सीताराम येचुरी और राहुल गांधी ने लगाई बिकाश के नाम पर मुहर
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इधर, दिल्ली में राहुल गांधी औऱ सीताराम येचुरी के बीच सोमवार को हुई बैठक में बिकाश के नाम पर सहमति बनी। बिकाश गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दायर करेंगे। वाममोर्चा ने इससे पहले वर्ष 2017 में भी बिकाश को राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से तब उनका नामांकन पत्र रद्द हो गया था। तब कांग्रेस के प्रदीप भट्टाचार्य तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से निर्विरोध चुन लिए गए थे।
वर्ष 2017 और 2018 के राज्यसभा चुनावों के समय कांग्रेस और वाममोर्चा के बीच तालमेल पर सहमति नहीं बन सकी थी। 2018 में तृणमूल के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी जीत गए थे।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में वाममोर्चा और कांग्रेस के बीच कोई औपचारिक तालमेल नहीं हो सका था। लेकिन तब कोलकाता की जादवपुर संसदीय सीट पर माकपा के बिकाश रंजन भट्टाचार्य के समर्थन में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया था। हालांकि तब बिकाश चुनाव हार गए थे। बिकाश से कांग्रेस नेताओं के बेहतर रिश्ते हैं।
कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने चिटफंड घोटाले के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी उसमें बिकाश ही उनके वकील रहे हैं। इसके अलावा सेव डेमोक्रेसी फोरम के बैनर तले यह दोनों नेता राज्य में कई जगह रैलियां भी कर चुके हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्यसभा की सीट पर आपसी तालमेल बना कर वाममोर्चा और कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में भी उनको तालमेल पर कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन फिलहाल पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। पहले भी इन दोनों की दोस्ती कई मौकों पर टूट चुकी है।
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