असम में 765 बड़े चाय बागान (टी इस्टेट) और एक लाख से अधिक छोटे-छोटे चाय बागान हैं।
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चाय बागान के संचालन के लिए बैंक का रवैया भी अन्य उद्योगों की तरह नहीं है। असम में 765 बड़े चाय बागान (टी इस्टेट) और एक लाख से अधिक छोटे-छोटे चाय बागान हैं। जिनमें करीब 50 से 60 लाख मजदूर काम करते हैं। इन्हें अभी ब्रह्मपुत्र घाटी में 167 रुपए और बराक घाटी में 150 रुपए दैनिक मजदूरी मिलती है। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में इस मजदूरी को बढ़ाकर 350 रुपए देने का वादा किया था। इसलिए मजदूर संगठन बीच-बीच में मजदूरी बढ़ाने की मांग करते हैं। असम सरकार ने अपने चाय बागानों के लिए पिछले वर्ष 20 फीसदी बोनस देने की घोषणा की थी। उसके बाद सभी बागानों में 20 फीसदी बोनस देने की मांग उठने लगी।
इस संकट के बीच ही जोरहाट जिले के टियोक चाय बागान में मजदूरों ने बागान अस्पताल के चिकित्सक डॉ देबेन दत्त की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि वे घर पर लंच के लिए आए थे। इस घटना के बाद अन्य बागानों में तनाव फैल गया और कई बागानों के चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया है। चिकित्सक की हत्या के खिलाफ असम के सभी चिकित्सकों ने एक दिन की हड़ताल की, जबकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने देव्यापी असहयोग की धमकी दी है।
दबाव में राज्य सरकार ने कुछ अभियुक्तों को गिरफ्तार किया और इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए न्यायिक जांच की घोषणा की है। इसके पहले भी बोनस तथा अन्य विवादों पर बागान के मजदूरों ने अपने बागान के मालिक या प्रबंधकों की हत्या कर दी है। चाय बागानों में प्रबंधन और मजदूर के रिश्ते तनावपूर्ण होना असम के लिए शुभ नहीं है, क्योंकि यह असम में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला उद्योग है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
(लेखक दैनिक पूर्वोदय के संपादक और पूर्वोत्तर मामले के जानकार हैं)
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