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मुद्दा: यह आगे बढ़ने का समय है, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता को पीछे छोड़ना जरूरी

Wed, 31 Dec 2025 08:05 AM IST
पवन पांडेय रिचर्ड बोर्गे, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

पीछे मुड़कर देखें, तो युद्धों और अमेरिकी टैरिफ से वैश्विक व्यापार में कुछ अनिश्चितता जरूर पैदा हुई है, पर यह आगे बढ़ने का समय है और दुनिया के देश यह समझ भी रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik
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विस्तार
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वैश्विक व्यापार में बदलाव आ रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के दौर में अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के लिए जो मॉडल बना था, वह अनिश्चित नीति, अविश्वसनीय आधारभूत ढांचे और दुर्लभ मृदा खनिजों जैसी संवेदनशील चीजों की बढ़ती मांग से बदल रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद से मजदूरों की कमी, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीति ने भी दुनिया भर में वस्तुओं की आवाजाही पर असर डाला है। इसने बंदरगाहों के कामकाज, शिपिंग कंटेनरों की स्थिति और व्यापार विस्तार की योजनाओं को भी प्रभावित किया है। कंपनियां अमेरिकी टैरिफ से पैदा हुए व्यापार युद्ध के मौजूदा दौर को प्रबंधित करने के तरीके ढूंढ रही हैं, तो क्या वैश्विक आपूर्ति शृंखला हमेशा के लिए टूट गई है?
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येल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एलेह त्सिविंस्की कहते हैं  यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट के अनुसार, मूल्य के हिसाब से दुनिया का लगभग 70 प्रतिशत व्यापार समुद्री रास्ते से होता है, और इसका लगभग दो-तिहाई हिस्सा कंटेनरों में होता है। कंटेनरों को समझना मतलब वैश्विक व्यापार की संरचना को समझना है। त्सिविंस्की कहते हैं कि मैंने अन्य प्रोफेसरों के साथ मिलकर आपूर्ति शृंखला में बाधा का सूचकांक तैयार किया, जो उत्पाद, कंपनी और क्षेत्रीय स्तर पर बाधाओं का पता लगाता है। 

नतीजों से पता चला कि कोविड के दौरान आपूर्ति में रुकावटें अपने चरम पर थीं, लेकिन तब से कुल मिलाकर कम हो गई हैं, हालांकि वे महामारी से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। जब हम जरूरी सामान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो तस्वीर और भी खराब हो जाती है। दुर्लभ धातुओं जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों की पहचान करने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करके, हमने महत्वपूर्ण आपूर्ति बाधाओं का ब्लू सेंटर इंडेक्स बनाया। यह इंडेक्स दिखाता है कि जहां आम आपूर्ति शृंखला झटकों से जल्दी ठीक हो जाती हैं, वहीं जरूरी आपूर्ति शृंखला पर ज्यादा गंभीर असर पड़ता है और उन्हें स्थिर होने में काफी समय लगता है। 
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आज वैश्वीकरण की यही सबसे बड़ी कमजोरी है। हमने पाया कि अमेरिका की मनमानी टैरिफ नीति के चलते वैश्वीकरण का स्वरूप बदल रहा है। हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें खासकर बड़े झटकों के समय, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला आर्थिक सुरक्षा को परिभाषित करेंगी, न कि उपभोक्ता वस्तुएं। सरकारों और व्यवसायों के लिए चुनौती अब आपूर्ति शृंखला को ज्यादा मजबूत बनाने के बजाय जरूरी वस्तुओं के प्रवाह को सुरक्षित रखने की होगी।

ग्लोबल शिपिंग एसोसिएशन बीआईएमसीओ की पूर्व अध्यक्ष सबरीना चाओ कहती हैं कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अनुसार, इस साल टैरिफ और व्यापार नीति में बढ़ती अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के निर्यात में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। यूरोप में अब भी युद्ध जारी है और लाल सागर इलाके में व्यावसायिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं। जब अमेरिका जैसा देश वैश्विक व्यापार सिद्धांतों को चुनौती देता है और ब्रेटन वुड्स सिस्टम जैसे समझौतों व डब्ल्यूटीओ जैसे संगठनों के इरादे कमजोर होते हैं, तो वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ता है। पर कभी-कभी आगे बढ़ने से पहले पीछे मुड़कर देखना भी लाभप्रद होता है। इस संदर्भ में, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के बीच 2025 में हुए क्षेत्रीय समझौते महत्वपूर्ण हैं, जो दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने के साथ वैश्विक व्यापार को भी एक नया रूप दे रहे हैं। ऐसे में, वैश्विक व्यापार जिस अनिश्चितता से जूझ रहा है, वह ज्यादा लंबे समय तक टिकेगी नहीं।                       
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