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दूसरा पहलू: क्या है आपके सपनों का रंग; सपने हर इंसान देखता है, बस हर कोई उन्हें याद नहीं रख पाता

Wed, 15 Apr 2026 08:35 AM IST
Pavan किम्बर्ली फेन

सार

लगभग 70 से 80 फीसदी लोग यह बताते हैं कि वे रंगीन सपने देखते हैं, न कि केवल ब्लैक एंड व्हाइट। सपने सबसे अधिक 'रैपिड आई मूवमेंट' यानी आरईएम नींद के दौरान आते हैं। इस अवस्था में आंखें तेजी से इधर-उधर घूमती हैं। सपने हर इंसान देखता है, बस हर कोई उन्हें याद नहीं रख पाता। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आरईएम नींद के दौरान दीर्घकालिक स्मृति के लिए जिम्मेदार हिप्पोकैंपस कम सक्रिय रहता है।
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क्या है आपके सपनों का रंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जब आप सो रहे होते हैं, तब आपका मस्तिष्क बिना किसी सचेत प्रयास के, अपने आप ही अद्भुत और अजीब कहानियां रचता है। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में हम सपना देखना कहते हैं। कुछ सपने उबाऊ होते हैं, तो कुछ चौंका देने वाले। सपनों की इस विचित्रता से ही यह समझा जा सकता है कि सोते समय हमारा मस्तिष्क कैसे काम करता है।
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दरअसल, मस्तिष्क का एक छोटा-सा हिस्सा ‘एमिग्डला’ भावनाओं को संसाधित करने का काम करता है और यह सपनों के दौरान बहुत सक्रिय रहता है। वहीं, मस्तिष्क का फ्रंटल कॉर्टेक्स, जो योजना बनाने और सोचने में मदद करता है, इस दौरान अपेक्षाकृत शांत रहता है। यही कारण है कि सपने बिना किसी स्पष्ट कहानी के एक अजीब-से दृश्य से दूसरे दृश्य में कूदते रहते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या सपनों में रंग होते हैं? करीब 70 से 80 फीसदी लोग बताते हैं कि वे रंगीन सपने देखते हैं, न कि केवल ब्लैक एंड व्हाइट। हालांकि, यह आंकड़ा पूरी तरह सटीक नहीं हो सकता, क्योंकि वैज्ञानिकों को लोगों की यादों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। शोध से पता चला है कि सपने सबसे अधिक ‘रैपिड आई मूवमेंट’ यानी आरईएम नींद के दौरान आते हैं।
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इस अवस्था में आंखें तेजी से इधर-उधर घूमती हैं, मानो व्यक्ति अपने सपने में चारों ओर देख रहा हो। इस दौरान मस्तिष्क की गतिविधि को मापने के लिए इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) का उपयोग किया जाता है, जिसमें सिर पर छोटे-छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। जैसे ही आरईएम अवस्था आती है, शोधकर्ता प्रतिभागियों को जगा देते हैं, ताकि वे तुरंत अपने सपनों के बारे में बता सकें।

आपने कई बार सोचा होगा कि क्या अंधे लोग भी सपने देखते हैं? जवाब है-हां, वे भी सपने देख सकते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें सपने नहीं आते, पर सच यह है कि हर कोई सपने देखता है, बस हर कोई उन्हें याद नहीं रख पाता। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आरईएम नींद के दौरान मस्तिष्क का हिप्पोकैंपस, जो दीर्घकालिक स्मृति के लिए जिम्मेदार होता है, कम सक्रिय रहता है। सपनों का कोई मतलब होता है या नहीं, इस पर सदियों से चर्चा होती आ रही है।

मनोविश्लेषण के जनक सिगमंड फ्रायड ने सपनों को ‘अचेतन मन तक पहुंचने का शाही रास्ता’ बताया था। उनके अनुसार, सपनों में गहरा अर्थ छिपा होता है। हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक इस बात से सहमत नहीं हैं। इसलिए, अगर आप अपने सपनों को बेहतर तरीके से याद रखना चाहते हैं, तो अपने बिस्तर के पास एक नोटबुक और पेन रखें। जैसे ही आप जागें, तुरंत अपने सपने को लिख लें। यही सबसे अच्छा तरीका है, उन अद्भुत कहानियों को सहेजने का, जिन्हें आपका मस्तिष्क हर रात रचता है। - द कन्वर्सेशन
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