बेहद खतरनाक डायनासोरों में से एक, टायरेनोसौरस रेक्स से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य उसकी छोटी भुजाएं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि टी. रेक्स, जिसका अर्थ होता है ‘जालिम छिपकलियों का राजा’, एक बेहद खतरनाक शिकारी था। टी. रेक्स सफल शिकारी साबित हुआ और लाखों वर्षों तक पृथ्वी पर राज करता रहा। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि टी. रेक्स अपनी बांहों का उपयोग शिकार को पकड़ने या हमला करने में करता होगा।
धरती पर कभी घूमने वाले सबसे प्रसिद्ध डायनासोरों में से एक, टायरेनोसौरस रेक्स ने लोगों के मन में हमेशा से आश्चर्य और जिज्ञासा पैदा की है। 1900 के शुरुआती वर्षों में जब इसका पहला कंकाल खोजा गया, तब से ही इसने लोगों के मन में हैरानी भर दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि टी. रेक्स, जिसका अर्थ होता है ‘जालिम छिपकलियों का राजा’, एक बेहद खतरनाक शिकारी था। इसकी लंबाई लगभग 40 से 45 फीट तक और ऊंचाई करीब 20 फीट तक होती थी। इसका वजन एक अफ्रीकी हाथी जितना भारी था और इसके दांत लगभग एक फुट लंबे होते थे।
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टी. रेक्स से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य उसकी छोटी भुजाएं हैं। इतना विशाल और शक्तिशाली शिकारी होने के बावजूद उसकी बांहें केवल लगभग 3 फीट लंबी थीं। यदि इन्सानों का शरीर भी टी. रेक्स जैसा होता, तो 6 फीट लंबे व्यक्ति के हाथ केवल 10 से 12 इंच के होते। आखिर इन छोटी बांहों का उपयोग क्या था? दरअसल, टी. रेक्स अकेला ऐसा डायनासोर नहीं था, जिसकी भुजाएं छोटी थीं। थेरोपोड नामक मांसाहारी डायनासोरों के समूह में कई प्रजातियों में यह विशेषता विकसित हुई थी।
जीवाश्मों से पता चलता है कि टी. रेक्स के पुराने रिश्तेदारों की बांहें अपेक्षाकृत लंबी थीं, जो समय के साथ छोटी होती चली गईं। इसके बावजूद टी. रेक्स एक बेहद सफल शिकारी साबित हुआ और लाखों वर्षों तक पृथ्वी पर राज करता रहा। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि टी. रेक्स अपनी बांहों का उपयोग शिकार को पकड़ने या हमला करने में करता होगा। लेकिन इसके विशाल जबड़े इतने शक्तिशाली थे कि शिकार तक पहुंचने के लिए हाथों की खास जरूरत नहीं पड़ती होगी। शोध बताते हैं कि कई थेरोपोड डायनासोरों में बड़ी खोपड़ी और छोटे हाथों के बीच गहरा संबंध था।
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संभव है कि बड़ा सिर शिकार करने में अधिक उपयोगी साबित हुआ हो और शरीर के संतुलन के लिए हाथ छोटे होते चले गए हों। फिलहाल वैज्ञानिक पूरी तरह नहीं जानते कि टी. रेक्स अपने हाथों का उपयोग कैसे करता था या वे इतने छोटे क्यों विकसित हुए। लेकिन जैसे-जैसे नए जीवाश्म मिलते रहेंगे, वैज्ञानिक नई परिकल्पनाओं की जांच करते रहेंगे और शायद भविष्य में कोई नई खोज इस रहस्य को सुलझा दे। यही विज्ञान की सबसे रोमांचक बात है, हर नई खोज हमें अतीत के किसी अनसुलझे रहस्य के और करीब ले जाती है। -द कन्वर्सेशन