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Taimur Lang: इतिहास में एक काला अध्याय था तैमूर लंग, दिल्ली में बना दी थी कटे सिरों की मीनार

सार

अपनी शारीरिक दुर्बलता के बावजूद इस क्रूर शासक ने अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और सैन्य कौशल के दम पर मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में अपने विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
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तैमूर लंग - फोटो : Freepik AI
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विस्तार
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बात साल 1363 की है। तैमूर नाम का एक शख्स भेड़ के झूंड को लूटने की कोशिश कर रहा था। इस लड़ाई में उसके दाहिने पैर और दाहिने हाथ में तीर लग जाते हैं। इस चोट के कारण वह अपाहिज हो गया। अपाहिज होने की वजह से लोग उसे तैमूर ए लंग (लंगड़ा तैमूर) कहने लगे। हम बात कर रहे हैं 1336-1405 के बीच हुए क्रूर शासक तैमूर ए लंग की। अपनी शारीरिक दुर्बलता के बावजूद इस क्रूर शासक ने अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और सैन्य कौशल के दम पर मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में अपने विशाल साम्राज्य की स्थापना की। अपनी क्रूरता के बल पर इसने अपनी सत्ता को मजबूत किया। 

1336 में समरकंद में हुआ जन्म

तैमूर लंग का जन्म 1336 में समरकंद में हुआ था। यह इलाका अब उज्बेकिस्तान के नाम से जाना जाता है। तैमूर लंग एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्मा था। वह एक मामूली चोर था। तैमूर उस समय मध्य एशिया के मैदानों और पहाड़ी इलाकों में भेड़ों की चोरी करता था।

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तैमूर दिमाग में काफी तेज और कुशल रणनीतिज्ञ था। वह जब भी किसी दूसरी जनजाति या गांव पर हमला करता और वहां से जो कुछ भी जीतता उसे अपने लोगों में बांट देता। इससे हुआ यह कि इसने अपने समुदाय के लोगों का भरोसा जीत लिया। इस कारण कई लोग इसके साथ जुड़ गए। देखते ही देखते तैमूर लंग ने अपनी कुशलता और तेज तर्रार दिमाग से एक बड़ी सेना बना ली। 

तैमूर के सैन्य अभियान

इसके बाद तैमूर बड़े स्तर पर सैन्य अभियानों की शुरुआत करता है। सबसे पहले उसने पर्सिया जीता, फिर ईराक, खुरासान, कुर्दिस्तान, मामलुक, इजिप्ट। इन सब के बाद इसने भारत पर नजर गड़ाई, उस समय नसीरुद्दीन महमूद का शासन भारत में हुआ करता था। नसीरुद्दीन महमूद तुगलक वंश के शासक थे।

दिल्ली सल्तनत का कमजोर होना

हालांकि, फिरोजशाह तुगलत की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक अस्थिरता आ गई थी। फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु के 10 सालों के भीतर दिल्ली में पांच बादशाहों, उनके बेटे और उनके पोतों ने राज किया था। इससे दिल्ली की राजनीतिक शक्ति काफी कमोजर हो गई थी। यह वह समय था जब कोई भी बाहरी आक्रांता आसानी से दिल्ली पर आक्रमण कर सकता था, उस समय भारत अपने अकूत खजाने, संपत्ति और संसाधनों के लिए जाना जाता था। तैमूर लंग की नजर इसी पर थी। इसी बीच साल 1398 में तैमूर लंग ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया।

तैमूर का दिल्ली पर आक्रमण

कहा जाता है कि दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए समरकंद में करीब 90 हजार सैनिक इकट्ठे हुए थे। इतनी बड़ी मात्रा में सैनिकों के इकट्ठा होने से पूरे शहर में धूल ही धूल हो गई थी। समरकंद से दिल्ली तक पहुंचना कोई आसान काम नहीं था। रास्ते में हिंदुकुश पहाड़ियों की दुर्गम चढ़ाई थी। यही नहीं रास्ते में कई नदियां, पथरीले रास्ते और रेगिस्तान भी थे, जहां से होकर उन्हें गुजरना था। इतनी बड़ी सेना और उसके दस्तों के साथ यह विषम सफर करना कोई आसान काम नहीं था। 

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तैमूर लंग - फोटो : Freepik AI
हालांकि, अपने 90 हजार सैनिकों और दस्तों के साथ तैमूर ने समरकंद से दिल्ली पर चढ़ाई कर दी। रास्ता आसान नहीं था, हिंदुकुश की पहाड़ियों की चढ़ाई करते समय उसके कई घोड़ों ने रास्तों में ही जान गवा दी। तैमूर लंग ने इस दौरान रास्ते में करीब 1 लाख हिंदू लोगों को बंदी बनाया। दिल्ली पर आक्रमण करने से पहले उसने अपना शिविर लोनी में लगाया।

1 लाख हिंदुओं की निर्मम हत्या करवाई

तैमूर की सेना के साथ करीब 1 लाख हिंदू बंदी भी थे। तैमूर को डर था कि अगर वह मल्लू खां के सैनिकों पर हमला करता है तो उसके साथ चल रहे 1 लाख हिंदू कैदी उनका हौसला बढ़ाएंगे या उसके खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं। इस डर से तैमूर ने इन सभी बंदियों को मारने का आदेश दे दिया। इसके बाद बड़ी क्रूरता के साथ करीब 1 लाख हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया गया। डेविड प्राइस ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया है कि मानवता के इतिहास में इस तरह की क्रूरता का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। 

इसके बाद तैमूर की सेना दिल्ली पर आक्रमण कर देती है। तैमूर के आक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली के 10 हजार घुड़सवार, करीब 40 हजार सैनिक, 120 हाथी तैयार थे। अंततः युद्ध में तैमूर लंग की सेना जीत जाती है। इस जीत के बाद उसकी क्रूर सेना ने पूरे शहर में भीषण नरसंहार किया। सड़कों पर लाशों के ढेर लग गए थे, घरों में खून की नदियां बह रही थीं। इस युद्ध में तैमूर की सेना ने हजारों लोगों को मारकर शहरों को लूटा। क्या इंसान, क्या बच्चे क्या बूढ़े किसी को नहीं छोड़ा गया।

इस आक्रमण के चलते भारी तबाही मची और पूरे शहर की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई। इस दौरान तैमूर खूब सारी संपत्ति, खजाने और संसाधनों की लूट करके समरकंद वापस चला गया। तैमूर लंग का दिल्ली पर आक्रमणा भरतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण और दुखद अध्याय है। कहा जाता है कि इस हमले से उबरने में दिल्ली को करीब 100 साल लग गए।

कई देशों पर जीत हासिल करने के बाद तैमूर लंग चीन पर आक्रमण करने की योजना बनाई। हालांकि, इस अभियान को पूरा करते समय वह काफी बीमार हो गया। साल 1405 में इसी बीमारी की वजह से उसकी मृत्यु भी हुई। मृत्यु के बाद तैमूर लंग को समरकंद में दफनाया गया। इस तरह इस क्रूर शासक का अंत हुआ। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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