फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: ग्रेटा गार्बो एक रहस्यमयी अभिनेत्री

Fri, 25 Nov 2022 05:08 PM IST
डॉ. विजय शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
ग्रेटा गार्बो - फोटो : Twitter
विज्ञापन

‘एक महान अभिनेत्री लेकिन उसकी कैसी नीरस दिखावटी फ़िल्में बना रहे हैं’ लेखक ग्राहम ग्रीन ने लिखा। जिंदगी में उसने मात्र 28 फ़िल्में की और सिने-जगत में न केवल स्थान बनाया वरन अमर हो गई। उसके दिवानों की कमी न थी, हालांकि वह पत्रकारों से बचती थी। बहुत कम लोग ऐसा निर्णय ले पाते हैं, जैसा निर्णय उसने लिया।

विज्ञापन


1941 में वह अपने कैरियर के उरूज पर थी। वह सबसे अधिक फीस ले रही थी और उसका जलवा ऐसा था कि वह निर्देशकों को अपने मनमाफ़िक नचा सकती थी। स्क्रिप्ट, सह-अभिनेताओं यहां तक कि निर्देशकों के चुनाव में दखल रखती थी। इसी ऊंचाई पर अचानक उसने फिल्मों से सन्यास का निर्णय लिया। इसके बाद वह आधी सदी और जीवित रही मगर न फिल्में बनाई, न अन्य कोई काम किया। वह समाजसेवी (जैसा कि अक्सर धनी-मानी लोग करते हैं) भी नहीं बनी।

ग्राहम ग्रीन के ऐसा लिखने की वजह थी। खूबसूरत चेहरे, बड़ी-बड़ी आंखों, गहरी पलकों की मालकिन ग्रेटा गार्बो नाजुक और निजी पलों को या प्रेम को परदे पर अभिव्यक्त करने में दक्ष थी।
विज्ञापन

 

वह एक पल में अपनी भौंहें सिकोड़ सकती थी, मनोरंजन कर सकती थी, उसकी कठोरता तत्काल पिघल सकती थी। कहने का मतलब है कि वह एक कुशल अभिनेत्री थी जो अपनी उपस्थिति से पूरे परदे को भर सकती थी। अपने बल पर फ़िल्म को सफ़ल बना सकती थी। और निर्देशक उसकी प्रतिभा का पूरा उपयोग नहीं कर उसे कुछ गिनी-चुनी भूमिकाओं में समेट रहे थे।


एमजीएम उसके व्यक्तित्व को लेकर स्पष्ट नहीं था और उन लोगों ने उसे खिलाड़ी, हास्यजनक अजीबोगरीब भूमिकाएं दीं। उन्होंने 1939 में कॉमेडी फ़िल्म ‘नेनाच्का’ के प्रचार में लिखा, ‘गार्बो लाफ़्स!’ उन्होंने उसके जैसा दिल खोल कर हंसने वाला इसके पहले नहीं देखा था।

1930 में उसकी सवाक फ़िल्म आई ‘आना क्रिस्टी’ और प्रचार में लिखा था ‘गार्बो टॉक्स!’ इसके आगे वे उसके विशेषण केलिए कुछ सोच नहीं पा रहे थे, जबकि उसका चेहरा ऐसा कैनवास था जिस पर कोई भी भावना पूरी तरह चित्रित हो सकती थी। ‘ए मैन’स मैन (1929), ‘हॉलीवुड पार्टी’ (1934), ‘टू फ़ेसेड वूमन’ (1941), ‘सिल्क स्टोकिंग्स (1957) उसकी कुछ कॉमेडी फ़िल्में हैं।

 


समकालीन अभिनेत्रियों से अलग

ये उसका चेहरा ही था जो उसे अन्य समकालीन अभिनेत्रियों से अलग करता था। उस समय कई खूबसूरत अभिनेत्रियां हॉलीवुड में थीं मगर किसी का चेहरा इतना भावप्रवण न था और न ही कोई आवश्यकता पड़ने पर ऐसा भावहीन चेहरा दिखा सकती थी, जैसा ग्रेटा गार्बो अपना चेहरा संभव कर पाती थी। उसने ‘क्वीन क्रिस्टीना’ के एक दृश्य में प्रस्तुत किया है।

यह जमाना क्लोजअप्स के आगमन का था और उसका पूरा परिणाम चाहे वह भावात्मक हो अथवा मांसल-कामुक ग्रेटा के असाधारण चेहरे के रूप में परदे पर था। उसका मूक अभिनय उसके सवाक अभिनय से बेहतर था, इसमें कोई शक नहीं।

अनाथ, प्रतिभाशाली यहूदी सिने-निर्देशक मौरिस स्टिलर अपने लिए अभिनेत्री खोज रहा था। उसने ग्रेटा गार्बो को देखा, उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे प्रथम स्त्री नोबेल पुरस्कृत लेखक सेलमा लेगरलॉफ के उपन्यास पर आधारित अपनी फ़िल्म ‘द स्टोरी ऑफ़ गोस्टा बर्लिंग’ (दि अटोनमेंट ऑफ़ गोस्टा बर्लिंग) में नायिका बनाया। यह मैत्री आजीवन कायम रही।

मौरिस ने उसे तराशा। वे प्रेमी नहीं थे क्योंकि मौरिस समलैंगी था और शायद ग्रेटा भी। मगर दोस्ती ऐसी थी कि जब हॉलीवुड ने मौरिस को फिल्म बनाने के लिए बुलाया तो उसने शर्त रखी कि आएंगे तो दोनों, नहीं तो वह नहीं आ रहा।

विज्ञापन

ग्रेटा गार्बो शर्मीली थी मगर बहुत पहले से अभिनेत्री बनने का सपना पाल रही थी। पंद्रह वर्ष की उम्र में वह एक डिपार्टमेंटल स्टोर के विज्ञापन केलिए कैमरे के सामने खड़ी हुई। 1925 में मौरिस स्टिलर और ग्रेटा गार्बो अमेरिका चले। वहां भाग्य ने अजीब खेल दिखाया।
 
अभिनेत्री के रूप में ग्रेटा चमक गई और मौरिस के सितारे डूब गए। मौरिस स्टिलर को लगा अब उसकी जरूरत नहीं है, वह स्वीडन वापस लौट आया और वहीं 1928 में पैंतालिस वर्ष की उम्र में ग्रेटा गार्बो का फोटो मुट्ठी में जकड़े  हुए मर गया। ग्रेटा की चमकती प्रसिद्धि उसे कभी खराब नहीं लगी। बस वह चाहता था कि ग्रेटा सदा खुश और संतुष्ट रहे। क्या ग्रेटा गार्बो खुश और असंतुष्ट रही? पता नहीं।

हां, मौरिस का सोग मनाने वह स्वीडन आई और मौरिस के वकील के साथ उसके स्टोरहाउस में एक-एक चीज छूती रही, उसकी स्मृति में काफी कुछ बुदबुदाती रही। ऐसा ही एक दृश्य उसे लेकर फ़िल्म ‘क्वीन क्रिस्टीना’ (1933) में है, जहां नायिका (ग्रेटा गार्बो) सराय में अपने मृत प्रेमी की प्रत्येक चीज छू कर घूमती  है। इस फ़िल्म में स्वीडन की रानी को अपने प्रेम और अपनी जिम्मेदारियों के बीच चुनाव करना है। वह स्पेन के दूत के प्रेम में पड़ती है जबकि उससे राजसी परिवार में शादी करने की अपेक्षा की जा रही है।


ग्रेटा गार्बो की भूमिका सराहनीय

विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘आना कैरेनीना’ पर कई निर्देशकों ने फिल्म बनाई, इस पर कई देशों तथा कई भाषाओं में सिनेमा की शुरुआत से फिल्में बनी हैं। हर अभिनेत्री इस भूमिका को पाने का स्वप्न देखती है। ग्रेटा गार्बो ने एक नहीं दो बार यह भूमिका की है।
पहली बार मूक सिनेमा के दौरान 1927 में इस उपन्यास को 1 घंटा 22 मिनट की अवधि में ‘लव’ नाम से निर्देशक एडमंड गौल्डिंग ने फ़िल्म में रूपांतरित किया। नायिका थी ग्रेटा गार्बो। दूसरी बार, दो बार के ऑस्कर विजेता निर्देशक क्लैरेन्स ब्राउन ने इस महान कृति  को परदे पर उतारा, उसने ग्रेटा गार्बो को लेकर 1935 में सवाक ‘आना कैरेनीना’ बनाई।

क्लैरेन्स ब्राउन ने ग्रेटा गार्बो को सात फ़िल्मों में निर्देशित किया जबकि अन्य निर्देशकों ने दो से अधिक फिल्में उसके साथ नहीं कीं। वह भी उसका पसंदीदा निर्देशक था, वह तो उसकी मनपसंद अभिनेत्री थी ही। दोनों की टीम उस समय बड़ी सफल जोड़ी थी। निर्देशक क्लैरेन्स ब्राउन ने ग्रेटा गार्बो को ‘फ़्लेश एंड द डेविल’ (1926), ‘ए वूमन ऑफ़ एफ़ेयर्स’ (1928), ‘आना क्रिस्टी’ (1930), ‘रोमांस’ (1930), ‘इंस्पिरेशन’ (1931), ‘आना कैरेनीना’ (1935) तथा ‘कॉन्क्वेस्ट’ (1937) में निर्देशित किया।

ग्रेटा गार्बो ने कभी शादी नहीं की, उसके बच्चे नहीं हुए, वह चाहती भी नहीं थी। वैसे कई लोगों से उसके रोमांटिक रिश्ते थे। अभिनेता जॉन गिल्बर्ट, कंडक्टर लिओपोल्ड स्टोकोवस्की, लेखिका मर्सीडीज डे एकॉस्टा, अभिनेत्री तथा स्क्रीनराइटर सल्का वियर्टेल उसके संगी थे। उसे क्रॉस ड्रेसिंग पसंद थी। उसने 1932 में फ़िल्म ‘ग्रैंड होटल’ में रूसी बैलेरीना की भूमिका की। और 1932 में ही वह ‘माता हारी’ भी थी।

माता हारी जर्मन  जासूस के सामने द्विविधा है, वह अपने देश के प्रति वफ़ादार रहे अथवा अपने प्रेमी के। ग्रेटा गार्बो को ऑस्कर पुरस्कार केलिए चार बार सर्वोत्तम अभिनेत्री के रूप में नामांकित किया गया। 1955 में उसे ऑनरेरी ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुआ।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें