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World Hepatitis Day 2019: क्यों होता है हेपेटाइटिस और कैसे है फैलता? 

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hepatitis - फोटो : hepatitis
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विश्व भर में हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है जिसका  मुख्य उद्देश्य हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को जागरूक बनाना तथा इसक रोकथाम, निदान और उपचार को प्रोत्साहित करना है। हेपेटाइटिस की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वास्थ्य केंद्रित जिन चार महत्वपूर्ण दिवसों के आयोजन को समर्थन दिया जाता है, उनमें हेपेटाइटिस दिवस भी शामिल है। 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस से 2015 में दुनियाभर में 1.34 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई और यह आंकड़ा तपेदिक एवं एचआईवी से होने वाली कुल मौतों  से भी अधिक है। एक अन्य अनुमान के मुताबिक, भारत में, हेपेटाइटिस बी से पीडतों की संख्या  4 करोड़ और हेपेटाइटिस सी पीड़ितों का आंकड़ा  0.6-1.2 करोड़ तक है। 

हेपेटाइटिस सी वैक्सीन - फोटो : फाइल फोटो
हेपेटाइटिस वायरस जनित संक्रमण की वजह से लीवर में होनी वाली सूजन है। इसके लक्षण अन्य बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए डायग्नोस्टिक टेस्ट के बिना इसकी पहचान करना असंभव है। यह संक्रमण पांच प्रकार के हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है - ए, बी, सी, डी और ई (एचएवी, एचबीवी, एचसीवी, एचवीवी और एचईवी)।  इसके फैलने के कारण भी अलग-अलग हैं।

जैसे की हेपेटाइटिस ए दूषित भोजन और जल से फैलता है। हेपेटाइटिस बी- संक्रामक रक्त या किसी दूसरे द्रव्य पदार्थों के संर्क में आने पर फैल सकता है। हेपेटाइटिस सी- एचसीवी (हेपेटाइटिस -सी वायरस) के कारण होता है और संक्रमित ख़ून या इंजेक्शन के इस्तेमाल से होता है। हेपेटाइटिस डी- डी वायरस के कारण होता है। हेपेटाइटिस डी सिर्फ उनको होता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त होते हैं । हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस डी दोनों के साथ होने पर स्थिति काफी जटिल हो जाती है। हेपेटाइटिस ई फैलने का मुख्य कारण  प्रदूषित जल और भोजन होता है।

भारत में हेपेटाइटिस की गंभीरता को समझते हुए, पिछले साल विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया।  इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को समाप्त करना है। सरकार ने इस योजना में हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों को सम्मिलित किया  है जैसे की हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी एंड ई।

हेपेटाइटिस डे - फोटो : SELF
एक तरफ सरकार का ध्यान इस बीमारी के उपचार को सबके लिए उपलब्ध कराने पर है वही साथ ही साथ वह उन कारकों पर भी काम कर रही है जिनकी वजह से यह बीमारी होती है।  राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत् सरकार हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित लोगों के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं प्रदान कर रही है वही ज्यादा से ज्यादा लोगो तक इलाज पहुंच सके इसके लिए निजी अस्पतालों में भी मरीजों को मुफ्त  जांच की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रही है जो की निस्संदेह एक अच्छा कदम है और कम समय में ही इसका अच्छा परिणाम दिख सकता है। 

उधर, सरकार का प्रयास यह भी है कि आम जनता इस बारे में जागरूक बने ताकि इसकी रोकथाम हो सके।  सरकार का प्रयास बच्चों का टीकाकरण बढ़ाने पर भी है। इसके साथ ही, सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खुले में शौच को खत्म कर स्वच्छता में सुधार लाने का प्रयास भी कर रही है और स्वच्छता के बारे में जागरूकता भी पैदा कर रही है। 

लेकिन भारत जैसे देश में चुनौतियां भी कम नहीं है। स्वच्छता, पौष्टिक आहार और स्वच्छ पेयजल सभी के लिए उपलब्ध कराना अब भी एक चुनौती है।
 
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हेपटाइटिस
इसमें कोई संदेह नहीं है की सरकार  स्वछ्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रही है लेकिन सभी को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना अब भी एक समस्या है। पिछले ही साल अगस्त में आयी CAG रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब भी 163 मिलियन से अधिक लोगों की सुरक्षित पीने के पानी तक पहुंच नहीं है और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, 2017 तक योजना के पांच वर्षों में ( 2012-2017) 89,956 करोड़ रुपये के बजट का 90% खर्च करने के बावजूद, अपने लक्ष्य को पाने में विफल रहा है। हालाँकि सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता दर्शायी है और इस साल के बजट में जल जीवन मिशन की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य  2024 तक हर ग्रामीण परिवार को पीने योग्य पानी मुहैया कराना है। इसे सुचारु रूप से लागू करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय भी बनाया है। 

खाने की गुणवत्ता को लेकर  भी सजगता बढ़ी  है और FSSAI का नाम आये दिन ख़बरों में रहता ही है। लेकिन इसमें रत्ती भर संदेह नहीं है कि सरकारें कदम तो उठा सकती है, योजनाए भी ला सकती है मगर उनकी सफलता की जिम्मेदारी जन भागीदारी पर टिकी होती है। हेपॅटाइटिस को लेकर सामुदायिक जागररूकता बेहद जरूरी  है और इसके लिए लोगों के व्यवहार परिवर्तन में संचार की भूमिका अहम है। जन्म के समय शिशुओं को हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण कराएं और साफ-सफाई का ध्यान रख कर इन बीमारियों से बचा जा सकता है ।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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