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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: शांग ईमो- राही प्यार के

सार

फ़िल्म निर्देशक शांग ईमो कमाल के हैं। उन्होंने टीवी फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री के साथ ‘रेज द रेड लैंटर्न’, ‘रेड सोगम’, ‘द ग्रेट वॉल’, ‘कमिंग होम’, ‘अंडर द हॉथर्न ट्री’, ‘हीरो’, ‘नॉट वन लेस’, ‘कीप कूल’ आदि फ़िल्मों का निर्देशन किया।
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चीन के फिल्म निर्देशक शांग ईमो - फोटो : Twitter
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विस्तार
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'प्रेम' साहित्य और फ़िल्मों का सर्वाधिक प्रिय विषय रहा है। अनगिनत भाषाओं में प्रेम पर अनगिनत फ़िल्में बनी हैं, आगे भी बनेंगी। प्रेम पर ‘द रोड होम’ जैसी फ़िल्म कदाचित बनती हैं। सरल-सीधी कहानी जिसे बहुत प्रेम के साथ सुनाया-दिखाया गया है और बहुत प्रेम के साथ बनाया गया है। जिसे बहुत प्रेम के साथ देखा और सराहा जा सकता है। रंगों की भरमार वाली यह प्रेम कथा अद्भुत है। कितनी तो नाजुक और प्यारी है यह प्रेमिका जो बहुत समय एकांतिक प्रेम करती है।

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निष्ठावान युवती जो ताजिंदगी अपना गांव नहीं छोड़ती है मगर शहर के प्रेमी के लिए सारी परम्पराओं को तोड़ती है। पहली दृष्टि में होने वाले प्रेम की इस परिकथा जैसी कहानी में पति के मरने के बाद यही लड़की जो अब बूढ़ी हो चुकी है, पति का शव गाड़ी पर न लाकर, परम्परागत तरीके से वापस अपने गांव लाकर दफ़नाना चाहती है, ठीक उसी जगह जहां से वह अपने प्रेमी को देखा करती थी। पहले उसने कुंआरी लड़की के रूप में स्कूल के लिए लाल बैनर तैयार किया था और अब बुढ़ापे में पति के लिए कफ़न बनाने करघा पर बैठी है।

शहर से उसका बेटा लोओ युशंग (होन्गलेई सन) अपने स्कूल टीचर पिता (शेंग हाऊ) की मृत्यु पर गांव आया है, वहां आकर वह मां की जिद देखता है और फ़िर पूरी कहानी यानी उसके माता-पिता की प्रेम कहानी रंगारंग फ़्लैशबैक में दिखाता-सुनाता है। अट्ठारह साल की गांव की एक लड़की शो डी (शएंग ज़ियी की पहली फ़िल्म) मौसम की परवाह न करते हुए अपने प्रेम को पोसती है और वह प्रेम फ़लित होता है।
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नायिका शो डी जैसी मासूमियत शायद ही किसी विश्व प्रसिद्ध नायिका में नजर आए। फ़िल्म का अंत आपकी आंखें नम कर देता है, साथ ही सिनेमेटोग्राफ़ी (यंग हाउ) आपको फ़िल्म के प्रेम में डाल देती है। एक ओर वर्तमान बर्फ़ीले मौसम के लिए सफ़ेद-भूरा है तो दूसरी ओर गर्माहट भरा रंगीन अतीत है। 

प्रकृति का इतना खूबसूरत फ़िल्मांकन बड़े परदे पर देखने में पूरा आनंद देगा। मगर मुझे छोटे परदे पर ही देख कर संतोष करना पड़ा। पूरे समय सैन बाओ का संगीत फ़िल्म के मूड को उभारता है। अगर चीनी शीर्षक का ज्यों-का-त्यों अनुवाद करें तो फ़िल्म का नाम होगा, ‘माई फ़ादर एंड मदर’। शी बाओ ने अपने उपन्यास ‘रिमेंबरेंस’ की पटकथा भी तैयार की। फ़िल्म ‘द रोड होम’ ने विभिन्न श्रेणी में 19 पुरस्कार अपनी झोली में किए। 


फ़िल्म निर्देशक शांग ईमो

इस फ़िल्म के निर्देशक शांग ईमो कमाल के हैं। उन्होंने टीवी फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री के साथ ‘रेज द रेड लैंटर्न’, ‘रेड सोगम’, ‘द ग्रेट वॉल’, ‘कमिंग होम’, ‘अंडर द हॉथर्न ट्री’, ‘कर्स ऑफ़ द गोल्डेन फ़्लॉवर’, ‘हीरो’, ‘नॉट वन लेस’, ‘कीप कूल’ आदि फ़िल्मों का निर्देशन किया। उन्होंने कुछ फ़िल्मों में अभिनय भी किया, प्रड्यूसर और सिनेमाटोफ़्रर भी रहे हैं। 

 

14 नवम्बर 1951 को चीन में जन्मे शांग ईमो चीन के ग्रामीण जीवन को उकेरने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बीजिंग की फ़िल्म अकादमी से प्रशिक्षण लिया है और चीन की पांचवीं पीढ़ी के निर्देशक माने जाते  हैं। पांचवी पीढ़ी के निर्देशकों ने चीन के कल्चरल रिवोल्यूशन के बाद फ़िल्में बनाई हैं। जब वे 16-26 साल के थे तब यह आंदोलन हुआ था। उस समय उन्होंने कई भयंकर और त्रासद घटनाएं देखी।


वे इस काल से जुड़ी फ़िल्में बनाना चाहते थे, लोगों ने जो सहा था, जिस दारुण अवस्था से लोग गुजरे थे, उसकी बात करना चाहते थे। भाग्य और मानवीय संबंध को परदे पर लाना चाहते थे। सामाजिक कार्यों से जुड़े शांग ईमो कई फ़िल्म समारोह की ज्यूरी में रहे हैं। 

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विश्व सिनेमा और निर्देशन - फोटो : istock
कला का उद्देश्य राजनीति नहीं होता है, उनका कहना है कि राजनीति में उनकी रूचि नहीं है। 

शांग ईमो की फिल्में

शांग ईमो दोनों तरह की फ़िल्में बनाते हैं-  एक अपनी रुचि की फ़िल्में और दूसरी कमर्शियल फ़िल्में। ‘हीरो’ तथा ‘हाउस ऑफ़ फ़्लाइंग डैगर्स’ उनकी कमर्शियल फ़िल्में हैं। वे बहुत सारी फ़िल्में बनाना चाहते हैं जिनमें दूसरों की कहानियां हैं और जो आत्मकथात्मक हैं। उनकी फ़िल्में कलात्मकता के लिए स्मरण की जाएंगी। मनुष्य की भावनाएं काल और स्थान के परे होती हैं, मानवीयता साझा होती है। अगर कोई फ़िल्म सार्वभौमिक मानवीय भावनाओं को स्पर्श करती है तो वह दर्शकों को अवश्य पसंद आती है। दर्शक ऐसी फ़िल्म का आनंद लेता है। ‘द रोड होम’ एक ऐसी ही फ़िल्म है।

मनमाफ़िक फ़िल्म बनाने के कारण उन्हें अपने देश में प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। उनकी दूसरी फ़िल्म ‘रेज द रेड लैंटर्न’ तथा तीसरी फ़िल्म ‘रेड सोगम’ बाहर खूब प्रशंसित हुई लेकिन विवाह संस्था की बुराई तथा स्त्री के शोषण की कहानियां होने के कारण इन्हें चीन में काफ़ी समय तक प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी।

शांग ईमो की फ़िल्में देश के बाहर चीन का प्रतिनिधित्व करती हैं, वे चीन के सांस्कृतिक दूत हैं। अभी तक उन्हें 2 बाफ़्टा फ़िल्म पुरस्कार मिले हैं इसके आलावा 161 अन्य फ़िल्म पुरस्कार उन्होंने जीते हैं। सिनेमेटोग्राफ़र के रूप में वे खूब सफ़ल रहे हैं। ‘येलो अर्थ’ फ़िल्म के कैमरामैन की चाक्षुष शैली की खूब प्रशंसा हुई है। जिस सिने-प्रेमी ने ‘क्राउचिंग टाइगर हिडन ड्रैगन’ देखी है, वह निर्देशक शांग ईमो की विश्व सिनेमा में लाई ताजी बयार को कभी नहीं भूल सकता है।

इस फ़िल्म के कई हिस्सों को दुनिया के कई निर्देशकों ने दोहराया है, मगर इसकी ऊंचाई को शायद ही कोई पा सका है। बांस के जंगल में उड़ते, तलवारबाजी करते, मार्शल आर्ट करते अभिनेता दर्शकों को भी अपने साथ उड़ा ले चलते हैं। चीन की इस फ़िल्म ने दुनिया के सिने-दृश्य को परिवर्तित कर दिया है। 


‘क्राउचिंग टाइगर हिडन ड्रैगन’

‘क्राउचिंग टाइगर हिडन ड्रैगन’ फ़िल्म में एक्शन की लयात्मकता, सौंदर्य, इसके स्पेशल इफ़ेक्ट ने लोगों को मोहित कर लिया। इसकी महानता स्वीकारनी होगी। विश्वास नहीं होता है, ‘द रोड होम’ की नाजुक  नायिका अभिनेत्री शांग ज़ियी ही ‘क्राउचिंग टाइगर हिडन ड्रैगन’ की कठोर नायिका है। यह निर्देशक का कमाल होता है कि वह अभिनेता से कैसा काम ले पाता है। इस मामले में निर्देशक शांग ईमो लाजवाब हैं।

इसी अभिनेत्री से उन्होंने ‘हीरो’ तथा ‘हाउस ऑफ़ फ़्लाइंग डैगर्स’ में भी प्रशंसनीय अभिनय करवाया है। एक कुशल निर्देशक अभिनेता की छिपी प्रतिभा को उभार सकता है। शांग ईमो एक कुशल निर्देशक हैं। अक्सर उनकी तुलना ईरानी सिने-निर्देशक किआरोस्तामी से की जाती है। निर्देशन के अलावा दोनों की रुचि कैमरे में भी है।

शांग ईमो की ‘द रोड होम’ ग्रामीणों की सहभागिता का अन्यतम उदाहरण है, जहाँ सारे लोग मिल कर स्कूल खड़ा करते हैं लेकिन उस कालानुसार इस सामूहिक कार्य में लड़कियों-स्त्रियों का हाथ बंटाना निषिद्ध है। मगर इनके बिना काम कैसे चले। उनका काम है, काम कर रहे सारे पुरुषों के लिए खाना बना कर लाना। नायिका की एक मासूम-सी इच्छा है, नायक उसका लाया खाना खा ले। ऐसी छोटी-छोटी कई मासूमियत मिला कर शांग ईमो ने यह रोमांटिक फ़िल्म बनाई है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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