इन्सान का मस्तिष्क जिस भी वस्तु की कल्पना कर सकता है और जिस पर विश्वास कर सकता है, उसे वह निश्चित रूप से प्राप्त भी कर सकता है। यह कोई साधारण दर्शन नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का वह अटल सत्य है, जिसे मैंने दुनिया के सबसे सफलतम व्यक्तियों के जीवन का विश्लेषण करके सीखा है। सफलता की यात्रा किसी बाहरी संयोग या भाग्य के खेल से शुरू नहीं होती, बल्कि इसकी नींव आपके मन के उस गहरे कोने में रखी जाती है, जहां 'विचार' जन्म लेते हैं। जब आप एक निश्चित लक्ष्य को अपने मन में धारण कर लेते हैं, तो वह विचार एक चुंबकीय शक्ति बन जाता है, जो आपके जीवन में उन परिस्थितियों, साधनों और लोगों को आकर्षित करने लगता है, जो उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य हैं। परंतु याद रहे, केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इच्छा तो हर कोई करता है, लेकिन वह तब तक फलीभूत नहीं होती, जब तक वह एक 'ज्वलंत इच्छा' में न बदल जाए।
यह ज्वलंत इच्छा ही वह ईंधन है, जो आपके संकल्प को अडिग बनाए रखती है और आपको तब भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, जब पूरी दुनिया आपके खिलाफ खड़ी हो। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व है 'प्रगाढ़ विश्वास', क्योंकि विश्वास ही वह रसायन है, जो आपके सामान्य विचार को आध्यात्मिक शक्ति में बदल देता है। यदि आप अपनी क्षमताओं पर संदेह करते हैं, तो आप अनजाने में अपनी विफलता के बीज बो रहे होते हैं, क्योंकि आपका अवचेतन मन उन्हीं निर्देशों का पालन करता है, जो आप उसे प्रबल भावना के साथ देते हैं। इसीलिए, अपने मन को जीत के दृश्यों से भर दें और स्वयं को उस अवस्था में देखें, जैसे आप पहले ही अपना लक्ष्य प्राप्त कर चुके हों।
जब विचार और विश्वास का यह संगम होता है, तो 'आत्म-सुझाव' की शक्ति काम करने लगती है, जो आपके मस्तिष्क की प्रोग्रामिंग को बदल देती है। यह बदली हुई मानसिक स्थिति आपको निरंतर कर्म करने के लिए प्रेरित करती है, जहां 'अस्थायी असफलता' आपको रोकने के बजाय एक नए सबक के रूप में दिखाई देने लगती है। वास्तव में, हर असफलता अपने साथ उसी के समान या उससे भी बड़े लाभ का बीज लेकर आती है, बशर्ते आप हार मानकर मैदान न छोड़ें।
महान उपलब्धि के लिए आपको अपने विचारों को एक योजनाबद्ध क्रियान्वयन में बदलना होगा। जब दो या दो से अधिक मस्तिष्क एक ही निश्चित उद्देश्य के लिए सद्भाव के साथ मिलते हैं, तो वहां एक तीसरी अदृश्य शक्ति का जन्म होता है, जो मानवीय सीमाओं से परे होती है। यह समझना जरूरी है कि सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रक्रिया है, जो स्पष्ट लक्ष्य, अटूट विश्वास, निरंतर प्रयास और सकारात्मक मानसिकता के संयोजन से जन्म लेती है, और जो व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार लेता है, वह न केवल अपने सपनों को साकार करता है, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। (थिंक एंड ग्रो रिच के अनूदित अंश)
लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें
असफलता हर किसी के जीवन में आती है, इसलिए उससे हताश न हों, बल्कि उसका सामना करें। सफलता हासिल करने के लिए आपको निरंतर प्रयास और सकारात्मक मानसिकता के साथ अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण दिखाना होगा। ऐसा करके आप अपने सपनों को तो हासिल करेंगे ही, दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेंगे।