लॉकडाउन के चलते नदियां भी साफ हुईं।
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कोरोना संकट और लॉकडाउन
कोरोना संकट को लेकर दुनिया के अधिकांश देशों में लाकडाउन के कारण सब कुछ बंद रखना पड़ा था। दुनिया भर में लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए थे। भारत में भी लंबे समय तक लाकडाउन चला था। कोरोना की दूसरी लहर के चलते अभी भी देश में अधिकांश स्थानो पर लॉकडाउन चल रहा है।
लॉकडाउन के कारण देश में बहुत से कल कारखाने, औद्योगिक संस्थान, व्यवसायिक गतिविधियां बंद हो गईं। लाकडाउन के कारण सभी तरह की गतिविधियां बंद होने से लोगों ने बरसों बाद देश के बड़े शहरों में उन्मुक्त भाव से पशु पक्षियों को विचरण करते देखा है।
नेशनल हेल्थ पोर्टल आफ इंडिया के मुताबिक देश में हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हो जाती है। वायु प्रदूषण के चलते लोगों को शुद्ध हवा नहीं मिल पाती है, जिसका हमारे शरीर में फेफड़े, दिल और ब्रेन पर बुरा असर पड़ रहा है।
देश में 34 प्रतिशत लोग प्रदूषण की वजह से मरते हैं। मगर लाकडाउन के चलते प्रदूषण कम होने की वजह से देश में होने वाली मौतें भी कम हुई है। वहीं लोगों के बीमार होने की दर में आश्चर्यजनक ढ़ंग से कमी देखने को मिल रही है। देश में लाकडाउन से बदलाव की बढ़ी संभावनाएं अब साफ नजर आ रही है। लोग अपनी सेहत को लेकर अब पहले से अधिक सचेत हो गए हैं।
इस बार की थीम पारिस्थितिकी तंत्र बहाली निर्धारित की गई है।
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विश्व पर्यावरण दिवस के लिए थीम
हर वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है। इस बार की थीम पारिस्थितिकी तंत्र बहाली निर्धारित की गई है। इस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रम इसी थीम पर आधारित होंगे। पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर पेड़-पौधे लगाना, बाग-बगीचों को तैयार कर उनको संरक्षित करना, नदियों की सफाई करना जैसे कई तरीकों से काम किया जा सकता है। हमें अपने मन में संकल्प लेना होगा कि हमें प्रकृति से सदभाव के साथ जुड़ कर रहना है।
इस पर्यावरण दिवस पर हम सब इस बारे में सोचें कि हम अपनी धरती को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए और क्या कर सकते हैं। किस तरह इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। पर्यावरण दिवस पर अब सिर्फ पौधारोपण करने से कुछ नहीं होगा। जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि हम उस पौधे के पेड़ बनने तक उसकी देखभाल करेंगें।
देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण बड़ी मात्रा में कृषि भूमि आबादी की भेंट चढ़ती गई। जिस कारण वहां के पेड़ पौधे काट दिये गये व नदी नालों को बंद कर बड़े-बड़े भवन बना दिए गए। जिससे वहां रहने वाले पशु, पक्षी अन्यत्र चले गए। लेकिन लाकडाउन ने लोगों को उनके पुराने दिनों की याद दिला दी है।
हमारी परंपरा और पर्यावरण
पुराने समय में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ों को देवताओं के समान दर्जा दिया जाता था, ताकि उन्हें कटने से बचाया जा सके। बड़-पीपल जैसे घने छायादार पेड़ो को काटने से रोकने के लिए उनकी देवताओं के रूप में पूजा की जाती रही है। इसी कारण गांवों में आज भी लोग बड़ व पीपल का पेड़ नहीं काटते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के दूसरे तरीकों सहित सभी देशों के लोगों को एक साथ लाकर जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और जंगलों के प्रबन्ध को सुधारना है। वास्तविक रूप में पृथ्वी को बचाने के लिये आयोजित इस उत्सव में सभी आयु वर्ग के लोगों को सक्रियता से शामिल करना होगा।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण व लगातार काटे जा रहे पेड़ों के कारण बिगड़ते पर्यावरण संतुलन पर रोक लगानी होगी। इस दिन हमें आमजन को भागीदार बना कर उन्हे इस बात का अहसास करवाना होगा कि बिगड़ते पर्यावरण असंतुलन का खामियाजा हमे व हमारी आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा, इसलिए हमें अभी से पर्यावरण को लेकर सतर्क व सजग होने की जरूरत है। हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से काम करना होगा तभी हम बिगड़ते पर्यावरण असंतुलन को संतुलित कर पाएंगे, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियां शुद्ध हवा में सांस ले पाएगी।
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