नंदीग्राम में अपना नामांकन भरते हुए सुवेंदु अधिकारी
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बीजेपी ने इस सीट पर कब्जे के लिए उन सुवेंदु अधिकारी पर ही दांव लगाया है जो हाल तक ममता का दाहिना हाथ थे। दरअसल, नंदीग्राम में जो आंदोलन शुरू हुआ था उसे संगठित करने में शुभेंदु ने अहम भूमिका निभाई थी। शायद इसलिए पार्टी को लगता है कि अपनी उस भूमिका और अधिकारी परिवार के रसूख का लाभ सुवेंदु व बीजेपी को मिलेगा।
ममता बनर्जी ने नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान नंदीग्राम इलाके में 12 मंदिरों और एक मजार के दर्शन किए थे। मंदिरों के दौरे और मंच से चंडीपाठ करने के साथ ही खुद को ब्राह्मण की बेटी बताने को बीजेपी के के खिलाफ ममता की रणनीति माना जा रहा है, साथ ही वे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के बीजेपी के आरोपों को भी हलका करना चाहती हैं।
टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की दलील है कि ममता का मंदिर के दौरे का चुनाव से कोई संबंध नहीं हैं। वे पहले भी अपने दौरों में धार्मिक स्थानों पर जाती रही हैं। टीएमसी सांसद सौगत राय कहते हैं - ‘हम बीजेपी की तरह सांप्रदायिक राजनीति में भरोसा नहीं करते। शुभेंदु एक विश्वासघाती हैं। वे अपने तमाम आदर्शों को भुला चुके हैं। यही वजह है कि वे नंदीग्राम की लड़ाई को हिंदू बनाम मुस्लिम बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी पार्टी का कोई धार्मिक एजेंडा नहीं है।‘लेकिन बीजेपी का दावा है कि इलाके की हिंदू आबादी को लुभाने के लिए ही ममता यह सब कर रही हैं। उनको समझ में आ गया है कि नंदीग्राम में महज अल्पसंख्यक वोट बैंक के सहारे जीत सुनिश्चित करना मुश्किल है।
नंदीग्राम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
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सुवेंदुु अधिकारी सवाल करते हैं कि आखिर ममता को इतने मंदिरों में जाने की क्या जरूरत पड़ गई? वह कहते हैं, ममता ने 30 फीसदी अल्पसंख्यक वोटों के सहारे ही यहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। ममता के साथ घूमने वाले लोगों को देख कर इसे आसानी से समझा जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस ही धर्म के आधार पर लोगों को बांटने का प्रयास कर रही है, लेकिन अपने पहले नंदीग्राम दौरे में जहां ममता ने बीजेपी के इस आरोप का जवाब दिया वहीं उसके हिंदुत्व की विचारधारा पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने अपने भाषण में इमोशन का तड़का भी लगाया। ममता का कहना था, “अगर आप लोग नहीं चाहते तो मैं यहां से नामांकन दाखिल नहीं करूंगी।” नंदीग्राम में उन्होंने अपना परिचय घरेर मेये यानी घर की लड़की के तौर पर देते हुए बीजेपी को हिंदू कार्ड खेलने से बाज आने की चेतावनी दी उन्होंने कहा, “धर्म से ना खेलें। खेल होगा। मैं अपना नाम भूल सकती हूं लेकिन नंदीग्राम को नहीं।”
ममता ने बीजेपी का नाम लिए बिना कहा, “जो लोग हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेल रहे हैं, उनको साफ बताना चाहती हूं कि मैं भी एक हिंदू ब्राह्मण परिवार की लड़की हूं और रोज सुबह चंडीपाठ करती हूं। मेरे साथ हिंदू कार्ड ना खेलें।
“हिंदू-विरोधी होने के बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए उनका कहना था कि वे हिंदू धर्म और इसकी परंपराओं के बारे में भगवा पार्टी के नेताओं से कहीं ज्यादा जानती हैं। ममता ने चुनौती दी कि अगर किसी को मेरे धर्म के बारे में शक है तो मैं उससे बहस करने और हिंदू श्लोकों के पाठ में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हूं।
दरअसल, नंदीग्राम का जातीय गणित बताता है कि यहां हिंदुत्व कार्ड इतना अहम क्यों है। इस विधानसभा क्षेत्र में 30 फीसदी अल्पसंख्यक हैं और 70 फीसदी हिंदू। बीजेपी को इन हिंदू वोटरों पर भरोसा है तो ममता को अल्पसंख्यक वोटरों पर।
नंदीग्राम में दलित वोटरों की तादाद करीब 40 फीसदी है। बीजेपी को इन वोटरों के समर्थन का भी भरोसा है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए तरह-तरह की रणनीति अपना रही हैं। इसी के तहत बीजेपी कहीं ममता को बाहरी बता रही है तो कहीं उन पर तुष्टिकरण के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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