ग्रेटा गार्बो शर्मीली थी मगर बहुत पहले से अभिनेत्री बनने का सपना पाल रही थी। पंद्रह वर्ष की उम्र में वह एक डिपार्टमेंटल स्टोर के विज्ञापन केलिए कैमरे के सामने खड़ी हुई। 1925 में मौरिस स्टिलर और ग्रेटा गार्बो अमेरिका चले। वहां भाग्य ने अजीब खेल दिखाया।
अभिनेत्री के रूप में ग्रेटा चमक गई और मौरिस के सितारे डूब गए। मौरिस स्टिलर को लगा अब उसकी जरूरत नहीं है, वह स्वीडन वापस लौट आया और वहीं 1928 में पैंतालिस वर्ष की उम्र में ग्रेटा गार्बो का फोटो मुट्ठी में जकड़े हुए मर गया। ग्रेटा की चमकती प्रसिद्धि उसे कभी खराब नहीं लगी। बस वह चाहता था कि ग्रेटा सदा खुश और संतुष्ट रहे। क्या ग्रेटा गार्बो खुश और असंतुष्ट रही? पता नहीं।
हां, मौरिस का सोग मनाने वह स्वीडन आई और मौरिस के वकील के साथ उसके स्टोरहाउस में एक-एक चीज छूती रही, उसकी स्मृति में काफी कुछ बुदबुदाती रही। ऐसा ही एक दृश्य उसे लेकर फ़िल्म ‘क्वीन क्रिस्टीना’ (1933) में है, जहां नायिका (ग्रेटा गार्बो) सराय में अपने मृत प्रेमी की प्रत्येक चीज छू कर घूमती है। इस फ़िल्म में स्वीडन की रानी को अपने प्रेम और अपनी जिम्मेदारियों के बीच चुनाव करना है। वह स्पेन के दूत के प्रेम में पड़ती है जबकि उससे राजसी परिवार में शादी करने की अपेक्षा की जा रही है।
ग्रेटा गार्बो की भूमिका सराहनीय
विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘आना कैरेनीना’ पर कई निर्देशकों ने फिल्म बनाई, इस पर कई देशों तथा कई भाषाओं में सिनेमा की शुरुआत से फिल्में बनी हैं। हर अभिनेत्री इस भूमिका को पाने का स्वप्न देखती है। ग्रेटा गार्बो ने एक नहीं दो बार यह भूमिका की है।
पहली बार मूक सिनेमा के दौरान 1927 में इस उपन्यास को 1 घंटा 22 मिनट की अवधि में ‘लव’ नाम से निर्देशक एडमंड गौल्डिंग ने फ़िल्म में रूपांतरित किया। नायिका थी ग्रेटा गार्बो। दूसरी बार, दो बार के ऑस्कर विजेता निर्देशक क्लैरेन्स ब्राउन ने इस महान कृति को परदे पर उतारा, उसने ग्रेटा गार्बो को लेकर 1935 में सवाक ‘आना कैरेनीना’ बनाई।
क्लैरेन्स ब्राउन ने ग्रेटा गार्बो को सात फ़िल्मों में निर्देशित किया जबकि अन्य निर्देशकों ने दो से अधिक फिल्में उसके साथ नहीं कीं। वह भी उसका पसंदीदा निर्देशक था, वह तो उसकी मनपसंद अभिनेत्री थी ही। दोनों की टीम उस समय बड़ी सफल जोड़ी थी। निर्देशक क्लैरेन्स ब्राउन ने ग्रेटा गार्बो को ‘फ़्लेश एंड द डेविल’ (1926), ‘ए वूमन ऑफ़ एफ़ेयर्स’ (1928), ‘आना क्रिस्टी’ (1930), ‘रोमांस’ (1930), ‘इंस्पिरेशन’ (1931), ‘आना कैरेनीना’ (1935) तथा ‘कॉन्क्वेस्ट’ (1937) में निर्देशित किया।
ग्रेटा गार्बो ने कभी शादी नहीं की, उसके बच्चे नहीं हुए, वह चाहती भी नहीं थी। वैसे कई लोगों से उसके रोमांटिक रिश्ते थे। अभिनेता जॉन गिल्बर्ट, कंडक्टर लिओपोल्ड स्टोकोवस्की, लेखिका मर्सीडीज डे एकॉस्टा, अभिनेत्री तथा स्क्रीनराइटर सल्का वियर्टेल उसके संगी थे। उसे क्रॉस ड्रेसिंग पसंद थी। उसने 1932 में फ़िल्म ‘ग्रैंड होटल’ में रूसी बैलेरीना की भूमिका की। और 1932 में ही वह ‘माता हारी’ भी थी।
माता हारी जर्मन जासूस के सामने द्विविधा है, वह अपने देश के प्रति वफ़ादार रहे अथवा अपने प्रेमी के। ग्रेटा गार्बो को ऑस्कर पुरस्कार केलिए चार बार सर्वोत्तम अभिनेत्री के रूप में नामांकित किया गया। 1955 में उसे ऑनरेरी ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुआ।
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