फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब एआई ने दी लकड़ी काटने की सलाह: विडंबना यह थी कि मैं उसी AI से सलाह ले रहा था, जिसने मेरी नौकरी छीन ली

Sat, 10 Jan 2026 07:28 AM IST
हिमांशु चंदेल ब्रायन ग्रोह, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

एआई के बढ़ते असर से काम छिन जाने पर आजीविका के लिए शारीरिक मेहनत वाले काम का रास्ता अपनाया। चैटबॉट की सलाह पर पेड़ काटने का काम शुरू किया, जिससे शुरुआती दिनों में बेहतर कमाई और संतोष मिला। लेकिन लगातार मेहनत, चोट और दर्द ने इस विकल्प की सीमाएं उजागर कर दीं।
 
विज्ञापन
एआई - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुझे अब तक की सबसे अहम कॅरिअर सलाह न तो किसी मेंटर से मिली, न ही किसी इन्सान से। यह सलाह मुझे एक चैटबॉट से मिली। मैंने उससे कहा कि एक कॉपीराइटर के रूप में एआई मेरा ज्यादातर काम छीन रहा है और मुझे इससे बचने का कोई रास्ता चाहिए। बॉट ने थोड़ी देर रुककर मेरी स्थिति को समझा और फिर मुझे एक चेन सॉ, गैस, हाइड्रोलिक, या बिजली से चलने वाली एक आरी, खरीदने की सलाह दे दी। मुझे चिंता इस बात की थी, कि मेरे पास कोई काम नहीं था, जबकि महीने के खर्चे और बिल वगैरह जस के तस थे।
विज्ञापन


एक रात, जब प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने की आखिरी तारीख सिर पर थी, तब मैंने चैटबॉट से फिर वही सवाल पूछा। मैंने उसे अपना अनुभव, अपना शहर और तुरंत कमाई की जरूरत बताई। उसके दिए विकल्पों में सबसे ऊपर जो काम दर्ज था, वह था-स्थानीय पेड़ काटना और उनकी छंटाई करना। मैंने उससे पूछा कि क्या वाकई यह मेरे लिए सबसे अच्छा विकल्प है। उसने जवाब दिया ‘हां, आपकी मौजूदा स्थिति, क्षमताओं और कमाई की जरूरत को देखते हुए, यह सबसे तेज और भरोसेमंद तरीका है, जिससे आप आसानी से पैसे कमा सकते हैं।’ उसने मुझे औजारों, उन्हें खरीदने के तरीकों, काम ढूंढने की जगहों, समय और यहां तक कि वे जगहें भी बताईं, जहां काटी गई झाड़ियां और डालियां फेंकी जा सकती हैं। विडंबना यह थी कि मैं उसी तकनीक से सलाह ले रहा था, जो मेरा काम छीन रही थी। फिर भी, मेरे भीतर उम्मीद जागने लगी।

मुझे खुले में रहना हमेशा पसंद है, और मुझे इस काम की सादगी व नतीजे भी अच्छे लगे। जब ग्राहक संतुष्ट होकर मुझे पैसे देते थे, तो उससे मुझे भी एक अलग तरह की खुशी मिलती थी। कभी-कभी ग्राहकों की नजरों में मुझे हल्की-सी हेकड़ी जरूर दिखती थी। शायद वह मेरे इस काम को निम्नतर मानते हों, पर अब इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि मैं भी कभी इसी सोच का हिस्सा रहा था। अच्छे दिनों में, पेड़ काटकर मैंने कॉपी लिखने से ज्यादा कमाया। दशकों तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे रहने, उंगलियां की-बोर्ड पर चलाने के बाद, लकड़ियों से जूझना, डालियां काटना और खुली हवा में गहरी सांसें लेना मुझे सुकून देता था। लेकिन 52 साल की उम्र में यह काम मेरे लिए बेहद कठिन साबित होने लगा।
विज्ञापन


पिछले वसंत में जब मैंने इसे फुल टाइम जॉब के रूप में अपनाया, तो कई दफे मैं कई दिनों तक दर्द से जूझता रहा। मैंने खुद को समझाया कि अगर सुबह स्ट्रेचिंग करूं या हल्के औजारों में निवेश करूं, तो शायद काम को जारी रख पाऊंगा। पर धीरे-धीरे मेरी एक कोहनी में लगातार दर्द रहने लगा और चेन सॉ पकड़ते ही हल्की-सी टीस उठने लगती थी। एक दोपहर, जब मैं घर-घर जाकर काम के बारे में पूछ रहा था, एक आदमी अपने बरामदे में आया। उसने अपने आंगन में नाशपाती के पेड़ों की ओर इशारा किया और बोला, ‘मैंने एक पुराने दोस्त को इन पेड़ों को काटने के लिए पैसे दिए थे। उसने थोड़ा काम किया, और फिर उसने खुदकुशी कर ली।’ मेरे सामने इस काम को स्वीकारने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। मुझे एहसास था कि पेड़ काटने का काम करने वाले मेरे कई दोस्त बिना स्थायी, ठीक-ठाक तनख्वाह वाली नौकरी के, कड़ी दिहाड़ी मजदूरी करते रहे, चोटिल हुए, दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर हो गए और धीरे-धीरे अंत की ओर चले गए। लेकिन चैटबॉट ने इस संभावना का जिक्र मुझसे कभी नहीं किया। जब हाथ के दर्द के कारण मेरे लिए काम करना मुश्किल हो जाता, तो मैं अक्सर अपने लिविंग रूम में बैठा रहता, फोन पर नई नौकरियां तलाशता, क्योंकि अगर मैं जल्दी ठीक नहीं हुआ, तो मुझे फिर से कुछ नया आजमाना पड़ेगा।

मेरा हाथ अब तक ठीक नहीं हुआ है। हाल ही में जड़ें निकालते समय मेरी पीठ भी बुरी तरह चोटिल हो गई। एक पड़ोसी ने मुझे प्रिस्क्रिप्शन वाली दर्द निवारक दवाएं दीं। उम्मीद है कि मैं फिर से पेड़ काटने का काम कर सकूंगा। लेकिन मुझे यह भी साफ दिख रहा है कि जल्द ही मुकाबला बढ़ेगा। बहुत-से लोग, खासकर हाल ही में कॉलेज से निकले युवा, अब ऐसे काम ढूंढ रहे हैं, जिन्हें एआई अभी तक नहीं बदल सका है। लेकिन एआई की रफ्तार को देखते हुए यह उम्मीद कमजोर लगती है। अगर नेता समय रहते नहीं चेते, तो फैक्टरियों के बंद होने के बाद फैला सन्नाटा ऑफिस तक पहुंच जाएगा। और मजदूर वर्ग ने जिस पीड़ा को दशकों तक अकेले सहा है, वह बहुत जल्द हम सभी की साझा हकीकत बन सकती है।

क्या है सिंथआईडी?
यह एक उन्नत तकनीक है, जिसे गूगल डीपमाइंड ने तैयार किया है। इसका उद्देश्य एआई से बनी सामग्री की पहचान को आसान और भरोसेमंद बनाना है। सिंथआईडी डिटेक्टर नामक फ्री वेरिफिकेशन पोर्टल के जरिये उपयोगकर्ता इमेज, ऑडियो, वीडियो या टेक्स्ट अपलोड कर वॉटरमार्क स्कैन कर सकते हैं, जो एआई-जनरेटेड हिस्सों को हाइलाइट करता है। इस टूल के जरिये गलत जानकारी और उसके गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलती है। यह सामग्री की गुणवत्ता या अर्थ को नहीं बदलता, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाता है। इसका लक्ष्य डीपफेक के दौर में डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता व विश्वसनीयता बनाए रखना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें