क्या राजनीतिक पार्टियों के एजेंड में शामिल होगा प्रदूषण का मुद्दा।
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इस मैनिफेस्टो को 'सिटिज़न्स ग्रीन मैनिफेस्टो फॉर ए स्मार्ट एंड सस्टेनेबल दिल्ली' के शीर्षक से तैयार किया गया है। ऊर्जा का दावा है कि वायु प्रदूषण, परिवहन और गतिशीलता, शहरी डिजाइन, जल आपूर्ति और जल निकायों के कायाकल्प और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विषयों से संबंधित विशेषज्ञों की एक समिति के परामर्श से इस मैनिफेस्टो को तैयार किया गया है।
ऊर्जा के जनघोषणापत्र में वायु, जल और ठोस अपशिष्ट प्रदूषण का प्रबंधन करने के लिए 10 प्रमुख मांगें रखी हैं और चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक लोगों के लिए ने इन चुनावों के लिए दिल्ली में एक दृष्टिकोण और रोडमैप पेश किया है।
इस जनघोषणापत्र में जिन मांगों को हासिल करने के लिए समाधान, रोडमैप और समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं, उनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए 2025 तक वायु प्रदूषण के स्तर में 65 प्रतिशत की कमी लाना शामिल हैं।
इसके साथ ही वर्ष 2025 तक 25 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा व वर्ष 2050 तक सभी के लिए 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा का मार्ग सुनिश्चित करना शामिल है। यही नहीं सार्वजनिक परिवहन, जो दिल्ली की कम से कम 80 फीसदी आबादी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता हो, के लिए शहर की सड़कों पर हो रही अत्यधिक भीड़ को कम करने का रोडमैप भी दिया गया है इसके साथ ही कहा गया है कि वर्ष 2025 तक नए वाहनों के पंजीकरण में लगभग 50 प्रतिशत वाहन, इलैक्ट्रिक हों जिससे विद्युत गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।
कचरा प्रबंधन भी हर मैट्रोपोलिटन सिटी की तरह दिल्ली की भी बड़ी समस्या है। इस जनघोषणापत्र में मांग की गई है कि वर्ष 2025 तक के लिए रोडमैप तैयार हो, ताकि लैंडफिल साइट्स पर शून्य कचरा पहुंचे या इतना पहुंचे कि जिसे संभालना न पड़े।
जल प्रबंधन के लिए भी रोडमैप तैयार करने की मांग इस जनघोषणापत्र में की गई है। इसमें कहा गया है कि 2025 तक जीरो वेस्ट वाटर लॉस और 100 प्रतिशत भूजल रिचार्ज के प्रबंध किए जाएं। इसके साथ ही दिल्ली के जल निकायों और वेटलैंड्स को पुनर्जीवित करने और उनके कायाकल्प करने की योजना बनाई जाए।
ऊर्जा के अध्यक्ष अतुल गोयल का कहना है कि घोषणापत्र में अगले पांच वर्षों के लिए दस सार्वजनिक मांगें प्रस्तुत की गई हैं, जिससे दिल्ली सरकार, दिल्ली को 2025 तक संसाधन युक्त और दीर्घकालिक यानि लंबे समय तक चल सकने वाला बना सके। ऊर्जा ने 2020 के दिल्ली चुनावों में सक्रिय राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अपेक्षा की है कि वे इन मांगों को अपने घोषणापत्र में ज़रूर सम्मिलित करेंगे और इनको हासिल भी करेंगे।
घोषणापत्र पर विशेषज्ञ समिति का हिस्सा रहीं मनु भटनागर कहते हैं कि चुनी गई सरकार का यह कर्तव्य है कि नागरिकों के सहयोग से इस दिशा में सक्रिय कार्यक्रम शुरू करे और इसको सकारात्मक अंजाम तक पहुंचाए। उनका कहना है कि जो बदलाव आज दिल्ली में होगा, उसी का अनुसरण कल दूसरे राज्य और शहर करेंगे।
ऊर्जा की सीनेट की सदस्य सविता सिंह कहती हैं कि राष्ट्रीय राजधानी के अंदर कचरे के पहाड़ हैं, जो हमारे भूजल और हवा को विषाक्त करते जा रहे हैं। जो देश पांच ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था का उद्देश्य प्राप्त करना चाहता है उसके लिए यह शर्म की बात है कि उसकी राजधानी को बुनियादी सुविधाओं की भी मांग करनी पड़ रही है जो कि एक स्मार्ट, स्थायी और रहने योग्य राष्ट्रीय राजधानी होनी चाहिए।
घोषणा पत्र यह स्पष्ट करता है कि नागरिक बेहतर जीवन स्तर की मांग कर रहे हैं। खाली राजनीतिक वादों से लोग परेशान हैं। यह समय है कि शब्दों के साथ कार्रवाई का भी मेल हो। अब देखना यह है कि क्या कोई भी राजनीतिक दल आने वाले विधानसभा चुनाव में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के अतिमहत्वपूर्ण विषय पर कोई बात भी करता है या नहीं।
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