माना जा रहा है कि बंगाल में इस बार चुनाव नतीजे ध्रुवीकरण पर निर्भर करते हैं।
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यश गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य साथी परियोजना के तहत 5 लाख रुपए तक की चिकित्सा सेवा मुफ्त का कार्ड मुझे मिल गया है, हालांकि इलाके के कई लोगों को मतदान प्रक्रिया शुरू होने के कारण नहीं मिला। तृणमूल अगर चुनाव जीत जाती है तो बाकी लोगों को भी यह सुविधा मिल जाएगी।
शांता दलुई खुश हैं कि उनकी बेटी की शादी के लिए सरकार से 25 हजार रुपए मिले। कई और लोग मुफ्त साइकिल, टैब मिलने से खुश हैं और चाहते हैं कि ममता की जीत से ही यह सुविधाएं जारी रहेंगी। अगर भाजपा जीतती है तो यह मुफ्त सुविधाएं बंद हो जाएंगी।
दूसरी ओर, कुछ लोग राज्य सरकार से खासे नाराज हैं। शिक्षक प्रदीप सरकार का कहना है कि मुफ्त भोजन, किताबें, जूते, साइकिल, टैब समेत बहुत कुछ बच्चों को दिया जा रहा है, लेकिन शिक्षक कलर्क बनकर रह गए हैं। हमारा काम गौण हो गया है, पढ़ाने के बजाए इस का हिसाब किताब की रखना पड़ता है कि किसे क्या दिया और किसे क्या देना है।
कारोबारी बुंबा ने कहा कि तृणमूल उम्मीदवार दो बार यहां से जीता लेकिन जीत के बाद दोबारा तो दिखाई नहीं दिया। कई लोग मानते हैं कि स्थानीय नेताओं में भ्रष्टाचार चरम पर है और सत्ता मिलने ही लूटपाट में लग गए हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि घर बनाने के लिए दी जाने वाली सरकारी रकम हो या दूसरी सुविधाएं, सत्ताधारी दल के लोग अपने लोगों को मुहैया करवाते हैं और आम लोगों की नहीं सुनते।
माना जा रहा है कि बंगाल में इस बार चुनाव नतीजे ध्रुवीकरण पर निर्भर करते हैं। यह विधानसभा सीट भी इस मुद्दे में पीछे नहीं। दिनेश पंडित ने कहा कि तारकेश्वर मंदिर विकास प्राधिकरण का चेयरमैन एक मुसलमान फिरहाद हाकिम को बना दिया गया था, क्या हिंदुओं की कमी है कि पद से लिए तृणमूल को हिंदु उम्मीदवार नहीं मिला।
यह सिर्फ तुष्टीकरण के लिए किया जाता है। हालांकि हिंदुओं के विरोध के कारण हाकिम को हटा कर पूर्व सांसद रत्ना दे नाग को चेयरमैन बनाया गया। इससे सरकार की मंशा का पता चलता है। इसे बदलने की जरूरत है।
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