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Mosaic Warfare: क्या है AI, सैटेलाइट और ड्रोन से होने वाला मोजैक वॉरफेयर? इस रेस में कहां खड़ा है भारत

सार

What Is Mosaic Warfare: मोजैक वॉरफेयर एक खास तरह का युद्ध मॉडल है, जिसमें सैटेलाइट इंटरनेट, सैटेलाइट इंटरनेट से मिली इंटेलिजेंस, उस इंटेलिजेंस का एआई और ह्यूमन कॉर्डिनेशन से एनालिसिस करके टारगेट पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाते हैं।
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क्या है AI, सैटेलाइट और ड्रोन से होने वाला मोजेक वॉरफेयर? - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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What Is Mosaic Warfare: यूक्रेन ने रविवार को रूस के खिलाफ एक बड़ा ड्रोन हमला किया। इसमें पांच महत्वपूर्ण रूसी सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया गया। स्ट्राइकिंग टारगेट रूस की सीमा से हजारों किलोमीटर अंदर थे। Spider's web नाम के ड्रोन हमले में रूस के करीब 41 एयरक्राफ्ट पर हमला किया गया, जिनमें Tu-95, Tu-22 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमान और A-50 रडार डिटेक्शन व कमांड एयरक्राफ्ट होने की बात कही जा रही है। ड्रोन वायरफेयर का यह ट्रेंड हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर में भी देखने को मिला था।

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हम औद्योगिक क्रांति के चौथे युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहां युद्ध की परंपरागत परिभाषा बदल रही है। अब तक सैन्य बटालियन, नेवल शिप, लड़ाकू विमान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, वहीं भविष्य मोजैक वॉरफेयर का है। मोजैक वॉरफेयर एक नई तरह की युद्ध रणनीति है। यह एक खास तरह का युद्ध मॉडल है, जिसमें सैटेलाइट इंटरनेट, सैटेलाइट इंटरनेट से मिली इंटेलिजेंस, उस इंटेलिजेंस का एआई और ह्यूमन कॉर्डिनेशन से एनालिसिस करके टारगेट पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाते हैं।  

क्या है मोजैक वॉरफेयर 

  • इसमें सैटेलाइट इंटरनेट जैसे स्टारलिंक की मदद से रियल टाइम इंटेलिजेंस ग्राउंड से कमांड सेंटर में भेजा जाता है। 
  • एआई और ह्यूमन कॉर्डिनेशन की मदद से उस इंटेलिजेंस का कमांड सेंटर में एनालिसिस होता है। 
  • एनालिसिस करके यह निर्णय लिया जाता है कि कहां पर मिसाइल और ड्रोन अटैक करना है। 

अमेरिका का स्टारशील्ड प्रोग्राम

  • अमेरिका का स्टारशील्ड प्रोग्राम इसी फ्यूचर वॉरफेयर पर काम कर रहा है।
  • एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने खासतौर पर अमेरिकी सैन्य उद्देश्यों के लिए स्टारशील्ड प्रोग्राम को डिजाइन किया है। 

एलन मस्क: भविष्य के युद्धों में एआई और ड्रोन्स डोमिनेट करेंगे

  • एलन मस्क ने हाल ही में F-35 एयरक्राफ्ट पर बात करते हुए कहा था कि मैन्ड फाइटर जेट एक आउटडेटेड कॉन्सेप्ट हैं, जिसमें पायलट पर काफी ज्यादा खतरा रहता है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के युद्धों में एआई और ड्रोन्स डोमिनेट करेंगे। 
  • उनकी इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं न कहीं वह यह चाहते हैं कि भविष्य में अमेरिका की एयरफोर्स में जितने भी एयरक्राफ्ट हैं, उन्हें एआई सैटेलाइट इंटेरनेट इंटेलिजेंस ड्रिवन ड्रोन से रिप्लेस कर दिया जाए। 
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क्या है AI, सैटेलाइट और ड्रोन से होने वाला मोजेक वॉरफेयर? - फोटो : AdobeStock

रूस-युक्रेन युद्ध बना मौजेक वॉरफेयर का टेस्टिंग ग्राउंड

  • साल 2022 में रूस युक्रेन युद्ध जब शुरू हुआ था, उस समय रूस ने सबसे पहले यूक्रेन के कम्यूनिकेशन नेटवर्क को टारगेट किया।
  • इससे यूक्रेन का कम्यूनिकेशन नेटवर्क तबाह होने लगा। इसके कुछ घंटों के बाद ही स्टारलिंक के टर्मिनल रूस यूक्रेन की बैटलफील्ड में एक्टिव हो गए।
  • इसके बाद यूक्रेनी सेना ने स्टारलिंक के अंटीना अपने फील्ड वैन्स, बंकर्स और चलती फिरती गाड़ियों पर लगाया।
  • स्टारलिंक के टर्मिनल, जैम रेजिस्टेंस कम्यूनिकेशन और इंटरनेट सेवा यूक्रेनी सेना को दे रहे थे।
  • यूक्रेनी सेना जसूसी ड्रोन्स से जो विजुअल्स देखते उसे स्टारलिंक के जरिए रियल टाइम में ग्राउंड कमांड सेंटर तक पहुंचा देते।
  • रियल टाइम इंटेलिजेंस से दुश्मन कहां पर है, उसके कितने टैंक हैं, ट्रूप मूवमेंट के बारे में आसानी से पता चल जाता है।
  • इसके बाद एआई और ह्यूमन कॉर्डिनेशन से यह निश्चित किया जाता कि कहां पर मिसाइल मारनी है और कहां पर ड्रोन से अटैक करना है।
  • इसकी मदद से यूक्रेन ने रूस के ऊपर ड्रोन से कई डीप स्ट्राइक किए।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि निकट भविष्य के युद्धों में ड्रोन और एआई का बढ़चढ़ कर इस्तेमाल होने वाला है। अब सवाल उठता है कि हमारा भारत इस तरह के युद्ध के लिए कितना तैयार है? आइए जानते हैं  

ड्रोन वॉरफेयर और भारत

FPV ड्रोन भारत ने तैयार कर लिया है। यह दुश्मन देश के टैंक को सीधे टक्कर मारकर उड़ाने के लिए बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट को साल 2024 में शुरू किया गया था। इसको भारतीय सेना की Fleur-De-Lis Brigade और TBRL दोनों ने मिलकर तैयार किया है। इसमें डबल सेफ्टी सिस्टम दिए गए हैं। इसके अलावा यह ड्रोन रियल टाइम वीडियो फीड भेजने में भी सक्षम है। इसमें एक ड्रोन की कीमत 1.4 लाख रुपये है। ये सभी ड्रोन राइजिंग स्टार ड्रोन बैटल स्कूल में बनाए गए हैं। 

भारत, हमला करने वाले ड्रोन में तो काफी पैसे निवेश कर रहा है। वहीं सवाल यह है कि जब ड्रोन वॉरफेयर युद्ध का नया चेहरा बन रहा है तो ऐसे में देश की सुरक्षा के लिए भारत हाई टेक काउंटर ड्रोन सिस्टम में क्या कर रहा है? आइए जानते हैं -   

भार्गवास्त्र माइक्रो-मिसाइल सिस्टम

  • इसे सोलर डीफेंस और एयरोस्पेस लिमिटेड ने मिलकर बनाया है।
  • यह एक मल्टी लेयर एंटी ड्रोन डिफेंस सिस्टम है। यह दुश्मन के उड़ते हुए ड्रोन, लोइटेरिंग म्युनिशन और ड्रोन के झुंड को गिराने में सक्षम है।
  • इसकी डिटेक्शन रेंज 6 से 10 किलोमीटर है।  
  • वहीं इंटरसेप्शन रेंज 2.5 किलोमीटर तक है। 

आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम 

  • इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने बनाया है।
  • आकाशतीर एक ऑटोमैटिक एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम है।
  • यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन की निगरानी करने का काम करता है।
  • अगर कोई ड्रोन रडार में आता दिखता है, तो आकाशतीर तुरंत उसका पता लगाकर जमीन से मिसाइल फायर करवाने का निर्देश देता है। 

इंद्रजाल 

  • इसे Grene Robotics नाम की कंपनी द्वारा बनाया गया है।
  • यह ड्रोन डिफेंस सिस्टम एआई से लैस है। यह डिफेंस सिस्टम हर तरह के ड्रोन (साइलेंट ड्रोन, रात में उड़ने वाले ड्रोन या छिपा हुआ ड्रोन) की पहचान कर सकता है।
  • इंद्रजाल डिफेंस सिस्टम बिना किसी इंसान की मदद के खुद ड्रोन का पता करता है, उसको ट्रैक करता है और फिर गिरा देता है।
  • ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि भारत के पास एक स्मार्ट डिफेंस सिस्टम भी है।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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