श्रीलंका में सिंहली तथा तमिल भाषा में फ़िल्में बनती हैं।
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सत्तर के दशक का सिनेमा
निर्देशक, सिनेमेटोग्राफ़र तथा एडीटर डॉ. डी.बी. निहालसिंघ तथा धरमसेन प्रतिराजा, वसंत ओबेशेखर, प्राज्ञसोम हैट्टिआरची सत्तर के दशक के प्रमुख निर्देशक थे। ‘वेलकटारा’, ‘वेस गाटो’, ‘पलनगेटियो’, ‘बम्बारु अविथ’, ‘अहास गौवा’, ‘तुम मन हन्दिया’ आदि सत्तर के दशक की प्रसिद्ध फ़िल्में हैं। सुमित्रा पेरीज ने भी स्त्री विषयक ‘गेहनू लमाई’ तथा ‘गंगा एधारा’ फ़िल्में बनाई। हैट्टिआरची की फ़िल्म ‘मेकर्स, मिटीरियल एंड मोटिफ़्स’ को वेनिस अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह 1952 में गोल्ड मेडल मिला, 1972 में भी यही पुरस्कार फ़िल्म ‘सेंटनरी ऑफ़ सीलोन टी’ के लिए प्राप्त हुआ।
श्रीलंका में सिंहली तथा तमिल भाषा में फ़िल्में बनती हैं। जब भारत-श्रीलंका में तनाव चल रहा था, प्रसिद्ध सिंहली निर्देशक पाथीराज ने अच्छी तमिल फ़िल्म ‘पोन्मणी’ बनाई, उसे देखने तमिल दर्शक नहीं गए। यहाँ सरकारी नीतियों तथा सेंसर से भी फ़िल्म निर्माण में ऊँच-नीच होती रहती है। गृहयुद्ध पर बनी कोई भी फ़िल्म सेंसर से पास होना कठिन है।
फ़िल्म निर्देशक अशोक हैंडगामा ने इस विषय पर फ़िल्में बनाई और आलोचना झेली है। बॉलीवुड की ‘मद्रास कैफ़े’ को श्रीलंका में काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ी। वैसे ‘मद्रास कैफ़े’ चमक-दमक वाली, वास्तविकता से दूर एक मसाला मूवी है।
श्रीलंका के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक प्रसन्ना वीतनागे ने 1992 में अपनी पहली फ़िल्म ‘सिसिला गिनी गानी’ (आइस ऑफ़ फ़ायर) बनाई जिसे काफ़ी अच्छी समीक्षाएं मिलीं तथा बेस्ट डॉयरेक्टर, बेस्ट एक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस श्रीलंका का पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1996 में बनी ‘अनंत रात्रि’ (डार्क नाइट ऑफ़ द सोल) उनकी दूसरी फ़िल्म है।
प्सन्ना वीतनागे की डिजिटल मोड की फ़िल्म ‘विथ यू, विथाउट यू’ 2013 में फ़्रांस में रिलीज हुई। प्रसन्ना वीतनागे की तीसरी फ़िल्म ‘पावुरु वालालू’ (वॉल्स विदइन) की नायिका नीता फ़ेरनांडो को 1998 में सिंगापुर इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टीवल में सर्वोत्तम नायिका का सम्मान प्राप्त हुआ। कुल मिलाकर इसे दस पुरस्कार हासिल हुए। चौथी फ़िल्म ‘पुराहांडा कालुवारा’ (डेथ ऑन ए फ़ुल मून डे) के पुरस्कारों की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। इसे एमिन्स फ़िल्म फ़ेस्टीवल में ग्रैंडपी प्राप्त हुआ, कई अन्य सम्मान भी मिले।
उनकी इस फ़िल्म ‘पुराहांडा कलुवारा’ की कहानी श्रीलंका के गृहयुद्ध से प्रभावित सैनिकों के परिवार का अध्ययन करती है। उनकी ‘आकाश कुसुम’ कई अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में प्रदर्शित हुई और सराही गई। जयसुंदर की फ़िल्म ‘सुलग्न एनु पिनिसा’ को सर्वोत्तम फ़िल्म के लिए कैमरा डी’ओर का सम्मान मिला।
‘पाण्डुअभय’, ‘श्री सिद्धार्थ गौतम’, ‘सिरी पराकम’, ‘इरा मदियामा’ (अगस्त सन), ‘आकाश कुसुम’ ‘ओबा नाथुवा ओबा एक्का’ (विथ यू, विथआउट यू) आदि श्रीलंका की कुछ अन्य प्रसिद्ध फ़िल्में हैं। आज प्रसन्ना वीतनागे, अशोक हैंडगामा और जयसुंदर की गिनती श्रीलंका के प्रसिद्ध कला-फ़िल्म निर्देशकों में होती है।
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