हमारे दिमाग में पूरे शरीर का एक व्यवस्थित ‘नक्शा’ मौजूद होता है। दरअसल, यह कोई असली तस्वीर नहीं होती, बल्कि दिमाग की गतिविधियों का एक खास पैटर्न होता है। इसमें शरीर के अलग-अलग हिस्सों को छूने पर दिमाग के अलग-अलग हिस्से सक्रिय होते हैं। इसे ‘सोमैटोटोपिक मैप’ कहा जाता है। मसलन, अंगूठे, तर्जनी और छोटी उंगली को छूने पर दिमाग में अलग-अलग जगहों पर गतिविधि होती है।
अब एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हाथ की कटी नस की सर्जरी के बाद यह नक्शा बदल सकता है। यानी, नस के दोबारा जुड़ने के साथ दिमाग भी अपने काम करने के तरीके में बदलाव कर सकता है। हाथ की नसें दिमाग व रीढ़ की हड्डी से हाथ तक संदेश पहुंचाती हैं। अगर हाथ की कोई बड़ी नस कट जाए, तो सर्जरी के जरिये उसे जोड़ा जा सकता है। इसके बाद नस के नए रेशे (फाइबर) धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इससे हाथ में महसूस करने की क्षमता कुछ हद तक वापस आ सकती है।
हालांकि, नए रेशे हमेशा उसी रास्ते से नहीं जुड़ते, जिस रास्ते पर वे पहले थे। इसलिए, कभी-कभी दिमाग को मिलने वाला संदेश भी बदल सकता है। मसलन, तर्जनी को छूने पर किसी को ऐसा लग सकता है कि स्पर्श दूसरी उंगली पर हुआ है। इसी बदलाव को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने हाथ की नस की सर्जरी करा चुके 21 लोगों के दिमाग के फंक्शनल एमआरआई की तुलना 30 सामान्य लोगों से की।
नतीजे चौंकाने वाले थे। सर्जरी कराने वालों में उंगलियों से जुड़ा दिमाग का नक्शा बदल गया था, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग था। हालांकि, बदलाव का मतलब यह नहीं कि हाथ कम काम करे। नस की चोट के बाद ठीक होने के लिए दिमाग का पुराने नक्शे पर वापस आना जरूरी नहीं है। दिमाग नए तरीके से काम करना सीख सकता है।
इन बदलावों के जरिये यह समझने में मदद मिल सकती है कि नस की चोट के बाद रिकवरी अलग-अलग लोगों में अलग क्यों होती है। इससे दिमाग की खुद को बदलने और नए संबंधों के अनुसार ढालने की क्षमता के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।
भविष्य में दिमाग के नक्शे में होने वाले बदलावों के जरिये यह समझने में मदद मिल सकती है कि नस की चोट के बाद रिकवरी अलग-अलग लोगों में अलग क्यों होती है। इससे दिमाग की खुद को बदलने और नए संबंधों के अनुसार ढालने की क्षमता के बारे में भी अहम जानकारी मिल सकती है।