बिजनौर जिले में आज भी कई स्थल पुरातन इतिहास के गवाह हैं। मंडावर का कण्व तालाब ऐतिहासिक कालखंड का साक्षी है। बिजनौर जिले के कस्बे मंडावर में कण्व ऋषि का आश्रम था, जहां दुष्यंत और शकुंतला की मुलाकात हुई थी। इनके पुत्र के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा। मंडावर कस्बे में कण्व ताल आज भी है और मंडावर को कण्व ऋषि का आश्रय स्थल भी माना जाता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा में इस स्थान का जिक्र किया है।
महाभारत काल के कारण देश के इतिहास का एक अहम हिस्सा हस्तिनापुर क्षेत्र के आसपास ही है। गंगा नदी के साथ एक और नदी यहां के जीवन का अहम हिस्सा रही है, मालन नदी। पहले इसे मालिनी के नाम से जाना जाता थ। यह नदी गढ़वाल के शिवालिक की पहाड़ियों से निकलकर हल्दूखाता होते हुए बिजनौर के रावली में गंगा में मिल जाती है। यह बात और है कि वर्तमान दौर में कई जगहों पर मालन अब सिमट-सी गई है, लेकिन एक दौर था, जब मालन और उसके आसपास ही इस देश का नाम भारत होने की कहानी लिखी जा रही थी।
दरअसल, बिजनौर जिले के छोटे से कस्बे मंडावर में कण्व ऋषि का आश्रम था। यहीं पर राजा दुष्यंत और शकुंतला की मुलाकात हुई थी और दोनों ने गंधर्व विवाह किया। राजा दुष्यंत हस्तिनापुर चले गए और उसके बाद शकुंतला को पुत्र पैदा हुआ। कण्व ऋषि ने शकुंतला और उसके पुत्र को कुछ शिष्यों के साथ हस्तिनापुर भेजा। राजा दुष्यंत ने भरत नाम के इस पुत्र को अपना उत्तराधिकारी माना और राजा घोषित किया।
कहा जाता है कि भरत ने पृथ्वी के सभी राजाओं पर विजय प्राप्त की। इन्हीं चक्रवर्ती राजा भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा। बचपन में किताबों में एक बालक को शेर के मुंह को खोलकर दांत गिनने की फोटो खूब देखी है। यह भी भरत के बचपन की कहानी से जुड़ा चित्र माना जाता है।
बिजनौर जिले में आज भी इतिहास से जुड़ीं ये कहानियां अपनी निशानियां छोड़े हुए हैं। मंडावर कस्बे में कण्व ताल आज भी है और मंडावर को कण्व ऋषि का आश्रय स्थल भी माना जाता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा में इस स्थान का जिक्र किया है। मंडावर के कण्व तालाब के पास एक बहुत प्राचीन मंदिर है।
एक अन्य रोचक बात यह है कि पुराने जमाने में पति की मौत के बाद सती होने वाली महिलाओं की याद में उनके परिवार के कुछ लोगों ने छोटी समाधिनुमा प्रतिमाएं बनवाई थीं। पीढ़ियों से चले आने के बाद भी कुछ बिल्कुल साफ-सुथरी बनी हुई हैं और उनकी देखरेख भी वर्तमान पीढ़ी के लोग करते हैं। खैर, मालन नदी अपने इतिहास के साथ कई जगह पर सिकुड़ी नजर आती है, तो कहा जाता है कि बारिश में रौद्र रूप भी दिखाती है। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नदी में दूध प्रवाहित करके इसके इतिहास पर प्रकाश डाल चुके हैं।