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दुनिया का पहला कैशलेस अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की राह पर स्वीडन

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स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की कगार पर है। - फोटो : Pixabay
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ज़रा सोचिए अगर एक कप चाय के लिए डेबिट/ क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना पड़े और एक लीटर दूध के लिए भी कार्ड पेमेंट अनिवार्य हो जाए तो आप पर क्या गुज़रेगी। आप उन ख़ुल्ले पैसों का क्या करेंगे जिनसे रोज़ ही ये चीज़ें ख़रीदी जाती हैं। लेकिन स्वीडन में यह सामान्य है। संभव है कि कार्ड से भुगतान नहीं करने के कारण एक छोटा दुकानदार भी आपको ये सब चीज़ें देने से मना कर दें। यही वजह है कि यहां लोगों के बटुए में नोट या सिक्के शायद हीं हो। लेकिन कार्ड्स की भरमार ज़रूर दिखेगी।

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स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की कगार पर है।  बहुत जल्द यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ई-मनी पर चलने लगेगी। यानी नक़द में लेन देन पूरी तरह बंद हो जाएगा। हालांकि सरकारी कामकाज व दूसरी आर्थिक ज़रूरतों के परिप्रेक्ष्य में स्वीडिश नोट छपते रहेंगे।लेकिन आम आदमी का इससे कोई लेना-देना नहीं रहेगा। स्वीडन की मुद्रा का आधिकारिक नाम स्वीडिश क्रोना है।

स्वीडन में महज़ 13-15 फ़ीसदी नक़द में लेन देन होता है। - फोटो : Pixabay
स्वीडन का कुल लेन-देन 80 फीसदी से ज्यादा कैशलेस हो चुका है
यहां के आंकड़ें बताते हैं कि 2023 में स्वीडन दुनिया की पहली कैशलेस सोसाइटी बन जाएगी। तब यहां नक़द की स्वीकार्यता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। फ़िलहाल स्वीडन में महज़ 13-15 फ़ीसदी नक़द में लेन देन होता है। जबकि डेनमार्क में 23 फ़ीसदी और यूके में 34 फ़ीसदी नक़द का चलन है।

दावा है कि स्वीडन में 80% से अधिक रिटेल ट्रांजेक्शन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होते हैं।आपको स्वीडन में छोटे बड़े कई ऐसे स्टोर दिख जायेंगे जहां नक़द भुगतान की मनाही वाले बोर्ड लगे हैं। 99% दुकानदार कार्ड पेमेंट को स्वीकार करते हैं। यहां के बैंकिंग आंकड़ों की माने तो स्वीडन के कुल लेन-देन का 80% से अधिक कैशलेस हो चुका है।  

नई पीढ़ी को कैशलेस अर्थव्यवस्था के समर्थन के लिए किया जा रहा है तैयार
इसके कारण में जाएंगे तो पता चलेगा कि स्वीडन दुनिया के सर्वाधिक तकनीक संपन्न देशों में से एक है। जबकि अपनी तकनीकी क्षमता को और संपन्न बनाने के लिए लगातार प्रयासरत भी है। साथ ही वह नई पीढ़ी और आनेवाली पीढ़ी को कैशलेस अर्थव्यस्था के समर्थन के लिए तैयार कर रहा है।

ताकि नक़दी लेन- देन सर्वसम्मति से बीते दिनों की बात रह जाए।अगर ऐसा होता है तो यहां की अर्थव्यवस्था में काली कमाई या ब्लैक मार्केटिंग की संभावना क़रीब- क़रीब ख़त्म हो जाएगी। सरकार और आम आदमी के पाई-पाई का हिसाब पारदर्शी रहेगा।

स्वीडिश बैंकनोटों का इतिहास
आपको बता दूं कि यूरोप में पहली दफ़ा बैंक नोट का चलन भी स्वीडन में ही शुरू हुआ था। यह बात 1661 की है। और अगले तीन-चार सालों में यह दुनिया का पहला कैशलेस देश बन जाएगा। यानी यहां की पूरी अर्थव्यवस्था डिजीटल आधारित हो जाएगी। यहां नोटों की शुरूआत से नोटबंदी तक की यात्रा क़रीब 362 सालों की रहने की उम्मीद है। हालांकि दक्षिण यूरोप इस मामले में अभी काफ़ी पीछे है।  ग्रीस में आज भी 88 फीसदी नक़द लेन -देन होता है। नक़द साथ नहीं होने कारण यहां कई जगहों पर सामान मिलना मुश्किल हो सकता है।

जबकि स्पेन में 87% और इटली में 86% नक़दी कारोबार है। ये देश फ़िलहाल कैशलेस सोसाइटी बनाने को लेकर बहुत ज़्यादा सक्रिय भी नहीं है।
 

ज़्यादातर बच्चों का जवाब होगा कि उन्होंने आजतक सिक्के या नोटों को क़रीब से नहीं देखा है या छूकर महसूस नहीं किया - फोटो : Pixabay
शायद ही किसी ने देखी हो स्वीडिश नोटों की गड्डी
आपको ज़्यादातर स्वीडिश ऐसे मिलेंगे जिन्होंने स्वीडिश नोटों की गड्डी, या एकमुश्त मोटी रक़म नहीं देखी होगी। नई पीढ़ी अपने होश संभालने तक में पचास- सौ स्वीडिश क्रोना के नोट शायद ही देखे हो। स्कूल जाने वाले बच्चों से स्वीडिश नोट या सिक्के की रूपरेखा के बारे में पूछेंगे तो वे शायद ही बता सके।

ज़्यादातर बच्चों का जवाब होगा कि उन्होंने आजतक सिक्के या नोटों को क़रीब से नहीं देखा है या छूकर महसूस नहीं किया है। नक़दी लेन- देन के हतोत्साहन को लेकर माहौल ऐसा है कि आने वाले समय में संभव है कि वे स्वीडिश नोटों व सिक्कों को फ़ोटो, टीवी कार्यक्रमों या फिर संग्रहालयों में ही देख सके। उन्हें यह देखकर आश्चर्य भी हो सकता है कि कैसे किसी देश में नक़द लेन- देन के ज़रिए चीज़ों की ख़रीद-बिक्री हो रही है।


कम उम्र मे ही बच्चों को मिल जाता है डेबिट कार्ड
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि स्वीडिश बैंक अभिभावकों की अनुमति से काफ़ी कम उम्र के बच्चों के लिए भी डेबिट कार्ड जारी करते हैं। महज़ सात साल की उम्र में ही बच्चे अपने ख़ुद के डेबिट कार्ड के हक़दार हो जाते हैं। ताकि ज़रूरत के मुताबिक़ तय सीमा में वे ख़ुद से रक़म ख़र्च कर सके। और इसके लिए उन्हें नक़दी की कोई ज़रूरत भी नहीं पड़े। इससे उनके ख़र्च का ब्यौरा हमेशा अभिभावकों की जानकारी में रहता है। यह व्यवस्था यहां के बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने और आत्मनिर्भर बनाने की सीढ़ी का काम भी करता है। साथ ही बच्चें कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए प्रेरित होते हैं। यहां सरकार और बैंक दोनों ही अपने नागरिकों को कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए तरह - तरह से प्रेरित करते हैं।  
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Sweden railway
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में नहीं होता नक़द इस्तेमाल
अगर आप स्टॉकहोम में पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या कैब बुक करके कहीं जा रहे हैं तो जेब में रक़म होने की ज़रूरत नहीं। आपके बैंक खाते (डेबिट/ क्रेडिट कार्ड) में रक़म होनी चाहिए क्योंकि यहां की परिवहन व्यवस्था में नक़द टिकट ख़रीदने की कोई व्यवस्था नहीं है।  यहां प्रीपेड टिकट , मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए भुगतान, या फिर कार्ड स्वीपिंग मशीन के ज़रिए भुगतान होता है। यहाँ के ज़्यादातर लोग मासिक ट्रेवेल्स कार्ड को ख़रीदना ज़्यादा किफ़ायती और समय की बचत के लिए बेहतर तरीक़ा मानते हैं।


स्विस एप्लिकेशन पेमेंट का सबसे लोकप्रिय, आसान और विश्वसनीय ज़रिया
स्वीडन के बाज़ार में स्विस एक बड़ा ही लोकप्रिय मोबाइल पेमेंट एप्लिकेशन है जिसके ज़रिये बिना किसी बाधा के चंद सेकेंड में स्वीडन में रक़म एक खाते से दूसरे खाते में पहुंच जाती है। 2012 में यहां के बड़ें बैंकों के ज़रिए शुरू किये गये इस पेमेंट व्यवस्था को विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। इसका विस्तार दूसरे नॉर्डिक देशों में भी करने की योजना बनाई जा रही है ताकि देश से बाहर भी पारदर्शी तरीक़े से रक़म लेन देन आसान हो जाए। स्विस का इस्तेमाल यहाँ की आधा से ज़्यादा आबादी करती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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