द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर शुरू से ही विवादों में है।
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तो क्या ये चल रहा है प्रोपेगेंडा?
इन फिल्मों के ट्रेलर देखकर ऐसा लग रहा है कि हिंदुस्तान में बन रही बॉयोपिक्स मीडियाई प्रोपेगैंडा और सोशल मीडिया के 'फ्रैंकेंस्टीन' फ़ेक न्यूज़ का विस्तार हैं। सरल होकर कहा जाए तो ये बॉयोपिक्स प्रोपेगैंडा और फ़ेक न्यूज़ की खिचड़ी लग रही हैं।
दरअसल, लकीर को छोटी करने के लिए बड़ी लकीर खींचने के बजाय ये आसपास की लकीरों को ही छिपाती हुई या अनदेखी करती हुई दिख रही हैं। वैसे भी बॉलीवुड की बॉयोपिक्स में हीरो को एस्टेब्लिस करने की लिए पहले विलेन को एस्टेब्लिस करने की परंपरा चल पड़ी है। हीरो इसलिए हीरो नहीं है कि वो हीरो है, बल्कि इसलिए है कि सामने एक विलेन है। धोनी को हीरो बनाने के लिए युवराज को विलेन बना दिया जाता है। वर्ल्ड कप फाइनल की उनकी इनिंग को बड़ा करने के लिए गंभीर की इनिंग को छिपा लिया जाता है। ये अर्धसत्य है।
शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे पर बन रही बायोपिक में नवाजुद्दीन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
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मीडिया ये काम सालों से कर रहा है। हिंदुस्तानी सिनेमा ने नया-नया शुरू किया है। हिंदुस्तानी सिनेमा अब तक हिस्टोरिकल ड्रामा के नाम पर काल्पनिक इतिहास बेचता रहा है, अब वो पॉलिटिकल बॉयोपिक्स के नाम पर काल्पनिक वर्तमान बेचेगा, फिर जैसे हम सलीम-अनारकली के प्यार की कसमें खाते हैं वैसे ठाकरे के नायकत्व से गौरवान्वित हुआ करेंगे। प्रोपेगैंडा का उत्कर्ष है ये।
लोग अक्सर कहते हैं कि गांधी ब्रिटिश डायरेक्टर ने क्यों बनाई, किसी हिंदुस्तानी ने क्यों नहीं बनाई? ठाकरे और एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के ट्रेलर देखकर लग रहा है कि नहीं बनाई तो ठीक ही किया।
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