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विश्व पर्यावरण दिवस 2020: उस मासूम और निर्दोष हथिनी को याद कीजिए, कैसे होगा जैव विविधता का संरक्षण

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उस मासूम हथिनी को याद करें. क्या पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हैं हम? - फोटो : Social Media
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जीवन में प्रतिदान का बहुत महत्व है। स्वयं के प्रति दूसरों के द्वारा किए गए अच्छे कार्य का यदि हम उनको प्रतिदान न करें तो असंतुष्टि  की स्थिति पैदा हो जाती है। ये नियम प्रकृति पर भी लागू होता है। इस प्रकृति का हर कोना हाथ भर-भर के मनुष्य जाति के लिए निःस्वार्थ अपनी संपदा लुटाता है और बदले में हम तमाम प्रदूषण प्रकृति की झोली में डाल देते हैं, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण आदि।

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प्रकृति की अपार सम्पदा का प्रतिदान मनुष्य दे सकता था। स्वच्छता की छोटी -छोटी आदतों से, घरों और कारखानों के अवशिष्ट पदार्थों के लिए  सुनियोजित तरीके से निकास व्यवस्था करके, समुद्र और नदियों के जल को स्वच्छ रख पाने के सम्पूर्ण प्रयत्न करके, किंतु मनुष्य ने स्वार्थपरक नीतियों और लापरवाह स्वभाव के कारण प्रकृति का संतुलन ही नष्ट कर डाला। विश्व पर्यावरण दिवस वर्ष 2020 के अवसर पर पर्यावरण से जुड़े कुछ तथ्यों पर मैं आपसे बात करना चाहती हूँ।

विश्व पर्यावरण दिवस 2020
विश्व पर्यावरण दिवस 2020, जिसे कोलंबिया ने आयोजित किया है, पर्यावरणीय कार्रवाई के लिए सबसे प्रसिद्ध दिन है। वर्ष 1974 से सरकारों, व्यवसायों, मशहूर हस्तियों और नागरिकों के प्रयासों के द्वारा  पर्यावरणीय मुद्दे पर लोगों को जागृत करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस वर्ष 2020 का विषय जैव विविधता है। जैव विविधता का सरंक्षण आज के जगत में प्रमुख चिंता का विषय है क्योंकि मनुष्य ने अपनी सुविधाओं के लिए जल और थल दोनों में भयंकर असंतुलन की स्थिति पैदा कर दी है।

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जैव विविधता का सरंक्षण तत्कालीन समस्या और जगत के  भविष्य के लिए चिंताजनक विषय बन चुका है।

ब्राजील, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जंगलों में आग लगने की हाल की घटनाएं, पूर्वी अफ्रीका और भारत में टिड्डों का संक्रमण और अब एक वैश्विक बीमारी महामारी (कोरोना) आदि मनुष्यों और जीवन की जातियों की परस्पर निर्भरता को प्रदर्शित करतीं हैं।

पर्यावरण का अर्थ केवल प्रकृति नहीं बल्कि जैव विविधता भी है। - फोटो : Pixabay

जैव विविधता
जैव विविधता जीवन और विविधता के संयोग से निर्मित शब्द है जो आमतौर पर पृथ्वी पर मौजूद जीवन की विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (युएनईपी), के अनुसार जैवविविधता विशिष्टतया अनुवांशिक, प्रजाति, तथा पारिस्थितिकी तंत्र के विविधता का स्तर मापता है।

जैव विविधता किसी जैविक तंत्र के स्वास्थ्य का द्योतक है। पृथ्वी पर आज लाखों विशिष्ट जैविक प्रजातियों के रूप में जीवन उपस्थित है।

जैव विविधता और मनुष्यों से इसका संबंध
जैव विविधता के अंतर्गत भूमि और पानी पर रहने वाले सभी जीवों के पक्ष में बात की जाती है। यह मानव जीवन के स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करता है, जैसे स्वच्छ हवा और पानी, पौष्टिक खाद्य पदार्थ, दवा स्रोत हेतु वैज्ञानिक तथ्य, प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु परिवर्तन के समय संतुलन आदि।

जैव विविधता को वातावरण के समस्त जीवों के व्यवहार, रहन–सहन, प्राकृतिक आदतों का और उन पर पड़ने वाले जलवायु के प्रभावों का एक जटिल जाल सा माना जाता है, यदि इस पूरे जाल का एक भाग भी परिवर्तित किया जाये या हटा दिया जाये तो पूरी प्रक्रिया बिगड़ जाती है जिसके प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकते हैं।

प्राकृतिक सम्पदाएं
प्रकृति द्वारा प्रदत्त बहुत से संसाधन मनुष्य अपनी सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयोग में लाता है। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, नदियांं पानी देती हैं, भूमि उपजाऊ मिट्टी देती है जिस पर लगे खाद्य पदार्थों से हम अपनी तुष्टि पूर्ति करते हैं।

यही नहीं, हमको स्वस्थ रखने के लिए चिकित्सा शोधकर्ता प्रकृति के पदार्थों से दवाइयाँ निर्मित करते हैं। प्रकृति हमारे जीवन का आधार है, हमारे उद्योगों और आजीविकाओं का स्रोत है।

मानव जाति की मांंग
वनों की कटाई, वन्यजीवों के आवासों पर अतिक्रमण, वन्यजीवों का शिकार, कृषि के मापदंडों में फेरबदल, जैसे मानवीय कार्यों ने प्रकृति को उसकी सीमा से परे धकेल दिया है।

पिछले पचास वर्षों में मानव जाति की जनसंख्या दोगुनी हो चुकी है। जिस प्रकार विश्व की अर्थव्यवस्था चौगुनी हो चुकी है और विश्व का व्यापार दस गुना बढ़ चुका है, हमें मानव जाति की मांंगों को पूरा करने के लिए 1.6 पृथ्वी चाहिए होगी।

प्रतिकूल प्रभाव
यदि हम प्राकृतिक संसाधनों को इस प्रकार नष्ट करते रहें तो जैव विविधता के नुकसान का मानवता के लिए गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भोजन और स्वास्थ्य प्रणाली का पतन भी शामिल है।

COVID-19 इस बात का प्रमाण है कि जब हम जैव विविधता को नष्ट करते हैं, तो हम मानव जीवन का समर्थन करने वाली प्रणाली को नष्ट कर देते हैं।

आज ये माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर, विभिन्न वाइरसों के कारण होने वाली संक्रामक बीमारियों में से लगभग 75 प्रतिशत ज़ूनोटिक (पशुजन्य)हैं, जिसका अर्थ है कि वे जानवरों द्वारा लोगों को प्रेषित की जाती हैं।

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पृथ्वी पर दूसरे जीव जंतु भी हमारे जीवन के लिए जरूरी हैं। - फोटो : अमर उजाला

भविष्य योजनाएं
जैव विविधता पर कन्वेंशन में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा लिए गए निर्णयों के बाद, यूएनईपी और उसके साथी मानव और प्रकृति के बीच संबंधों को सुधारने के लिए एक वैश्विक पहल, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली (2021-2030) पर संयुक्त राष्ट्र दशक के रूप में  शुरू कर रहे हैं।

यूएनईपी ने विश्व नेताओं के साथ मिलकर एक नया और महत्वाकांक्षी पोस्ट 2020 ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क विकसित करने के लिए हार्मनी इन लिविंग विद नेचर के 2050 विजन को साकार किया।

प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध चलते हुए और प्रकृति की समस्त मान्यताओं को गिराते हुए मनुष्य जिस प्रकार अपनी उन्नति को लेकर आगे बढ़ता जा रहा है और प्रकृति की सम्पदाओं के स्खलन को निरन्तर अनदेखा करता जा रहा है, वो दिन दूर नहीं जब हम विनाश पथ का मार्ग जाने -अनजाने में ही पकड़ लेंगे। प्रकृति के प्रकोप के उदाहरण हमारे सामने हैं– बाढ़, कोरोना वाइरस, वन्य अग्नि और भूमिकंप आदि।

क्या हम प्रकृति के संंरक्षण का कार्य अपने घर से शुरू कर सकते हैं जैसे प्लास्टिक का त्याग, गीले और सूखे कूड़े का विलगन, वृक्षारोपण, पानी के दुरुपयोग को रोकना आदि, इसके अलावा सड़कों पर या नदी, समुद्र में कूड़ा न फेंकना आदि?

बहुत छोटे -छोटे क़दमों की पहल यदि होगी, प्रकृति की स्वच्छता का उत्तरदायित्व यदि प्रत्येक व्यक्ति लेगा तो निश्चित ही जैव विविधता का संंरक्षण संभव हो पाएगा।

इस लेख के अंतिम चरणों में केरल के एक हाथी की दुःखद मृत्यु की अमानवीय  घटना सामने आई ,एक हाथी को अन्नानास में भरकर बारूद खिला दिया गया। इस घटना पर क्या कहा जाए, मानव के पतन के रास्ते बहुत स्पष्ट होते जा रहे हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

 

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