फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पश्चिम बंगाल डायरी: अभिषेक पर जांच, ममता पर सियासी आंच

सार

West Bengal Politics: सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के सोनारपुर में उन पर हुए हमले के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
विज्ञापन
अभिषेक पर जांच, ममता पर सियासी आंच - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पिछले कई वर्षों से विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई, पूछताछ और कानूनी विवादों के केंद्र में रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा वर्ष बीता हो, जब अभिषेक बनर्जी का नाम किसी न किसी जांच या अदालत की सुनवाई से न जुड़ा हो।

विज्ञापन


इन मामलों का राजनीतिक असर केवल अभिषेक बनर्जी तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी लगातार इन्हें केंद्र सरकार की "राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति" का हिस्सा बताती रही हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों के जरिए परेशान किया जा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जा सकता। ऐसे में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चल रही जांचें केवल कानूनी नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक बन चुकी हैं।

क्या हैं मामले, कितनी जांचें हुईं और क्या है वर्तमान कानूनी स्थिति?

सोनारपुर घटना के बाद ममता का हमला

सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के सोनारपुर में उन पर हुए हमले के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिलने दिया गया और कथित रूप से अस्पताल प्रशासन पर उन्हें जल्द छुट्टी देने का दबाव बनाया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध का जवाब हिंसा, धमकी या जांच एजेंसियों के जरिए नहीं दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
विज्ञापन


अभिषेक के खिलाफ कौन-कौन सी जांचें हुईं?

यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच, पूछताछ, समन और आपराधिक मुकदमा चार अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं होती हैं। किसी मामले में पूछताछ या समन जारी होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता। अभिषेक बनर्जी के मामले में भी अधिकांश जांचें अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची हैं।

1- कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामला

यह सबसे चर्चित मामला है। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों में कथित अवैध कोयला खनन और तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी और सीबीआई ने कई बार अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। कई समन जारी किए गए और दिल्ली तथा कोलकाता में लंबी पूछताछ हुई। हालांकि अभी तक इस मामले में अदालत द्वारा उनके खिलाफ कोई अंतिम दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

2- शिक्षक भर्ती घोटाला

पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान ईडी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन जारी किया। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि कथित अवैध धन के प्रवाह का कोई संबंध उनसे या उनके सहयोगियों से है या नहीं। इस मामले में भी जांच जारी है।

3- 'साइनगेट' मामला

कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी जांच कर रही है। आरोप है कि कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों को लेकर अनियमितता हुई। सीआईडी इस मामले में कई बार पूछताछ कर चुकी है।

4- चुनावी भाषण और कथित हेट स्पीच

लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए कुछ भाषणों को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को समन भेजा। जांच इस बात को लेकर है कि क्या उनके भाषण चुनावी आचार संहिता या अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

5- वॉयस सैंपल मामला

'डीजे' टिप्पणी मामले में वॉयस सैंपल लेने के लिए बिधाननगर अदालत ने अभिषेक बनर्जी को फिर तलब किया है। पहले वह अदालत में पेश नहीं हुए थे। सीआईडी उनकी आवाज़ का नमूना लेकर जांच आगे बढ़ाना चाहती है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी जांच एजेंसी की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार किया है।

6- आवास पर पुलिस कार्रवाई

अभिषेक बनर्जी के घर पर पुलिस कार्रवाई और तलाशी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। मामला अदालत पहुंचा, जहां कलकत्ता हाइकोर्ट ने पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा। इस मामले में भी अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

 

Trending Videos
विज्ञापन

अभिषेक पर जांच, ममता पर सियासी आंच - फोटो : ANI
चुनावी हलफनामे में क्या है?

आधा दर्जन के करीब मामलों का सामना कर रहे अभिषेक बनर्जी द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ सिर्फ दो आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। यह संख्या उन सभी जांचों से अलग है जिनमें केवल पूछताछ या समन जारी हुए हैं।

कुल कितनी जांचें?

यदि सार्वजनिक रिकॉर्ड को आधार माना जाए तो अभिषेक बनर्जी से जुड़े करीब छह प्रमुख जांच या कानूनी प्रकरण सामने आते हैं। इनमें ईडी, सीबीआई और पश्चिम बंगाल सीआईडी की कार्रवाई शामिल है। कई मामलों में उनसे पूछताछ हुई, समन जारी हुए और कुछ मामलों में अदालतों में सुनवाई जारी है।

टीएमसी का पक्ष

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए बार-बार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि हर चुनाव से पहले या महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान जांच की गति तेज हो जाती है। ममता बनर्जी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुकी हैं कि उनका परिवार किसी भी जांच से नहीं डरता और कानून के मुताबिक सहयोग करता रहेगा।

भाजपा का आरोप

भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र हैं और वे केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करती हैं। भाजपा नेताओं का दावा है कि यदि किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो कानून के अनुसार जांच होना स्वाभाविक है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध नहीं कहा जा सकता।

अब तक की स्थिति?

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई मामलों में जांच, पूछताछ और समन जारी हुए हैं, लेकिन अब तक किसी प्रमुख मामले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए अंतिम सजा नहीं सुनाई है। अधिकांश मामले अभी जांच, आरोपों की पड़ताल या न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में लंबित हैं।

ऐसे में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चल रही कार्रवाई फिलहाल कानूनी लड़ाई के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई भी बनी हुई है। आने वाले समय में अदालतों के फैसले और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही इन मामलों की अंतिम दिशा तय करेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें