विलियम वायलर को ऑस्कर
ऑस्कर की बात ऐसी है कि विलियम वायलर ने अपनी ‘मिसेज मिनिवर’, ‘द बेस्ट ईयर्स ऑफ़ अवर लाइव्स’ तथा ‘बेन-हर’ अर्थात तीन फ़िल्मों के लिए इसे जीता। साथ ही ‘द फ़ाइटिंग लेडी’ नामक डॉक्यूमेंट्री केलिए सर्वोत्तम डॉक्यूमेंट्री का ऑस्कार भी उसके नाम रहा। इसके अलावा उसकी निर्देशित दस अन्य फ़िल्मों को ऑस्कर का नामांकन भी प्राप्त है।
इसके अलावा ‘रोमन होलीडे’, ‘फ़नी गर्ल’ ‘वदरिंग हाइट्स’, ‘फ़्रेंडली परसुएशन’, ‘द बिग कंट्री’, ‘द चिल्ड्रेन’स आवर’, ‘हाऊ टू स्टील ए मिलियन’ आदि वायलर द्वारा निर्देशित कुछ अन्य फ़िल्में हैं। यूनिवर्सल स्टूडियोज की लोकेशन पर फ़िल्माई पहली सवाक फ़िल्म ‘हेल’स हीरोज’ (1929) का श्रेय उसे जाता है। वायलर ने अपने फ़िल्म निर्देशन की यात्रा में ऑड्री हेप्बर्न, कर्क डगलस, लॉरेंस ओलिवियर, गेरी कूपर, ग्रेगरी पेक, शेर्ली मैक्लैन तथा हेनरी फ़ोंडा को निर्देशित किया।
ल्यु वालस की कहानी ‘ए टेल ऑफ़ क्राइस्ट’ के नायक चार्टन हैस्टन (जुडाह बेन-हर) को सर्वोत्तम अभिनेता और सह अभिनेता हग ग्रिफ़िथ को ऑस्कर मिला। कॉर्ल टनबर्ग ने स्क्रीनप्ले तैयार किया जिसमें गोर विडाल का भी सहयोग रहा। 11 में सर्वोत्तम साउंड के लिए फ़्रैंकलिन मिल्टन तथा रंगीन पोशाकों के लिए एलिज़ाबेथ हाफ़ेन्डेन, आर्ट निर्देशन तथा सेट डेकोरेशन के लिए तीन लोगों को मिला ऑस्कर शामिल है।
गजब का फिल्मांकन
सेट की बात से आप सहमत होंगे जब ज्ञात होगा कि पानी के भीतर की भयंकर लड़ाई स्टूडियो में टैंक बना कर फ़िल्माई गई थी। उस समय उपलब्ध सुविधाओं का बेहतरीन उपयोग कर ‘बेन-हर’ एक संपूर्ण ऐतिहासिक-धार्मिक, कालजयी महागाथा है।
जीसेस क्राइस्ट को लेकर बहुत सारी फ़िल्में बनी हैं। कुछ मूक हैं, कुछ सवाक हैं। ल्यु वालस की कहानी ‘ए टेल ऑफ़ क्राइस्ट’ पर बनी पहली दो फ़िल्म मूक हैं। तीसरी तकरीबन सारे मानवीय संवेगों को स्पर्श करती ‘बेन-हर’ उनमें से हर दृष्टि से उच्च कोटि की है। यह तीसरी बार बनी फ़िल्म तीन बार सर्वोत्तम निर्देशक का ऑस्कर पाने वाले निर्देशक, प्रड्यूसर एवं अभिनेता विलियम वायलर का करीश्मा है।
देख कर मन में हूक उठती है हमारे पास मिथक और धार्मिक गाथाएं हैं मगर हम इस जैसी एक भी फ़िल्म अभी तक नहीं बना पाए हैं। कई दृश्य त्रुटिहीन हैं और आश्चर्यचकित करते हैं। सीधी-सादे, सरल ढ़ंग से कही कहानी भी इतनी शक्तिशाली और प्रभावशाली हो सकती है, बशर्ते आपको कहानी कहनी आती हो। हां, थोड़ा-सा मेलोड्रामा है-तो-है, कौन उसके बिना पर इस बेहतरीन फ़िल्म को देखने से चूकना चाहेगा।
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