दूसरी ओर भाजपा ने मुक्त व निष्पक्ष चुनावों के लिए केंद्र से भारी तादाद में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग उठाई है।
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दूसरी ओर भाजपा ने मुक्त व निष्पक्ष चुनावों के लिए केंद्र से भारी तादाद में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग उठाई है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजुमदार कहते हैं कि राज्य पुलिस तृणणूल कांग्रेस के काडर में बदल गई है। यहां केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बिना मुक्त व निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। उनका दावा है कि अबकी लोग तृणमूल कांग्रेस को धूल चटा देंगे। बंगाल में भाजपा ही तृणमूल का एकमात्र विकल्प है।
भाजपा के लिए यह चुनाव कई वजहों से अहम हैं। बीते लोकसभा चुनावों में भारी कामयाबी के बावजूदउसके बाद हुए उपचुनावों में उसे मुंहकी खानी पड़ी है। साथ ही उसके वोट भी घटे हैं। ऐसे में उसके सामने लोकसभा चुनावो की कामयाबी को जारी रखने की अहम चुनौती है। इसके अलावा स्थानीय निकायों पर कब्जे की स्थिति में साल भर बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में काफी फायदा मिलेगा। उन चुनावों से पहले यह राजनीतिक दलों के शक्तिपरीक्षण का आखिरी मौका है।
दूसरी ओर, माकपा ने भी विकास के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की आलोचना की है। माकपा नेता मोहम्मद सलीम कहते हैं कि ममता बनर्जी व उनकी पार्टी ने बंगाल के विकास का एक मिथक तैयार किया है। हकीकत में यहां विकास के नाम पर कोई काम नहीं हुआ है। माकपा नेता का कहना है कि राज्य में बीते चार साल के दौरान एक फ्लाईओवर तक का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
तृणमूल का विकास कागजों पर ही हो रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों के सामने आते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रशांत किशोर की सलाह पर ममता ने जहां अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, वहीं भाजपा भी स्थानीय मुद्दे तलाश रही है। इन मुद्दों पर फैसला करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी एक मार्च को कोलकाता दौरे पर आ रहे हैं।
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