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दूसरा पहलू: जलीय दुनिया की गुपचुप नायिकाएं; पानी की सफाईकर्मी हैं सीपें

Tue, 03 Mar 2026 08:34 AM IST
Pavan कुमार सिद्धार्थ

सार

सीपें पानी की सफाईकर्मी हैं। एक सामान्य आकार की सीप एक दिन में 20 से 40 लीटर तक पानी छान सकती है। समुद्री सीपें आम तौर पर 10 से 20 साल तक, जबकि मीठे पानी की सीपें 50 से 100 साल तक जी सकती हैं। एशियाई देशों में सीपों को ‘समुद्र का पौष्टिक उपहार’ कहा जाता है। इनमें अनुकूलन की क्षमता है। सामूहिक मृत्यु के बाद कुछ सीपें बच जाती हैं। वही आगे चलकर नई पीढ़ी बनाती हैं।
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जलीय दुनिया की गुपचुप नायिकाएं - फोटो : FreePik
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विस्तार
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नदी की तलहटी में आधी गड़ी हुई, या समुद्र के किनारे चट्टानों से चिपकी हुई सीपों में न तो कोई चमक-दमक है, न कोई तेज गति। सीपों को अगर एक पंक्ति में समझना हो, तो कहा जा सकता है कि वे पानी की सफाईकर्मी हैं। बिना थके, बिना रुके सीप अपने शरीर में पानी खींचती है, उसमें से गंदगी, सूक्ष्म कण, बैक्टीरिया, शैवाल, रसायन और भारी धातु तक को छानती है और अपेक्षाकृत साफ पानी बाहर छोड़ देती है।
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वैज्ञानिक बताते हैं कि एक सामान्य आकार की सीप एक दिन में 20 से 40 लीटर तक पानी छान सकती है। दुनिया भर में सीपों की लगभग 1,200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से करीब 1,000 प्रजातियां मीठे पानी में और बाकी समुद्री जल में रहती हैं। सीपों का कोमल शरीर दो मजबूत खोलों से ढका होता है, जो कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं। मोती बनने की प्रक्रिया भी इसी से जुड़ी है। जब कोई बाहरी कण उनके शरीर के भीतर फंस जाता है, तो सीप उसे ढंकने के लिए कैल्शियम की परतें चढ़ाती जाती है और धीरे-धीरे मोती बन जाता है। समुद्री सीपें आम तौर पर 10 से 20 साल तक, जबकि मीठे पानी की सीपें 50 से 100 साल तक जी सकती हैं।

चीन, जापान, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में सीपों को उगाने के लिए समुद्र के तट के पास बांस, लकड़ी या रस्सियों की कतारें लगाई जाती हैं। इन्हीं पर सीपों के लार्वा आकर चिपक जाते हैं। कुछ जगहों पर पुराने खोल, पत्थर या खास तरह की टाइलें भी डाली जाती हैं, ताकि सीपों को पकड़ बनाने के लिए ठोस सतह मिल सके। फिर समुद्र अपना काम करता है। पानी के साथ आने वाला पोषण, शैवाल और खनिज तत्व सीपों के भोजन बनते हैं। चीन इस क्षेत्र में सबसे आगे है। जापान में सीपों की खेती तकनीकी रूप से काफी उन्नत है। कुछ देशों में सीपों की खेती गरीब समुदायों के लिए एक स्थिर आमदनी का साधन बन चुकी है।
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सीपों के खोलों का इस्तेमाल चूना बनाने, खाद कैल्शियम बढ़ाने व निर्माण सामग्री में भी होता है। कुछ जगहों पर सीपों के खोलों से सड़क और तटीय बांध मजबूत किए जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में भी सीपों के खोल का पाउडर उपयोग में लाया जाता रहा है। सीपें प्रोटीन, जिंक, आयरन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं। यही कारण है कि एशियाई देशों में इन्हें ‘समुद्र का पौष्टिक उपहार’ कहा जाता है। पोलैंड की नीदा नदी में 1980 के दशक में सीपें पूरी तरह समाप्त हो गई थीं, पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के प्रदूषण को काफी हद तक कम करके मोटे खोल वाली नदी-सीप को सफलतापूर्वक फिर से बसाया गया। सीपों में अनुकूलन की अद्भुत क्षमता है। हर सामूहिक मृत्यु के बाद कुछ सीपें बच जाती हैं। वही आगे चलकर नई पीढ़ी बनाती हैं। यही विकास की प्रक्रिया है। यही उम्मीद है।
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