यह मेरे जीवन की शुरुआत थी। मैं 17 साल बाद कॉलेज गया था। लेकिन मैंने नासमझी में एक ऐसा कॉलेज चुन लिया, जो स्टैनफोर्ड जितना ही महंगा था। यहां मेरे माता-पिता की सारी कमाई और बचत कॉलेज की ट्यूशन फीस पर ही खर्च हो जा रही थी। छह महीने बाद मुझे इसमें कोई सार नजर नहीं आया। मुझे नहीं पता था कि मैं अपने जीवन में क्या करना चाहता हूं। मुझे यह भी नहीं पता था कि कॉलेज मुझे यह समझने में कैसे मदद करेगा। कॉलेज का भारी-भरकम खर्च और माता-पिता पर आर्थिक बोझ को देखते हुए आखिरकार मैंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला कर लिया। मगर मुझे इसका पक्का भरोसा था कि सब ठीक हो जाएगा। हालांकि उस समय यह सब बहुत डरावना भी लग रहा था। पर आज मैं जब पीछे मुड़ कर देखता हूं, तो पाता हूं कि यह फैसला मेरे द्वारा लिए गए अब तक के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था। जिस क्षण मैंने पढ़ाई छोड़ी, मैंने उन्हीं कक्षाओं में जाना शुरू कर दिया, जिनमें मुझे दिलचस्पी थी।
सामान्य कक्षाओं से मेरा पिंड छूट गया
मैं दोस्तों के कमरों में फर्श पर ही सो जाता था। कोक की बोतलें लौटा कर पांच सेंट जमा करता था, ताकि उससे खाना खरीद सकूं। अपनी जिज्ञासा और अंतर्ज्ञान का अनुसरण करके मैंने जो कुछ भी पाया, वह बाद में अमूल्य साबित हुआ। इसका मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। उस समय रीड कॉलेज में शायद देश में सबसे अच्छी सुलेख शिक्षा दी जाती थी। मैंने पढ़ाई छोड़ दी थी और सामान्य कक्षाओं से मेरा पिंड छूट गया था। इसलिए मैंने सुलेख कक्षा में जाने का फैसला किया। यहां मैंने सेरिफ और सैंस सेरिफ टाइपफेस के बारे में सीखा। इसी से यह जाना कि किस तरह से टाइपोग्राफी बेहतरीन बनती है। यह सब मुझे बहुत दिलचस्प लगा। यह खूबसूरत, ऐतिहासिक और कलात्मक रूप से सूक्ष्म था, जिसे विज्ञान नहीं पकड़ सकता। यह सब सीखते हुए मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी कि आज जो मैं कर रहा हूं, वह जीवन में मेरे कभी काम भी आएगा या नहीं। बस अच्छा लगा, इसलिए सीख लिया।
आपको किसी चीज पर भरोसा करना होगा
लेकिन 10 साल बाद, जब हम पहला मैकिनटोश कंप्यूटर डिजाइन कर रहे थे, तो यह सब मुझे याद आया और हमने इसे मैक में डिजाइन किया। खूबसूरत टाइपोग्राफी वाला यह पहला कंप्यूटर था। आज मैं सोचता हूं कि अगर मैंने कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी होती, तो कभी उस सुलेख कक्षा में नहीं जाता और कंप्यूटरों में वह अद्भुत टाइपोग्राफी नहीं होती, जो आज उनमें है। इसलिए आपको भरोसा रखना होगा कि आपके भविष्य में बिंदु किसी न किसी तरह से जुड़ते ही जाएंगे। आपको किसी चीज पर भरोसा करना होगा, अपने अंतर्ज्ञान, भाग्य, जीवन, कर्म, या जो भी हो, क्योंकि यह विश्वास करना कि आगे चल कर ये सभी बिंदु आपस में जुड़ जाएंगे, जो आपको अपने दिल की बात मानने का आत्मविश्वास देंगे, तब भी, जब वह आपको परखे हुए रास्ते से भटका दें। और यही सब कुछ बदल देगा। इसलिए मैं फिर कहता हूं कि आप आगे देख कर बिंदुओं को नहीं जोड़ सकते, आप उन्हें केवल पीछे देख कर ही जोड़ सकते हैं।
सूत्र: खुद से संवाद करें
हमेशा खुद पर भरोसा रखें। बाहर जाकर किसी सफल व्यक्तित्व की तलाश न करें और न ही उसकी नकल करने की कोशिश करें। अपने आपसे ऐसे बात करें, जैसे आप किसी ऐसे व्यक्ति से करते हैं, जिसे आप प्यार करते हैं। हमेशा याद रखें, सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है। आपको खुद पर विश्वास रखना होगा और कभी हार नहीं माननी होगी।