स्वीडन के लोग कहते हैं कि कोरोनावायरस से लड़ना केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों से भी इसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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आइसोलेशन में रहने वालों का अकेलापन दूर करने के लिए भी मददगार ग्रुप
कोरोनावायरस से बचने के लिए बुजुर्गों के घर से कम बाहर निकलने की सलाह और आईसोलेशन की वजह से मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इसलिए ग्रुप के लोग उस व्यक्ति से फ़ोन,एसएमएस या चैट के ज़रिए बातें करते हैं। साथ ही उनकी ज़रूरतें पूरी करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनका मानना है कि संकट की इस घड़ी में लोगों का सहारा बनना उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाए रखना भी ज़रूरी है। समाज में इस तरह के प्रयास ज़रूरी हैं।
स्वीडन के लोग कहते हैं कि कोरोनावायरस से लड़ना केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों से भी इसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसलिए यह ज़रूरी है कि पब्लिक हेल्थ एजेंसी की बातों को गंभीरता से लिया जाए। एजेंसी ने बुजुर्ग, अस्वस्थ, कम रोगप्रतिरोधक क्षमता वाले लोग व एलर्जी से ग्रसित लोगों को कम से कम बाहर निकलने की सलाह दी है। आपको बता दूं कि यूएनडीपी के मुताबिक़ स्वीडन में लोगों की औसत आयु 82.7 वर्ष है, इसलिए यहां बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता ज़्यादा है।
घर में बंद /आइसोलेशन में रहने वालों की कैसे होती है मदद
ऐसे लोगों के लिए ऑनलाइन डिलीवरी का विकल्प सर्वोपरि है। लेकिन मांग अधिक होने कि वजह से ज़रूरतमंदों तक समय पर सामान पहुंचने में दिक़्क़त आ रही है। इस पर गौर करते हुए मददगार लोगों ने सोशल नेटवर्किंग का सहारा लेकर उनतक पहुंचने की कोशिश शुरू की है। जबकि कुछ लोग अपनी सोसाइटी, बिल्डिंग में ज़रूरतमंद की पहचान कर उन्हें मदद दे रहे हैं। उन्होंने इस बाबत लिफ़्ट व नोटिस बोर्ड पर मदद देने के प्रस्ताव को चिपका दिया है, जिसपर मदद करने वाले का नाम, ईमेल और बैंक खाते का ब्यौरा होता है। ताकि कोई उनसे सामान मंगाकर उन्हें ऑनलाइन भुगतान कर सकता है।
मसलन अगर किसी को खाना व घर के दूसरे ज़रूरी सामानों को मंगवाना है तो वो एसएमएस के ज़रिए या फॉर्म भरकर अपनी ज़रूरत को बता सकता है। ज़रूरत की चीजों को घर के दरवाज़े पर छोड़ दिया जाएगा और आपूर्ति के बारे में फ़ोन से सूचना दे दी जाएगी। सामान मिलते ही मंगाने वाला इसका भुगतान कर देगा।
वहीं कुछ लोगों ने इससे किए एक फ़ॉर्म भी तैयार कर लिया है जिसे भरकर ज़रूरत बताई जा सकती है।
इस तरह उन्हें घर से बाहर निकलने की ज़रूरत भी नहीं और सामान उपलब्ध कराने वाले को भी संक्रमण का ख़तरा काफ़ी कम रहता है। चूंकि स्वीडन में विस्थापित, प्रवासी और राजनीतिक शरण लिए लोग भी बड़ी संख्या में हैं इसलिए तमाम विदेशी भाषाओं में अनुवाद कर इस तरह की मदद के प्रस्ताव लोगों कर पहुंचाएं जा रहे हैं। बुजुर्गों और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आ रहे युवा समूह। अलग-अलग भाषाओं में इसतरह के फ़ॉर्म बनाकर हो रही है मदद।
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