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विश्व रक्तदाता दिवस: किसी अनजान की जान बचाकर देखिए न, अच्छा लगता है

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रक्तदान को महादान कहा जाता है
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रक्तदान करके देखिए, अच्छा लगता है...एक बार किसी अनजान की जान बचाकर देखिए, उसके बाद आपको जो खुशी मिलेगी, वह आप शब्दों में बयां नहीं कर पाएंगे। इसलिए रक्तदान को महादान कहा जाता है। वैसे तो देश में हमेशा ही रक्त की कमी रहती है लेकिन कोराना काल में यह संकट और गहरा गया है। यही कारण है कि कुछ दिन पहले देश के स्वास्थ्य मंत्री को आगे आना पड़ा और लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए अपील तक करनी पड़ी।

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देश में हर वर्ष करीब चार करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। लेकिन इसमें से केवल करीब एक करोड़ यूनिट ही ब्लड की पूर्ति हो पाती है। रक्त का कोई विकल्प नहीं है। यह देने से ही एक-दूसरे को मिलता है। देश में रक्त की जो कमी है, उसे स्वैच्छित रक्तदान से ही हम पूरी कर सकते हैं। इसलिए देश में रक्तदान की स्वैच्छिक परंपरा को बढ़ावा देने की जरूरत है। अगर ऐसा करने में हम सफल नहीं हुए तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

एक यूनिट रक्त से हम चार अनजान की जान बचा सकते हैं। इसलिए आइए, इस विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) को प्रण करें कि हम भी स्वैच्छिक रक्तदान करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। ताकि रक्त की कमी से किसी की जान नहीं जाए। इस बार कोरोना के कारण सभी को भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन जैसे मास्क पहनना, उचित दूरी और अन्य सावधानियों का पालन करते हुए रक्तदान करना है।
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14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस क्यों?
महान शरीर वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टेनर ने ही इंसानी रक्त में एग्लुटिनिन की मौजूदगी के आधार पर ए, बी और ओ की पहचान की थी। इसके बाद चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बहुत परिवर्तन आए। नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ड लैंडस्टेनर का जन्म 14 जून 1868 में हुआ था। उनके जन्म के दिन ही विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य रक्तदान को बढ़ावा देना है। पहली बार 2004 में विश्व रक्तदाता दिवस का आयोजन किया गया। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने इसकी शुरुआत की थी।

आप भी कर सकते हैं रक्तदान
रक्तदान महादान कहलाता है। रक्त देने के बाद आप हरदम किसी अनजान की जान बचाने की खुशी में प्रसन्न रहते हैं। इसलिए रक्तदान करने से घबराने की जरूरर नहीं है बस कुछ बातों का ध्यान रखना है। एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने बाद रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने वाले की उम्र अगर 18 से 65 साल के बीच होनी चाहिए और उसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक, तो वह रक्तदान कर सकता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि आपका हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से अधिक होना चाहिए।

रक्तदान से पहले हल्का नाश्ता करें। अगर आपको रक्तदान करना है तो एक दिन पहले से ही शराब और नशे का सेवन नहीं करें। कोशिश करें कि रक्तदान करने से पहले भरपूर नींद लें। रक्तदान करते ही अपने स्थान से नहीं उठें। थोड़ा आराम करें। वहां उपस्थित डॉक्टर जैसा निर्देश दें, उसका पालन करें। कोशिश करें कि रक्तदान के बाद जूस, फल और तरल पदार्थों का उपयोग उस दिन थोड़ा ज्यादा करें।

कहां करें रक्तदान?
कई बार शिक्षित लोग भी यह सवाल करते हैं कि हम आखिर रक्तदान कहां करें। अगर आप जागरूक हैं और स्वस्थ हैं, और रक्तदान करना चाहते हैं कि किसी भी सरकारी ब्लड बैंक में जाकर हर तीन महीने बाद रक्तदान कर सकते हैं। सरकारी ब्लड बैंक सबसे उपयुक्त स्थान है, जहां पर आप रक्तदान कर सकते हैं।

इसके अलावा आजकल कई सामाजिक संस्थाएं भी रक्तदान कर लोगों की मदद कर कर रही हैं। कोशिश करें कि उन संस्थाओं में जाकर रक्तदान करें, जो सरकारी ब्लड बैंक के साथ मिलकर रक्तदान कैंपों का आयोजन कर रही हैं।

दान का रक्त जाता कहां है?
कई बार यह सवाल मन में उठता होगा कि इतना सारा रक्त जाता कहां है? तो बताते चलें कि कई बार बड़ी दुर्घटना हो जाती हैं। बड़े सड़क हादसे हो जाते हैं। इस दौरान घायलों की सर्जरी करनी पड़ती है। इसी तरह से सर्जरी के समय भी रक्त की जरूरत होती है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के बाद रक्त की जरूरत होती है।

इसके अलावा ब्लड कैंसर, थैलिसिमिया और एड्स के मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा भी कई तरह अन्य बीमारियों और ओपन हार्ट सर्जरी के समय भी रक्त की बहुत जरूरत होती है। इसलिए जितना हम स्वैच्छिक रक्तदान की परंपरा को मजबूत करेंगे, उतने ही हम लोगों को बचा पाएंगे।
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जो लोग रक्तदान करते हैं, उनमें कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है
कैंसर के रिस्क को कम करता है
एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग रक्तदान करते हैं, उनमें कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है यानि रिस्क कम हो जाता है। रक्तदान करने से नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं। ये रक्त के प्रवाह को सामान्य बनाए रखती हैं, जिससे उच्च रक्तचाप (बीपी) की समस्या ना के बराबर होती है। रक्तदान करने से वजन नियंत्रण में रहता है लेकिन इसे वजन घटाने के उद्देश्य से किया जाना ठीक नहीं।

रक्तदान करने से रक्त का थक्का कम बनता है, इससे हार्ट आटैक की आशंका कम हो जाती है।  रक्तदान से नए सैल्स बनते हैं, जिससे शरीर में फूर्ति रहती है और उत्साह बढ़ता है। शरीर में ज्यादा आयरन हो जाए तो लिवर पर दवाब पड़ता है। इसलिए रक्तदान करने से लिवर से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है। रक्तदान करने से शरीर में किसी तरह की कमी नहीं आती है।

मुफ्त में हो जाती हैं ये जांचें
रक्तदान करने से जहां आपको शारीरिक और मानसिक सुख मिलता है, वहीं आपकी जेब की बचत हो जाती है। आप जब भी रक्तदान करते हैं, सबसे पहले उस रक्त की पूरी जांच होती है। इन जांचों में एड्स, हैपेटाइसिट-बी, हैपेटाइटिस-सी, सिफिलिस (एक प्रकार का गुप्त रोग) और मलेरिया की जांच की जाती है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रकार की जांचे होती हैं। ये सब मुफ्त में होती हैं। आप ब्लड बैंक से अपना रिपोर्ट ले सकते हैं। इस तरह से जो अगर आप हर छह महीने बाद भी रक्तदान करते हैं, तो आपकी पूरी जांच हो जाती है।

...तो नहीं करें रक्तदान
रक्तदान करना बहुत अच्छा है लेकिन बहुत नशा करने वालों, टीबी, मलेरिया, पीलिया और अगर किसी को मिर्गी की बीमारी है तो वे रक्तदान नहीं करें। इसी तरह से बीपी, अस्थमा, एलर्जी और मधुमेह हो तो रक्तदान करने से बचना चाहिए। माहवारी के समय, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओ को रक्तदान नहीं करना चाहिए। अगर कुछ दिन पहले ही आपका बड़ा ऑपरेशन हुआ हो या आप नियमित किसी तरह की दवाओं का सेवन कर रहे हों, तो भी आपको रक्तदान करने से बचना चाहिए। अगर किसी तरह की अन्य दिक्कत हो तो भी रक्तदान कैंप में उपस्थित चिकित्सकों को जरूर बताएं।

रक्तदान करके देखिए न
हर साल देश में रक्त की कमी के चलते 30 लाख से अधिक लोग मौत के गाल में समा जाते हैं। यह जानें बच सकती हैं, अगर हमारी आबादी के एक फीसदी लोग रक्तदान कर दें तो। सबसे हैरानी की बात है कि हमारे देश में आज भी स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर जागरूकता बहुत कम है। कोरोना के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। इस समय रक्त की जरूरत और बढ़ गई है। आईए, इस विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर हम सब देशवासी प्रण लें कि हम रक्त की कमी के चलते किसी की जान नहीं देंगे। रक्तदान करके देखिए न, अच्छा लगता है। एक बार किसी अनजान की जान बचाकर देखिए न, अच्छा लगता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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