चीन में लगभग 91 फ़ीसदी निवासी स्थानीय जातियों और समुदायों से हैं।
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क्या करना चाहिए हिंदुस्तान को?
देखा जाए तो किसी देश के शरणार्थियों में हिंदुस्तान की दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए। मगर अपनी उदार मानवीय पहचान के चलते पाकिस्तान, बंगलादेश, म्यांमार,नेपाल और तिब्बत से आने वाले शरणार्थियों के लिए भारत एक आदर्श शरणगाह बन गया है। चीन में लगभग 91 फ़ीसदी निवासी स्थानीय जातियों और समुदायों से हैं। इनमें बौद्ध धर्म और उससे प्रभावित उप धर्मों तथा जातियों की संख्या है। इनके 75000 से अधिक बौद्ध मठ और मंदिर हैं।
बौद्ध धर्म पढ़ाने वाले क़रीब तीन दर्ज़न स्कूल -कॉलेज हैं। बौद्ध पत्र पत्रिकाओं की संख्या 50 से अधिक है।लेकिन विडंबना यह है कि चीन सरकार से यदि कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो भी वह कोई धर्म ग्रहण नहीं कर सकता। यदि किसी ने ऐसा किया तो उसे सज़ा मिलती है। यह सरकारी फ़रमान है। चीन की इकलौती सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के क़रीब साढ़े आठ करोड़ कार्यकर्ता हैं। इन पर भी किसी धर्म का अनुयाई होने पर पाबंदी है।
चीन क्या कर रहा है आबादी के साथ?
यह तो हुई बहुसंख्यक आबादी की बात। दूसरे नंबर पर ईसाई आबादी है। मुस्लिमों से अधिक है। क़रीब 4. 25 करोड़ ईसाई चीन के विभिन्न प्रांतों में बिखरे हुए हैं। शी जिन पिंग की योजना के मुताबिक़ पिछले साल ईसाईयों के लिए पंचवर्षीय योजना पेश की गई थी। इस योजना में सभी ईसाईयों का मुस्लिमों की तर्ज़ पर चीनीकरण या कहें तो मार्क्सवादीकरण किया जाना प्रस्तावित है। कम्युनिस्ट पार्टी ने सिफारिश की है कि ईसाई धर्म को कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में लाया जाए। वहां अनेक चर्चों को ध्वस्त कर दिया गया।
ऑनलाइन बाइबल की बिक्री रोक दी गई। स्कूल और पूजाघरों को जबरन बंद कर दिया गया। इस साल शांझी का विशाल चर्च विस्फ़ोट से उड़ा दिया गया। इससे पहले दिसंबर में चेंगदू चर्च पर ताला डाल दिया गया और पादरी तथा वहां उपस्थित अनुयाइयों को हिरासत में ले लिया गया। ये चर्च सरकार की अनुमति के बिना चल रहे थे। और तो और अपने समर्थक पादरियों की नियुक्ति का हक़ भी सरकार ने अपने पास रख लिया है। सैकड़ों चर्च इसलिए बंद कर दिए गए क्योंकि वे कम्युनिस्ट पार्टी की डिज़ाइन से अलग थे।
चीन क्या कर रहा है मुस्लिमों के साथ?
तीसरे नंबर पर मुस्लिम आबादी है। यह हुई और उइगर उप जातियों में बंटी हुई है। कोई दस राज्यों में फ़ैली इस मुस्लिम क़ौम की आबादी 3 करोड़ के आस पास है। अब इस आबादी का भी जबरिया चीनीकरण किया जा रहा है। इसके लिए शी जिन पिंग की 2015 की नीति के मुताबिक़ यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट इस योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत चीन के इस्लाम,बौद्ध और ईसाईयों को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की नीतियों को अपनाना ज़रूरी है।
हाल ही में इस्लामिक एसोसिएशन की एक वेबसाइट में इसका ड्राफ्ट उजागर होने से चीनी मुसलमान बेहद ग़ुस्से में हैं। चीन के पश्चिमी प्रान्त शिनजियांग के एक गुप्त कैम्प में दस लाख मुस्लिमों को इस मक़सद से क़ैद करके रखने की रिपोर्टें भी आईं थीं। हज़ारों लोगों को दाढ़ी रखने या हिज़ाब के कारण हिरासत में ले लिया गया था। यह बात संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी कही गई है।
हिन्दुस्तान ही नहीं संसार भर के लोगों के लिए चीन से आ रही ये खबरें चिंता का सबब हैं।
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चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में सरकार के चहेते मुस्लिम नेताओं ने अपनी क़ौम के सदस्यों से अपील की थी कि वे अपने धर्म का चीनीकरण करने में सहयोग दें। इस्लाम में मार्क्सवादी विचारधारा को शामिल करें, मस्जिदों में चीनी झंडा लगाएं वगैरह-वगैरह। इन ख़बरों ने संयुक्त राष्ट्र को भी चिंता में डाल दिया था। सैकड़ों लोगों ने चीन के विरोध में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने प्रदर्शन भी किया था। संगठन की एक रिपोर्ट में भी इसे स्वीकार किया गया था।
बीते दिनों निगझिया प्रान्त की एक मस्जिद को गिराने गए चीनी अफसरों को भारी विरोध सहना पड़ा था। मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद घेर ली और अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा था। वजह यह थी कि एक तो मस्जिद निर्माण की अनुमति नहीं ली गई थी। दूसरा कारण यह था कि मस्जिद के गुंबद सारी दुनिया की मस्जिदों की तरह प्याज के आकार के थे। चीन में सरकारी नियमों के मुताबिक़ कम्युनिस्ट पार्टी की घोषित डिज़ाइन पर ही मस्जिद बन सकती है।
हिन्दुस्तान ही नहीं संसार भर के लोगों के लिए चीन से आ रही ये खबरें चिंता का सबब हैं। भारत के बाशिंदे इस नज़र से राहत की सांस ले सकते हैं कि यहां उन्हें वो आज़ादी है ,जो दुनिया में किसी भी देश के लोगों को हासिल नहीं है। वे धर्म से बड़ा देश समझ सकते हैं और अगर न भी समझें तो इसके लिए भी आज़ाद हैं। इससे बड़ी स्वतंत्रता और क्या हो सकती है?
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