कैसे करती है ये तकनीक काम?
आप जिस तरह फोटो को एडिट करते समय कई तरह के फिल्टर और टूल्स की मदद लेकर उसको काफी सुंदर बना देते हैं। ठीक उसी तरह जीनोम एडिटिंग करते समय CRISPR टूल की मदद ली जाती है। CRISPR तकनीक, एक कैंची की तरह जीव के डीएनए को एक खास जगह से काट देती है।
इसके बाद वैज्ञानिक कटे हुए डीएनए के स्थान पर अपने मन पसंद के डीएनए को जोड़ देते हैं। ऐसा करके जीव की बनावट उसकी ऊंचाई, लंबाई, बुद्धिमत्ता आदि चीजों को अपने मन मुताबिक बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
जीनोम एडिटिंग और भविष्य
अब तक इंसानी बच्चों की बनावट, उसकी बुद्धिमत्ता, रंग, ढंग, चाल, चलन आदि चीजें प्रकृति के ऊपर निर्भर थीं। वहीं आने वाले वक्तों में इंसान ये खुद तय कर सकेगा कि उसका बच्चा कितना होनहार और काबिल होगा। ऐसे में इस तकनीक को लेकर कई नैतिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
साल 2013 में नील ब्लोमकैंप की लोकप्रिय फिल्म Elysium रिलीज हुई थी। फिल्म में 2154 के एक डिस्टोपियन फ्यूचर की कहानी को दिखाया गया है, जहां अमीर और साधन संपन्न लोग एक खास तरह के स्पेस स्टेशन पर रह रहे हैं। इस स्पेस स्टेशन का नाम Elysium है, जो पृथ्वी की कक्षा की परिक्रमा करता है।
वहीं बाकी बचे लोग बर्बाद हो चुकी पृथ्वी पर गरीबी, लाचारी और बीमारियों के बीच लड़ झगड़ रहे हैं। इन दोनों ध्रुवीकृत समाजों में कई तरह की आर्थिक और जैविक असमानताएं हैं। फिल्म में स्पेस स्टेशन पर रह रहे लोगों के पास जीनोम एडिटिंग से जुड़ी महंगी तकनीकें होती हैं, जो हर तरह की बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखती हैं। वहीं दूसरी तरफ एक समाज ऐसा भी है, जो अपनी छोटी छोटी बीमारियों को लेकर जद्दोजहद कर रहा है।
ऐसे में आज जेनेटिक्स के क्षेत्र में जो ये खोजें हो रही हैं। वह हमारे आने वाले भविष्य में ठीक ऐसी परिस्थितियां खड़ी कर सकती हैं, जहां समाज में आर्थिक विषमता के साथ साथ जैविक असमानता (Biological Inequality) भी होगी। जीनोम एडिटिंग काफी महंगी तकनीक है। ऐसे में इसका इस्तेमाल केवल अमीर लोग ही कर सकेंगे। इस कारण उनके बच्चे साधारण बच्चों के मुकाबले ज्यादा तेज और इम्यूनाइज्ड होंगे। जीनोम एडिटिंग तकनीक के विकास से हमारा समाज एक बड़े स्तर पर पोलोराइज हो सकता है।
इस खोज के होने के बाद भविष्य में हम ऐसे समाज में जी रहे होंगे, जहां कुछ लोग जेनेटिक प्योरिटी के कारण हेल्थकेयर, रोजगार और एजुकेशन में सामान्य लोगों की अपेक्षा कहीं ज्यादा अच्छा परफॉर्म करेंगे। वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर में एक बड़ी आबादी ऐसी भी होगी, जो जेनेटिक्स की दौड़ में पीछे होने की वजह से अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की लिए आपस में लड़ रही होगी।
इससे भविष्य में जेनेटिकली इंजीनियर्ड बच्चों का विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पदों पर पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। यही नहीं अमीर और साधन संपन्न देश जेनेटिकली इंजीनियर्ड सेना तैयार करके वैश्विक और राजनीतिक स्तर के कई अहम मोर्चों पर अपना दबदबा बना सकेंगे। ऐसे में जेनेटिक इंजीनियरिंग वैश्विक राजनीति, देशों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके उत्थान और पतन का एक बड़ा कारण बनने वाली है।
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