा के लिए उसकी सहायता करते हैं, उसे घोड़ा गाड़ी और गाड़ीवान देते हैं। यात्रा के लिए गांव वाले उसके कपड़ों का इंतजाम करते हैं, उसकी सवारी के लिए दो घोड़े- आइवरी तथा पीकॉक- देते हैं, गाड़ीवान के रूप में नुला भी उसके संग-साथ पूरी यात्रा में रहता है।

नायक और गाड़ीवान नुला की जोड़ी के कारनामें पाठक का भरपूर मनोरंजन करते हैं। इसके बाद अच्छाई-बुराई, आस्था की हानि, विवाह दैविक आज्ञा है, तोराह और इजराइल लौटना, यहूदियों का प्रवासी होना, पवित्र भूमि तथा तोराह से दूर हटते जाना आदि-आदि कहानियों का एक लंबा सिलसिला शुरू होता है।

‘द ब्राइडल केनॉपी’ और इसकी कहानी

यह रोचक उपन्यास कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पेसेल के लिए वर और दहेज जुटाने के लिए वह कई गांवों में घूमता है। इन गांवों में कोई गैर यहूदी नहीं है। उनके इस उपन्यास ‘द ब्राइडल केनॉपी’ की तुलना मिग्युअल ड सर्वांटिस के उपन्यास ‘डॉन खिसोटे ड ला मान्चा’ से की जाती है और इसी आधार पर उन्हें हीब्रू का सर्वांटिस कहा जाता है। फर्क यह है कि खिसोटे सब कुछ खुद करता है जबकि युडेल की यात्रा में सारी कहानियां तकरीबन दूसरे लोग तैयार करते हैं।

ऊपर से देखने पर यह भले ही साधारण कहानी लगे, लेकिन ये जीवन से जुड़ी हुई कहानियां हैं। युडेल का गांव गुजरे जमाने का है। गाड़ीवान की उपस्थिति भी इस उपन्यास की सर्वांटिस के उपन्यास से तुलना का कारण बनता है। गाड़ीवान और नायक यहूदी गांवों में घूमते हैं, वे दहेज के लिए मामूली रकम जमा भी कर पाते हैं। कुछ समय बाद युडेल नुला को वापस भेज देता है और खुद इस आशा में रुक जाता है कि ईश्वर दामाद भेजेगा।

यहीं से कहानी में एक ट्विस्ट आता है, पोयटिक जस्टिस होती है। युडेल गरीब है, मगर वह एक धनी व्यक्ति समझ लिया जाता है और जब वह हताश होने लगता है, तब एक बहुत धनी परिवार से उसकी बेटी के लिए रिश्ता आता है। युडेल का परिवार जानता है, वे इस परिवार से रिश्ता जोड़ने लायक दहेज कभी नहीं दे पाएंगे। तभी एक चमत्कार घटित होता है। वर पक्ष के स्वागत-सत्कार के लिए मुर्गा बनाने की तैयारी चल रही है, मगर मुर्गा रेब रेवेइल भाग निकलता है और पास में जा छिपता है। मां-बेटियां मुर्गे की खोज में निकलती हैं और लो! क्या मिलता है उन्हें?

उन्हें मिलता है एक गड़ा हुआ खजाना। इतना बड़ा खजाना जो केवल बड़ी बेटी नहीं बल्कि तीनों लड़कियों के दहेज के लिए पर्याप्त होगा। प्रभु की इस अनुकंपा से युडेल और उसकी पत्नी अहोभाव से भर जाते हैं और कृतज्ञया स्वरूप इजराइल जाते हैं।

‘ब्राइडल केनॉपी’ में एक कहानी है जिसमें एक आदमी की केवल एक आंख है। कहानी इस बात को रेखांकित करती है, दो आंख वाला काना से बेहतर नहीं देखता है। तर्क है कि दोनों आंखें भिन्न काम करती हैं, अलग-अलग देखती है। एक आंख रोजमर्रा की दुनिया देखती है, जिसमें आदमियों की दुनिया है, सारी मुसीबतें, दु:ख-दर्द, झंझटें, लालच, कमीनापन हैं। दूसरी आंख खुदा की है जो अच्छाई, आशा, अनंतता की दुनिया देखती है।

दोनों आंखें अक्सर संघर्ष में रहती हैं। दोनों आंखें दुनिया को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। द्वैत है, दो भिन्न दुनिया हैं। एक इस धरती का है, दूसरा एक भिन्न दुनिया है। आदमियों और ईश्वर की दुनिया। बुराई और अच्छाई की दुनिया। एग्नॉन की कहानियां नैतिकता को रेखांकित करती हैं।

उपन्यास ‘द ब्राइडल केनॉपी’ एक गुलदस्ते की तरह है, जिसमें हदीस की कहानियां सजी हुई हैं। इस गाथात्मक उपन्यास की कथाभूमि उन्नीसवीं सदी का गेलिसिया है। एक ओर यह क्लासिक लोक कहानियों का आनंद देता है, तो दूसरी ओर इसमें कलात्मकता है, जो इसे आधुनिक स्वाद प्रदान करती है। एग्नॉन के यहां गरीबी है, कठिनाइयां हैं, चिंता-परेशानियां हैं, मगर कटुता नहीं है, बल्कि पुरानी जीवन शैली के प्रति एक आदर भाव है।

ज्ञान, सूझ-बूझ और हास्य के ताने-बाने से रची इन कहानियों को पढ़ते हुए लगता है, हम ओल्ड टेस्टामेंट की दुनिया में विचरण कर रहे हैं। वे इस जीवन शैली का मखौल नहीं उड़ाते हैं। लेकिन मासूमियत का विमर्श रचते हैं। यहां यथार्थवाद में रहस्यात्मकता का पुट है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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