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जेलेन्स्की का सूट, ट्रंप के इरादे और दुनिया की टी-शर्ट

सार

जेलेन्स्की का सूट आज के समय का एक बहुत बड़ा प्रतीक है। सूट पहनकर दुनिया को उपदेश देने वाली ये शक्तियां अपनी नीति और नीयत में कितनी नंगी हैं, ये समझना जरूरी है। अपने बदन पर स्वाभिमान का टी-शर्ट पहनकर घूमने वाला कोई देश इनको पसंद नहीं आएगा। सूट की इन महाशक्तियों के सामने दुनिया के टी-शर्ट, गमछे और बंडी को अपना स्वाभिमान और अस्तित्व बचाना ही इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है।

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वोलोदिमीर जेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में मुलाकातें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दृश्य एक –

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तारीख – 22 फरवरी 2025
स्थान – अमेरिका, वॉशिंगटन डी. सी., राष्ट्रपति का कार्यालय
किरदार – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप , यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेन्स्की, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, कुछ पत्रकार और अन्य।


इतनी बड़ी मुलाक़ात के लिए भी जेलेन्स्की अपने नियमित कपड़े ही पहन कर आए थे। टी-शर्ट और कार्गो पैंट। अपने ही अंदाज़ में वे पत्रकारों के सामने ही लाइव कैमरे पर डोनाल्ड ट्रम्प से भिड़ गए। अपने देश के लिए, उसके हितों के लिए। उस समय एक पत्रकार ने उनसे पूछ भी लिया था-

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 आप इतनी बड़ी मुलाकात के लिए भी इतने साधारण कपड़े पहन कर आए हैं?
 जेलेन्स्की ने पलटकर पत्रकार से ही पूछ लिया था -आपको कोई तकलीफ है क्या?


दृश्य दो –
तारीख: 18 अगस्त 2025
स्थान – वही - अमेरिका, वॉशिंगटन डी. सी., राष्ट्रपति का कार्यालय
किरदार – ये भी वही - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेन्स्की, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, कुछ पत्रकार और अन्य।


अब सबकुछ बदला हुआ था। कपड़ों से लेकर व्यवहार तक। शिष्टाचार दोनों ओर से बह रहा था। ट्रंप और जेलेन्स्की दोनों ओर से। जेलेन्स्की इस बार सूट पहनकर आए थे। उसी पत्रकार ने फिर उनसे कहा कि आप इस सूट में अच्छे लग रहे हो! ट्रंप भी तपाक से बोले –

हां मैंने भी इनसे यही कहा। फिर जेलेन्स्की से बोले ये वही पत्रकार हैं जिन्होंने आपको पिछली बार टोका था!
जेलेन्स्की बोले – हां मैं इनको पहचान गया। मैंने तो सूट पहन लिया है पर इन्होंने वही सूट पहना है जो उस दिन पहना था!


 

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दुनिया के ये व्यापारी चौधरी आखिर मसखरे से राष्ट्रपति बने और अपनी शर्तों पर जीना चाहने वाले जेलेन्स्की को झुका कर ही माने। - फोटो : PTI

बहरहाल, इस वैश्विक घटनाक्रम की संक्षिप्त लेकिन अतिशय नाटकीय दृश्यावली में फरवरी 2025 से अगस्त 2025 के इन छह महीनों में बहुत कुछ बदल गया है। जेलेन्स्की के कपड़े ही नहीं बदले हैं बल्कि हावभाव भी बदल लिए हैं। फरवरी की मुलाक़ात तीखी नोंक-झोंक में बदल गई थी। जेलेन्स्की के लिए बना भोजन धरा रह गया था और उन्हें एक तरह से धकियाकर ओवल दफ्तर से बाहर कर दिया गया था। इस मुलाक़ात के बाद ट्रम्प और जेलेन्स्की के कई मीम भी बने थे, जिसमें दोनों को हाथापाई तक करते हुए बताया गया था।

अबकी दोनों बहुत सुकून से मिले। न केवल घंटों मुलाक़ात चली, बल्कि यूरोप के अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी वहीं बुला लिए गए थे। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सब। ये ही वो शक्तियां हैं, जिन्होंने यूक्रेन को कहा था कि चिंता मत करो हम तुम्हारे साथ हैंं, हम तुम्हें रूस के खिलाफ लड़ने में पूरी मदद करेंगे। पूरी मदद करेंगे पर खुद नहीं लड़ेंगे। हमारा एक भी नागरिक या सैनिक नहीं मरेगा। नागरिक और सैनिक सब यूक्रेन के मरेंगे।
 

आखिर क्या बदला इन छह महीनों में? फरवरी में ट्रंप उसी गुरूर में जी रहे थे कि एक फोन करुंगा और रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवा दूंगा!! उनको लगा जेलेन्स्की घुटनों के बल आएंगे और जो कहा जाएगा मान जाएंगे। हुआ ठीक उलट।


पुतिन को समझाने गए तो उन्होंने भी झिड़क दिया।

ट्रंप को समझ आया कि मामला पेचीदा है और यूं शेखी बघारने से कुछ नहीं होगा। तो टैरिफ का दांव खेला। उसमें भी अपने ही जाल में घिर गए।

आखिर पुतिन अपनी ही शर्तों पर मिलने के लिए तैयार हुए। चंद रोज पहले अलास्का में मिले भी। आसमान में गुजरते बमवर्षक अमेरिकी जहाजों के बीच नीचे जमीन पर जब ट्रंप और पुतिन मिले तो दुनिया की राजनीति का एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। दो बड़े ध्रुव, दो बड़ी ताकतें मिल रही थीं, और जिनको समझ नहीं है उन्हें समझा रही थीं कि अब न तो दुनिया दो ध्रुवीय रह गई है, न एक ध्रुवीय, न बहुध्रुवीय।

अब दरअसल ध्रुव तो है,, पर वो कोई देश नहीं हैं। वो सिर्फ एक ही चीज़ है और वो है पैसा, वो है व्यापार। अब सारे बड़े राष्ट्राध्यक्ष एक क्रूर व्यापारी की तरह व्यापार कर रहे हैं। दांव पर यूक्रेन जैसे छोटे देश लगे हैं और बिसात पर इन्हें मोहरे की तरह उपयोग में लाया जा रहा है, इसीलिए तो ट्रम्प और जेलेन्स्की की ताज़ा मुलाकात के ठीक पहले अमेरिका का ये बयान आ जाता है कि इस बातचीत में यूक्रेन के लिए नाटो की सदस्यता और डोनाबास पर रूस का कब्जा एजेंडे में नहीं हैं!

ट्रंप और पुतिन के बीच क्या बात हुई होगी उसे समझने के लिए ये इशारा ही काफी है। कितने आश्चर्य की बात है कि जिस नाटो की सदस्यता को लेकर ये सारा बखेड़ा खड़ा हुआ, वही एजेंडे से बाहर हो गई। यूक्रेन तो पूरी तरह ठगा गया। ऐसे में जेलेन्स्की के पास सूट पहनकर आने और अपना अस्तित्व बचाने के लिए झुककर बात करने के अलावा विकल्प ही क्या रह गया है? दुनिया के ये व्यापारी चौधरी आखिर मसखरे से राष्ट्रपति बने और अपनी शर्तों पर जीना चाहने वाले जेलेन्स्की को झुकाकर ही माने।

इस पूरे मामले में इन व्यापारी शक्तियों का कैसा दोगलापन रहा। भारत सहित दुनिया के सब देशों को रूस से व्यापार रोकने के लिए धमकाते रहे और खुद उसी रूस से व्यापार करते रहे।

इधर पुतिन इनकी टेबल पर आ गए तो अब जेलेन्स्की को भी सूट पहना दिया।

यही समझने वाली बात है। जेलेन्स्की का सूट आज के समय का एक बहुत बड़ा प्रतीक है। सूट पहनकर दुनिया को उपदेश देने वाली ये शक्तियां अपनी नीति और नीयत में कितनी नंगी हैं, ये समझना जरूरी है। अपने बदन पर स्वाभिमान का टी-शर्ट पहनकर घूमने वाला कोई देश इनको पसंद नहीं आएगा। सूट की इन महाशक्तियों के सामने दुनिया के टी-शर्ट, गमछे और बंडी को अपना स्वाभिमान और अस्तित्व बचाना ही इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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