पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में इस बार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं। वर्ष 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से हार गई थी। शुभेंदु इस बार नंदीग्राम के अलावा ममता को उनके गढ़ भवानीपुर में भी चुनौती देने उतरे हैं।
भाजपा ने फिलहाल 144 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने 291 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की तीन सीटें उसने अपने गोरखा सहयोगियों के लिए छोड़ी है। पार्टी ने 47 अल्पसंख्यकों के अलावा 52 महिलाओं को भी टिकट दिया है। भाजपा की चुनौती से निपटने के लिए ममता ने कई पुराने चेहरों पर भरोसा जताया है।
राज्य में पहली बार दो चरणों में मतदान होगा। वर्ष 2001 से पहले तक हमेशा एक ही दिन मतदान होता रहा है। लेकिन उसके बाद यह कई चरणों में कराए गए हैं। पिछली बार तो रिकार्ड आठ चरणों में मतदान हुआ था। अब दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी जीत के दावे करने में जुट गए हैं।
लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने से पहले से ही चुनाव के एलान से 60 लाख विचाराधीन वोटरों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बीते शनिवार तक करीब 18 लाख मामलों का निपटारा ही निपटारा हुआ था। बांकुड़ा और पुरुलिया जैसे जिलों में यह काम पूरा हो गया है लेकिन अल्पसंख्यक बहुल मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24-परगना जिले में अभी लाखों मामलों का निपटारा होना है।
एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बंगाल की मतदाता सूची में करीब 7।66 करोड़ वोटरों के नाम थे। लेकिन 28 फरवरी को प्रकाशित सूची में 6।44 करोड़ नाम ही हैं। उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जमा करने की तारीख तक जिन मामलों का निपटारा होगा उनके नाम पूरक सूची में शामिल किए जा सकेंगे। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि क्या तब तक बाकी लाखों मामलों का निपटारा हो सकेगा?
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा है कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरा होने के बाद चुनाव होना बेहतर था। उन्होंने कहा कि आयोग को चुनाव के दौरान और उसके बाद होने वाली संभावित हिंसा को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
एसआईआर के बाद चुनाव
दूसरी ओर, इस बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इसमें करीब एक करोड़ वोटरों के नाम सूची से कटने की आशंका ने ममता बनर्जी महिलाओं के साथ ही राज्य के युवा तबके का समर्थन हासिल करने के लिए सरकार ने हाल में ही युवा साथी योजना के तहत दसवीं पास बेरोजगार युवाओं को हर महीने डेढ़ हजार रुपए की आर्थिक मदद देने का एलान किया था।
यह रकम 21 से 40 साल तक की उम्र के तमाम युवाओं को मिलेगी। इस साल शुरू की गई युवा साथी योजना के 84 लाख से ज्यादा आवेदन मिले हैं। पहले उनको एक अप्रैल से भत्ता मिलना था। लेकिन चुनाव को ध्यान में रखते हुए मार्च के पहले सप्ताह से ही इसका वितरण शुरू हो गया है।
ममता को उम्मीद है कि राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई तमाम योजनाएं प्रतिष्ठान विरोधी लहर से लड़ने में पार्टी का मजबूत हथियार बनेगी। इनमें लक्ष्मी भंडार के अलावा कन्याश्री, रूपश्री, सबूज साथी, शिक्षाश्री, पथश्री, खेलाश्री और गीतांजलि समेत दर्जन भर योजनाएं शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए करीब 44 लाख किशोरियों को कन्याश्री योजना में शामिल किया गया है।
सरकार के बीते पंद्रह साल के शासनकाल की उपलब्धियों को गिनाने के लिए हर विधानसभा इलाकों में 'उन्नयनेर पांचाली (विकास की गाथा)' नामक रिपोर्ट कार्ड घर-घर पहुंचाया जा रहा है।
'परिवर्तन चाई, बीजेपी ताई'
ममता ने पिछली बार 'खेला होबे' का नारा दिया था जो काफी लोकप्रिय रहा था। इस बार भाजपा ने यहां चुनाव से पहले 'परिवर्तन चाई, बीजेपी ताई यानी बदलाव चाहिए, इसलिए इस बार भाजपा' का नारा दिया है, इसके जवाब में तृणमूल ने नया नारा दिया है कि 'बाचते चाई, बीजेपी बाई यानी जीवित रहना चाहते हैं, इसलिए बीजेपी को विदाई'।
पार्टी के नेताओं ने बताया कि ममता ने राज्य के करीब 18 सौ प्रभावशाली लोगों के नाम निजी पत्र लिखा है। उनके हस्ताक्षर वाला यह पत्र राज्य सरकार की उपलब्धियों के साथ विशेष दूतों के जरिए संबंधित लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
इनमें से दो सौ खासम-खास लोगों के साथ मंत्री और सांसद निजी तौर पर मुलाकात कर ममता का पत्र सौंप चुके हैं। बाकी लोगों को संबंधित जिलों के विधायकों और नेताओं ने पत्र सौंपा है। पार्टी के एक नेता बताते हैं कि यह काम लगभग पूरा हो गया है।,
दूसरी ओर, विपक्षी भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार में डूबी सरकार ने चुनाव से पहले अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए नई योजनाएं शुरू की हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस की तमाम योजनाएं सियासी फायदे के लिए शुरू हुई हैं। राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ कर 4।90 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। चुनाव बाद सत्ता में आने वाली सरकार को यह भारी-भरकम बोझ उठाना होगा।