सुशांत सिंह राजपूत मामले में रिया चक्रवर्ती से चल रही पूछताछ ने उस दिन नया मोड़ ले लिया जब उसने एक साथ बॉलीवुड के कई सितारों की नींद उड़ा दी और या यूं कहें कि उसने खुद पर चल रही कार्रवाई का बदला उसका साथ नहीं देने वालों से ले लिया। अभी तो ऐसा लग रहा है मानो हिंदी सिनेमा की एक मल्टीस्टारर सस्पेंस मूवी चल रही है, जिसका अंत क्या होगा, उसकी जिज्ञासा और रोमांच सबको है।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से शुरू हुई कहानी रिया चक्रव्रती से होती हुई न जाने कितने स्टार्स की वास्तविकता से रूबरू करवायेगी। और वैसे भी क्लाइमैक्स का इंतजार तो काफी लंबा करना पड़ सकता है। हालांकि सोचने वाली बात तो ये है कि जो सरकार या लोग सुशांत केस की जांच के विरुद्ध थे, वो आज चुप भी है और मुंह भी छिपा रहे है, क्योंकि सच बाहर आते-आते पता नहीं और कितने चेहरे बेनकाब होंगे।
जब से सीबीआई को इसका जिम्मा दिया गया है, केस में एक नया मोड़ आ गया है या फिर कहें कि मोड़ लाया गया है। दोनो ही मामलों में कार्रवाई का परिणाम भविष्य में चौंकाने वाला ही होगा है और उसके लिए हमें तैयार भी रहना चाहिए। जिन अदाकाराओं को देश के एक विशेष आयु वर्ग की जनता अपना आदर्श मानती है, आज उनके इस तरह से आपराधिक कटघरे में आने से लोगों की भावनाएं कहीं ना कहीं आहत जरूर हुई है।
हकीकत यह है कि जिनको हम आदर्श मानते हैं, वास्तव में हम उनको नहीं उनके किरदार और अभिनय को पसंद करते है। निजी जिंदगी में वो कैसे हैं, क्या यह असलियत एक आम आदमी को पता भी होती है! यदि उनपर लगे आरोप सच निकलते हैं तो आम नागरिक होने के नाते हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को समाज से निष्कासित करें और किसी भी तरह का सपोर्ट ना करें। उनको सपोर्ट करना मतलब उनकी गलत आदतों को स्वीकार करना।
इसलिए हमारी युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वालों का बहिष्कार करना हमारा कर्तव्य भी है और नैतिक दायित्व भी। जैसे एक व्यक्ति की बुरी आदतों की जिम्मेदारी उसके पूरे परिवार पर थोप दी जाती है, वैसे ही इन लोगों की गलती पर पूरे देश और समाज पर अंगुली उठेगी ही। ऐसे में हमें भी अपनी सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है।
अब कौन बड़ा है कौन छोटा, कौन प्रसिद्ध है, कौन नहीं... इन सबके बीच फैसला ना लिया जाए, बल्कि सही और गलत के बीच में फैसला लेना होग। इन सेलिब्रिटीज को भाव ना देकर कुछ समय अकेला छोड़ दे तो ज्यादा बेहतर है। हो सकता है, ऐसे उनको अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास हो। हम मानें या ना मानें इनका प्रभाव युवाओं पर बहुत ज्यादा है। इस प्रभाव को गलत दिशा दिखाने वालों को सही आइना दिखाना भी हम सब की जिम्मेदारी है।
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