सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप 3 बल्लेबाजों में दक्षिण अफ्रीका का एक भी बल्लेबाज नहीं है। पूरी सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में दक्षिण अफ्रीका का एक भी गेंदबाज नहीं है। पूरी टेस्ट सीरीज में दक्षिण अफ्रीका की तरफ से सिर्फ दो शतक लगे। जो दो शतक डीन एल्गर और क्विंटन डिकॉक ने पहले टेस्ट मैच में लगाए थे। भारत की तरफ से कुल सात शतक लगे। इसमें रोहित शर्मा के 3, मयंक अग्रवाल के 2 और कप्तान विराट कोहली और उप कप्तान अजिंक्य रहाणे का 1-1 शतक शामिल है।
इन आंकड़ों में ही इस सवाल का जवाब छिपा हुआ है कि अपने घर में भारत को टेस्ट मैच में हराना नामुमकिन क्यों होता जा रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि अब इस कामयाबी के लिए सिर्फ पिच को श्रेय देना भारतीय टीम की उपलब्धि के साथ अन्याय होगा। तीनों टेस्ट मैचों में पिच से कई गुना ज्यादा श्रेय टीम के खिलाड़ियों के एकजुट प्रदर्शन को जाता है। विराट चाहते भी यही थे कि उनकी टीम को सिर्फ घर का शेर कहकर ना बुलाया जाए।
इस पूरी सीरीज में विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीकी का दिमाग पढ़ लिया था, उन्होंने खिलाड़ियों पर नहीं उनके दिमाग पर हमला बोला। पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में आर. अश्विन के सात विकेट लेने के बाद अफ्रीकी बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ सतर्क थे। जबकि बाकी बची पारियों में उन्हें असली चोट तेज गेंदबाजों ने पहुंचाई।
सीरीज में 26 विकेट तेज गेंदबाजों के खाते में आए हैं। इसमें मोहम्मद शमी के 13, उमेश यादव के 11 और ईशांत शर्मा के 2 विकेट शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डुप्लेसिस आखिरी मैच तक यही नहीं समझ पाए कि उनका टीम संयोजन क्या होना चाहिए।
तीसरे टेस्ट मैच में उन्होंने क्विंटन डिकॉक को सलामी बल्लेबाजी का रोल दिया लेकिन वो भी कामयाब नहीं हुआ। कागिसो रबाडा और फिलेंडर का प्रदर्शन अफ्रीकी फैंस के लिए निराशाजनक रहा। रबाडा को एक अंतरराष्ट्रीय तेज गेंदबाज के तौर पर ये सोचना होगा कि क्या वो सिर्फ इंडियन प्रीमियर लीग में 4 ओवर तक ही अपना रूतबा दिखाने की कूवत रखते हैं, क्योंकि आईपीएल के 4 ओवर का कमाल जेब तो गर्म कर सकता है, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में इज्जत नहीं दिला सकता, उसके लिए टेस्ट क्रिकेट में कामयाबी हासिल करनी पड़ती है। फिलहाल 3 टेस्ट मैच में 7 विकेट लेने से तो उन्हें वो कद और इज्जत नहीं मिलने वाली।
जिस टीम के पांच बल्लेबाजों की औसत 70 से ऊपर की हो, इसमें से 3 बल्लेबाजों का औसत 85 से ऊपर का हो तो उसके सामने दुनिया की कोई भी टीम नहीं टिक पाएगी। टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों में
चेतेश्वर पुजारा को छोड़ दिया जाए तो हर बल्लेबाज के खाते में शतक है। पुजारा को इस सीरीज में 2 अर्धशतकों से संतोष करना पड़ा।
मध्यक्रम में रवींद्र जडेजा ने 2 अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्होंने 13 विकेट लिए। यानी सच्चाई ये है कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट टेबल में अगर इस वक्त टीम इंडिया सबसे आगे नजर आ रही है तो उसकी वजह कतई ये नहीं कि वो अपने घर में खेलकर उस पायदान तक पहुंची है बल्कि उसकी वजह ये है कि इस वक्त टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया का प्रदर्शन लाजवाब है।
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