तूतनखामेन का मकबरा क्यों है खास?
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मिस्र में तूतनखामेन के मकबरे के सजावटी कमरों के पीछे छिपी हुई जगहों के बारे में जानने की फिर से दिलचस्पी पैदा हुई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर ये छिपे कमरे मौजूद हैं, तो इनमें तूतनखामेन की सौतेली मां और सास नेफरतीती का मकबरा भी हो सकता है। यह धारणा सबसे पहले एक दशक से भी ज्यादा समय पहले दी गई थी। मशहूर पुरातत्वविद निकोलस रीव्स ऐसे सुरागों का हवाला देते हैं।
शोधकर्ताओं के एक दल ने 2023 और 2024 के बीच तूतनखामेन के मकबरे (जिसे केवी62 के नाम से भी जाना जाता है) में पुरातत्व और भूभौतिकीय जांच का काम किया। मुख्य शोधकर्ता ममदौह एल्दामाती ने नेचर पत्रिका को बताया कि नतीजों से केवी62 के पीछे छिपी संरचनाओं के संकेत मिलते हैं। दरअसल, मिस्र के राजा फराओ के लिए यह दफन की जगह असामान्य रूप से छोटी है। रीव्स का तर्क है कि यह लगभग 1350-1325 ईसा पूर्व के एक बड़े शाही कब्र परिसर का सिर्फ बाहरी हिस्सा है। आगे की जांच इस बात पर निर्भर करती थी कि क्या भूभौतिकी तकनीक के जरिये दीवार को नुकसान पहुंचाए बिना उसके आर-पार देखा जा सकता है। शुरुआती जांच में कम आवृत्ति वाले ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का इस्तेमाल किया गया, जो मुख्य रूप से 400-900 मेगाहर्ट्ज के दायरे में काम करते थे। ऐसी आवृत्ति आसपास के चूने-पत्थर में ज्यादा गहराई तक जा सकती है। लेकिन, इससे तस्वीरों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। हाल की जांच में माइक्रोग्रैविटी सर्वे भी शामिल किए गए, जो जमीन के नीचे घनत्व में अंतर के कारण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में होने वाले मामूली बदलावों को मापते हैं। दोनों तरह की जांच में चुनौती यह है कि उनसे दीवार के ठीक पीछे किसी बड़े खुले कमरे का साफ सबूत नहीं मिला है।
इस बात को समझाने के लिए छिपे हुए कमरे की धारणा मानने वालों का कहना है कि हो सकता है कि किसी भी रास्ते को जान-बूझकर मलबे से भर दिया गया हो, जिससे उन खाली जगहों के संकेत छिप गए हों, जिनका पता लगाने की उम्मीद जांचकर्ताओं को शुरू में थी। यह बात सही लग सकती है। लेकिन, यह अब भी केवल एक अनुमान भर है, कोई पक्का तथ्य नहीं। अब आने वाले महीनों में इस बात पर फैसला लिया जा सकता है कि क्या मकबरे की दीवार में सावधानी से छेद करके उसमें छोटे कैमरे लगाए जाएं। शायद तभी तूतनखामेन के मकबरे का अनसुलझा रहस्य सुलझ सके। -द कन्वर्सेशन