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पश्चिम बंगाल का सीएम कौन?: क्या भाजपा फिर चौंकाएगी?

सार

मुख्यमंत्री के मामले में भाजपा हमेशा चौंकाती रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या बंगाल में भी भाजपा चौंकाएगी या उसी नाम पर मुहर लगाएगी जो आम चर्चा में है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी जितना चुनाव में चौंकाती है, उससे कहीं ज्यादा चुनाव बाद मुख्यमंत्री के नाम से चौंकाती है। बंगाल में मुख्यमंत्री के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन क्या शुभेंदु ही सीएम बनेंगे या फिर भाजपा कोई नया नाम लाकर चौंकाने का सिलसिला जारी रखेगी।

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किसके सिर सीएम का सेहरा?

सियासी गलियारे में बंगाल के सीएम की दौड़ में सबसे आगे शुभेंदु अधिकारी का नाम तैर रहा है। पक्ष में पहली वजह यह गिनाई जा रही है कि शुभेंदु ने दो बार ममता बनर्जी को हराया। पिछली बार नंदीग्राम से और इस बार भवानीपुर से।

ममता ने जब एक सीट पर चुनाव लड़ने का एलान किया तो भाजपा ने इस बार फिर शुभेंदु को नंदीग्राम के बजाय भवानीपुर से ममता के खिलाफ मैदान में उतारा। शुभेंदु तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए हैं, सो वह दीदी का काट जानते हैं। चुनाव नतीजा शुभेंदु के पक्ष में रहा।
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माना जा रहा है कि दीदी को दो-दो बार हराने का पुरस्कार शुभेंदु को मिल सकता है, लेकिन शुभेंदु का तृणमूल कांग्रेस से आकर मुख्यमंत्री बन जाना क्या पार्टी, संघ और संगठन के गले आसानी से उतर जाएगा। हालांकि दूसरे दलों से भाजपा में आने वाले रातोंरात सीएम बने हैं।

मिसाल असम में हिमंत और बिहार में सम्राट चौधरी हैं। हिमंत कांग्रेस से आए और असम में भाजपा ने हैट्रिक लगाई। पहली बार बिहार में भी भाजपा की सरकार बनी है। एनडीए के अंदरुनी सत्ता हस्तांतरण के बाद भाजपाई सीएम सम्राट चौधरी बने, जिनका अतीत राजद-जदयू-समता का रहा है।

दूसरे दलों से आए चेहरे पर दांव लगाने से एक संकट पार्टी-संगठन पर भीतरी मजबूती बनाम भीतरघात का भी रहता है। दीगर है कि आलाकमान के फैसले पर भाजपा में कभी कोई चिल्ल-पौं सुनने को नहीं मिलती।

फ्लैशबैकः बार-बार नये चेहरे

फ्लैशबैक। 2020 में जब मध्यप्रदेश में सिंधिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़ा तो बगावत के चलते कमलनाथ की सरकार गिर पड़ी। शिवराज ने जुगत से भाजपा की सरकार बनाई।

2023 में नरेंद्र मोदी और शिवराज की जोड़ी ने मध्यप्रदेश में पार्टी का जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए कमल खिलाया। विधायक दल की बैठक हुई तो शिवराज से ही मोहन यादव का नाम प्रस्तावित करा दिया गया और वह सीएम बन गए। मोहन यादव संघ से जुड़े थे। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी बड़ी जीत दिलाने वाले शिवराज ही राज्य की राजनीति से बाहर कर दिए जाएंगे।

मप्र. के बाद अब चलिए राजस्थान चलते हैं। 2023 में राजनाथ केंद्रीय पर्यवेक्षक थे। विधायक दल की बैठक हुई। राजनाथ ने जेब से एक पर्ची निकाली और वसुंधरा राजे को थमा दी। उस पर्ची से भजनलाल का नाम निकला। उन्हें सीएम का चेहरा घोषित कर दिया गया। उनका भी संघ से सीधा नाता है।

छत्तीसगढ़ में पिछला चुनाव रमन सिंह की अगुवाई में लड़ा गया और जब ताजपोशी की बारी आई तो विष्णुदेव साय के सिर सेहरा बंध गया। चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने विष्णुदेव साय को लेकर कहा भी था— “आप इन्हें जिताएं, हम बड़ा आदमी बनाएंगे।”
हालांकि बंगाल में शुभेंदु को कभी भाजपा ने सीएम चेहरा घोषित नहीं किया।

अभी दिल्ली में भी रेखा गुप्ता का नाम अचानक सामने आया। हरियाणा में मनोहर लाल की जगह नायाब सैनी ने जगह ली। विधायक दल की बैठकों से पहले तक इन राज्यों के ये नाम कहीं सीएम के संभावित चेहरे के तौर पर चर्चा में नहीं थे। इसलिए बंगाल को लेकर भी शुभेंदु के इतर कई और नाम तैर रहे हैं।

अब किसकी खुलेगी लॉटरी?

फ्लैशबैक से अब फिर चलते हैं बंगाल की ओर। शुक्रवार को विधायक दल की बैठक में सीएम का चेहरा साफ हो जाएगा। शुभेंदु प्रबल दावेदार हैं और चर्चा में भी।

कयास यह भी लगाया जा रहा है कि भाजपा ने बंगाल चुनाव के दौरान ही महिला आरक्षण का बड़ा दांव खेला और वहां महिलाओं ने बंपर मतदान किया। साथ ही सत्ता से महिला को ही उतारा है, सो कहीं कोई महिला चेहरा सामने आ जाए।

दिल्ली में महिला सीएम का प्रयोग कामयाब रहा। अगले साल फिर यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, गोवा, गुजरात और मणिपुर में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं को संदेश देने के लिए महिला सीएम का चेहरा भी सामने आ जाए, तो कोई हैरानी नहीं होगी।

बंगाल में महिलाओं के नाम पर अग्निमित्रा और रूपा गांगुली की चर्चा हो रही है। संघ और संगठन के लिहाज से समिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष के नाम भी तैर रहे हैं। सुकांत मजूमदार और स्वप्नदास गुप्ता (केंद्र में मंत्री सदस्य लोकसभा-राज्यसभा) की लॉटरी निकलने की अटकलें हैं, जो ज्यादा बलवती नहीं हैं।

करीब 75 साल बाद पहली बार श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरा पर कमल खिला है, सो संघ, संगठन, बाहर-भीतर (दलबदल) और महिला को लेकर तालमेल बैठाने की बड़ी चुनौती होगी।

सीएम के नाम पर चाहे जिसकी लॉटरी खुले, दो डिप्टी सीएम का फार्मूला भी लगभग तय है, जो संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

हां, महिलाओं में संदेशखली की रेखा पात्र और पानीहाट की रत्ना देवनाथ (आरजीकर कांड) को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। महिला-बाल कल्याण मंत्रालय की आस है।

बंगाल में समूचे चुनाव की व्यूह रचना अमित शाह ने रची और वही केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाए गए हैं, सो दिलचस्प यह होगा कि विधायक दल की बैठक के बाद जो नाम सामने आता है, वह फिर से चौंकाने वाला होता है या चर्चा-ए-आम।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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