भाजपा के लिए आखिरी चरण में जीत की संभावना कम है।
- फोटो : ANI
सातवें चरण में जिन 34 सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होना है उनमें दक्षिण दिनाजपुर के छह, पश्चिम बर्दवान की नौ, मालदा की छह, मुर्शिदाबाद की नौ और कोलकाता की चार सीटें शामिल हैं। बांग्लादेश से सटे दक्षिण दिनाजपुर में भाजपा को लोकसभा चुनाव में कामयाबी जरूर मिली थी। लेकिन टीएमसी का दावा है कि इस बार जिले में उसका खाता तक नहीं खुलेगा।इसी तरह कभी लेफ्ट का गढ़ रहा पश्चिम बर्दवान में आसनसोल और आसपास के इलाकों को छोड़ कर तृणमूल का मजबूत गढ़ बन गया है।
कोलकाता की 11 सीटों में से सातवें चरण में चार पर मतदान होगा और आठवें और अंतिम चरण में बाकी सात पर। इन शहरी इलाकों में हिंदी भाषा बड़ाबाजार इलाके के अलावा भाजपा की कहीं कोई पैठ नहीं रही है।यह इलाका जोड़ासांको विधानसभा क्षेत्र के तहत हैं।वहां आबादी मिली-जुली है। साथ ही अल्पसंख्यकों की भी खासी तादाद है।लोकसभा में भी यह सीट तृणमूल कांग्रेस को ही मिली थी।
वरिष्ठ पत्रकार पुलकेश घोष मानते हैं कि अगर भाजपा को सातवें चरण में एकाध सीटें मिल भी जाएं तो आखिरी चरण में उसे कोई सीट मिलने के आसार नहीं हैं। आखिरी चरण में मालदा की छह, मुर्शिदाबाद की 11, बीरभूम की 11 और कोलकता की सात सीटों के लिए मतदान होगा। बीरभूम जिले में बीते दो-तीन वर्षो में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच हिंसक टकराव होते रहे हैं। जिले में राजनीतिक हिंसा में भी कई लोगों की मौत हो चुकी है।लेकिन जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अणुब्रत मंडल दावा करते हैं कि यहां भाजपा उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो जाएगी।
जहां तक मुद्दों का सवाल है, अब आम लोगों से जुड़े मुद्दे गौड़ हो चुके हैं।दोनों दलों का चुनाव अभियान अब निजी हमलों और अपनी कमीज दूसरे से सफेद बताने तक ही सीमित रह गया है। हां, भाजपा के नेता अपने अभियान के दौरान बीच-बीच में विकास और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उछालते रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षक डॉ. सुजल कर्मकार कहते हैं, “आखिरी दोनों चरणों के चुनाव का नतीजा अगली सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाएगा।इन दोनों चरणों में आधी सीटें जीतने वाली पार्टी सत्ता की मजबूत दावेदार के तौर पर उभरेगी।लेकिन लगता है भाजपा ने लड़ाई से पहले ही हार कबूल कर ली है। ”