डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल समाप्त जरूर हो गया लेकिन पश्चिम बंगाल के 5 महत्वपूर्ण मामलों का क्या हुआ? जिसकी सुनवाई जस्टिस चंद्रचूड़ की सिंगल और डिवीजन बेंच में चल रही थीं।
जस्टिस और चीफ जस्टिस की हैसियत से कई महत्वपूर्ण फैसले देने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर' 24 को समाप्त हो गया। डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल समाप्त जरूर हो गया लेकिन पश्चिम बंगाल के 5 महत्वपूर्ण मामलों का क्या हुआ? जिसकी सुनवाई जस्टिस चंद्रचूड़ की सिंगल और डिवीजन बेंच में चल रही थीं। पूरे राज्य की निगाहें जिस पर टिकी हुई हैं। कौन से हैं वह 5 महत्वपूर्ण मामले और क्या है उनकी मौजूदा स्थिति व प्रगति इस पर एक नजर डालते हैं।
पश्चिम बंगाल के 5 महत्वपूर्ण मामलों में फिलहाल सबसे ताजा व सबसे चर्चित मामला है, आरजी कर हॉस्पिटल एंड कॉलेज में जूनियर डॉक्टर का रेप और मर्डर। चीफ जस्टिस की हैसियत से डीवी चंद्रचूड़ ने इस मामले की 18 अगस्त'22 को स्वतः संज्ञान लेते हुए 20 अगस्त'22 को पहली सुनवाई किए थे। हर सुनवाई में सीबीआई स्टेटस रिपोर्ट जमा करती थी और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की टिप्पणी ध्यान आकर्षित करती थी। पहला स्टेटस रिपोर्ट देखकर ही काफी चिंतित व विचलित हुए थे। इन्होंने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी दी।
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जैसे, विकिपीडिया और सोशल मीडिया से पीड़िता-मृतका का तस्वीर, नाम और परिचय तत्काल हटाये जाने का सख्त निर्देश दिए। अस्पतालों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी कैमरा निर्धारित समयसीमा के अंदर पर्याप्त संख्या में लगाने का निर्देश दिए। राज्य सरकार महिला स्वास्थ्य कर्मियों की रात्रि सेवा पर रोक लगाने की निर्देश दी थी, उस आदेश को तत्काल रदद् करने का निर्देश दिए। सिविक वालंटियर्स पर राज्य सरकार से जवाब मांगे। इनकी नियुक्ति कैसे व किस आधार पर होती है? कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारी की नियुक्ति संवेदनशील स्थान पर क्यों होती है? इससे संबंधित कुल पांच सवालों का जवाब मांगे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के द्वारा आखिरी सुनवाई 7 नवंबर के दिन इस विषय की कोई जानकारी सामने नहीं आई। अगली सुनवाई 10 दिसंबर'22 को होने की संभावना है।
ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द मामलापश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी 12 लाख से अधिक ओबीसी सर्टिफिकेट को कलकत्ता हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। लिहाजा नौकरी व सुविधा प्राप्त लोगों का भविष्य अधर में लटक गया। राज्य सरकार कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के बेंच में 18 जून'22 को पहली सुनवाई हुई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब जरूर की।
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कौन लोग ओबीसी में हैं? सरकार कैसे तय करती है? किस आधार पर ओबीसी सर्टिफिकेट देती है? ओबीसी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का निर्देश दी। इस मामले में कुछ खास तेजी या प्रगति देखने को नहीं मिली। वकीलों ने 7 नवंबर को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से इस प्रसंग पर जरूर सवाल पूछा था। इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर'22 को होने की संभावना है।26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति रद्द
कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दिये गए 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने साल 2016 में की गई पूरी नियुक्ति प्रकिया को ही रद्द घोषित कर दिया। साथ ही शिक्षकों को प्राप्त वेतन लौटाने का निर्देश दिया और राज्य सरकार से इस पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
राज्य शिक्षा दफ्तर, स्कूल सर्विस कमीशन, माध्यमिक शिक्षा परिषद और इसके बाद नौकरी गंवाने वालों की अच्छी खासी संख्या ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में 24 जुलाई को पहली सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी होने तक स्थगनादेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ही 26 हजार शिक्षकों का भविष्य निर्भर करता है। ऐसे में यह शिक्षक आशंकित और आतंकित हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर'22 को होने की संभावना है।राज्यपाल के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप
यह मामला बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप से जुड़ा है। राज्यपाल पर राजभवन की ही एक महिला संविदा कर्मचारी ने छेड़छाड़ का आरोप कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में लगाया था, लेकिन संवैधानिक प्रावधान के चलते उन पर कोई केस दर्ज नहीं हुआ। (संविधान का अनुच्छेद 361 प्रावधान राज्यों के राज्यपालों और राष्ट्रपति को किसी भी तरह के आपराधिक मुकदमे से पूरी तरह की छूट देता है) इसके बाद उक्त महिला कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जिसमें राज्यपाल को छूट देने वाले संविधान के अनुच्छेद 361 की न्यायिक जांच और विशेष दिशा-निर्देश देने की मांग की।
19 जुलाई'22 को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में इस मामले की पहली और आखिरी सुनवाई हुई। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से मदद मांगी साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार को भी नोटिस जारी किया, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल राजभवन की महिला कर्मचारी से कहा है कि वह अपनी याचिका में केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाए, साथ ही सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 361 की रूपरेखा की जांच करने के लिए तैयार हो गया. हालांकि 19 जुलाई को हुई एकमात्र सुनवाई के बाद इस मामले की ताजा स्टेटस रिपोर्ट की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है न ही अगली सुनवाई की कोई तिथि निश्चित है।मेडिकल कॉलेज नियुक्ति मामला
मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति मामला काफी सुर्खियों में रहा था। दो जजों की लड़ाई ने इस मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा दिया। जनवरी'22 में जस्टिस अभिजीत गांगुली (बीजेपी के मौजूदा लोकसभा सांसद) ने मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति को रद्द कर सीबीआई जांच का आदेश दिया था। कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमेन सेन की डिवीज़न बेंच ने जस्टिस अभिजीत गांगुली की सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर दिया।
जस्टिस गांगुली डिवीज़न बेंच के खिलाफ कई सारे अभियोग व आरोप लगाते हुए फैसले को त्रुटिहीन बताया और अपने फैसले पर अडिग रहे। हाईकोर्ट में इस बेनजीर स्थिति को देखते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 27 जनवरी'22 को स्वतः संज्ञान लेते हुए शनिवार छुट्टी के दिन 29 जनवरी'22 को सुनवाई किए।
मेडिकल में नियुक्ति के सारे मामले कलकत्ता हाई कोर्ट से हटाए जाने के साथ ही काफी तीखी टिप्पणी किये. सिंगल और डिवीज़न बेंच के इस लड़ाई को अच्छी निगाह से नहीं देखा जा रहा है. इसके अतिरिक्त और कुछ कहने से हाई कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचेगी. दो जजों की लड़ाई में उलझे इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर'22 को होने की संभावना है।
बहरहाल, यह पांच महत्वपूर्ण मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं जिनकी सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में हो रही थी। इसमें दो मामले ऐसे हैं जिसे उन्होंने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी। आरजी कर रेप एंड मर्डर कांड और मेडिकल कॉलेज नियुक्ति मामला। नए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने दायित्व संभाल लिया है और इनका कार्यकाल 1 मई 2025 तक है. छह महीने कुछ दिन के इस कार्यकाल में कुछ मामलों का फैसला आ पायेगा क्या? यह देखने वाली बात होगी।विज्ञापन
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.