डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
बंगाल जल उठा है। चुनाव बाद चिंगारी फिर भड़क गई है। मां-मानुष वाली माटी लहूलुहान है। हिंसा, फायरिंग, आगजनी की घटनाओं ने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। जनादेश के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा न देने का एलान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को चुनौती दे डाली है। संवैधानिक शीर्ष पद पर बैठीं मुख्यमंत्री ममता ने ही संवैधानिक संस्थानों और प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बंगाल में चुनाव बाद उपद्रव बहुत हैरान करने वाला नहीं, लेकिन निंदनीय जरूर है। हिंसक घटनाओं के बीच बंगाल में रामराज बहाल करना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
ऐसा नहीं कि हिंसा का यह अंदेशा पहले नहीं था। गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान जब एक पखवाड़े तक बंगाल में प्रवास किया, तब वहां वर्षों से उपजे भय को भरोसे में बदलने के लिए कहा था। बंगाल में चुनाव के बाद भी 60 दिनों तक केंद्रीय बल रहेगा। इस भरोसे के बूते ही वहां आजाद भारत का अब तक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मतदान हुआ। चुनावी रैलियों में भी पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, गुंडे 4 मई के बाद देख लें। चुनाव आयोग ने विजय जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया ताकि टकराव टल जाएं। जाहिर है, 4 मई को नतीजे आए, लेकिन अंदेशे के अनुरूप ही 24 घंटे के भीतर ही सियासी रंजिश की चिंगारी सुलग पड़ी।
ताजा हिंसा के लिए तृणमूल कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही है। उपद्रवी कोई हो, उसे कतई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। जाहिर है यह सत्ता परिवर्तन का दौर है। 9 मई को नई सरकार शपथ लेगी। आने वाली सरकार के लिए रामराज बहाल करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में प्रदेश की नई सरकार हो या केंद्र यानी डबल इंजन की सरकार के लिए रामराज स्थापित करने के लिए कड़े और बड़े एक्शन की उम्मीद की जानी चाहिए।
भय के बीच जिस भरोसे के बूते बंगाल ने जो जनादेश दिया है, वहां रामराज ही सबसे बड़ा रिटर्न गिफ्ट होगा। वैसे भी यह माटी मां (दुर्गा-काली) की है। चंड-मुंड (असुरों-उपद्रवियों) के वध के लिए जैसे कालिका प्रकट हुई थीं, वैसे ही बार-बार सुलगते बंगाल में रामराज के लिए फिर यह मंत्र जरूरी हो गया है...
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